रावण का मकराक्ष को सेनापति बनाना
अतिकाय के वध से क्रोधित रावण मकराक्ष को सेनापति नियुक्त करता है। मकराक्ष, जो खर का पुत्र है, विशाल सेना के साथ युद्ध के लिए प्रस्थान करता है।
विवरण
अतिकाय के वध का समाचार सुनकर रावण का क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। वह अपने सेनापतियों को बुलाता है। तब मकराक्ष, जो खर का पुत्र है और अत्यंत पराक्रमी है, स्वयं युद्ध के लिए आगे आता है। रावण उसे सेनापति नियुक्त करता है। मकराक्ष विशाल राक्षस सेना के साथ युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करता है। उसे देखकर वानर सेना में पुनः भय का संचार होता है।
(रावण का मकराक्ष को सेनापति बनाना)
🔆 प्रस्तावना : अतिकाय के वध के बाद रावण ने खरपुत्र मकराक्ष को सेनापति नियुक्त किया। मकराक्ष प्रतिशोध की अग्नि में जल रहा था, क्योंकि उसके पिता खर का वध राम ने किया था। यह सर्ग उसकी नियुक्ति और युद्ध के लिए प्रस्थान का वर्णन करता है।
😤 रावण का क्रोध (श्लोक १-८)
रावणः क्रोधसंयुक्तो मकराक्षमथाब्रवीत् ॥
गच्छ त्वं राक्षसश्रेष्ठ सैन्येन महता वृतः ।
रामं लक्ष्मणमुख्यांश्च जहि शत्रून्ममाज्ञया ॥
आरुरोह रथं शीघ्रं राक्षसैः बहुभिर्वृतः ॥
🚩 सेना का प्रस्थान (श्लोक ९-२०)
बभूव तुमुलः शब्दः सागरस्येव पर्वणि ॥
रथनेमिस्वनैर्घोरैर्भेरीशङ्खरवैस्तथा ।
दिशः सर्वा विरेजुश्च प्रकम्पितमहीतलाः ॥
व्यथितानि दिशो याता राक्षसं घोरदर्शनम् ॥
रामस्तु प्रत्युवाचेदं सुग्रीवं सत्यविक्रमः ।
न भेतव्यं प्लवंगेन्द्र मया सार्धं समागतः ॥
🛡️ युद्ध की तैयारी (श्लोक २१-३४)
उवाच लक्ष्मणं वीरं सुग्रीवं च महाबलम् ॥
सज्जीभवन्तु सैन्यानि मकराक्षं प्रति द्रुतम् ॥
नर्दन्तः सिंहनादांश्च चेलुः सर्वे समन्ततः ॥
इत्येष द्विपञ्चाशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
मकराक्षाभिषेको यो रावणस्य च निश्चयः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
👿 मकराक्ष का प्रतिशोध
मकराक्ष अपने पिता खर के वध का बदला लेने के लिए युद्ध में उतरता है, जो उसके मन में व्याप्त द्वेष को दर्शाता है।
🦍 राम का आत्मविश्वास
राम बार-बार वानरों को आश्वस्त करते हैं, जो उनके नेतृत्व कौशल को दर्शाता है।
🎯 शिक्षा : बदले की भावना से किए गए कार्य प्रायः विनाशकारी होते हैं।