विरूपाक्ष का वध
विरूपाक्ष और वानर सेना के बीच घोर युद्ध होता है। अंततः हनुमान विरूपाक्ष का वध कर देते हैं, जिससे राक्षस सेना में हाहाकार मच जाता है।
विवरण
विरूपाक्ष अपनी विशाल सेना के साथ वानरों पर आक्रमण करता है। भीषण युद्ध होता है। विरूपाक्ष अनेक वानरों को मार डालता है। तब हनुमान क्रोधित होकर उसके सामने आते हैं। दोनों में घोर युद्ध होता है। हनुमान विरूपाक्ष के रथ को नष्ट कर देते हैं और अंत में अपने पर्वताकार शरीर से उसे कुचल डालते हैं। विरूपाक्ष के मरते ही राक्षस सेना भाग खड़ी होती है और वानरों में उत्साह छा जाता है।
(विरूपाक्ष का वध)
🔆 प्रस्तावना : विरूपाक्ष ने वानरों पर भीषण आक्रमण किया। तब हनुमान उसके सामने आए और घोर युद्ध के बाद उसका वध कर दिया। यह सर्ग हनुमान के अद्वितीय पराक्रम का वर्णन करता है।
⚔️ युद्ध का आरंभ (श्लोक १-१०)
वानरान् समरे हन्तुं प्रायात् क्रोधसमन्वितः ॥
ते वानरा महाकाया राक्षसेन समागताः ।
युद्ध्यमाना महात्मानः समरे न विचेलिरे ॥
विव्याध समरे क्रुद्धो बहुशः प्लवगर्षभान् ॥
🦍 हनुमान का प्रकोप (श्लोक ११-२२)
गदां जग्राह महतीं वज्रसंहननोपमाम् ॥
तया गदया वीरो हनूमान् राक्षसेश्वरम् ।
जघान समरे क्रुद्धो मर्मभेदिभिराहवे ॥
हते तस्मिन् महावीर्ये राक्षसाः प्राद्रवन् भयात् ॥
🎉 वानरों का उत्साह (श्लोक २३-३६)
हनूमन्तं महात्मानं पूजयामासुरादरात् ॥
रामाय तत्समाचख्युः सुग्रीवप्रमुखास्तदा ॥
साधु वानरशार्दूल कृतं कर्म सुदुष्करम् ॥
इत्येष सप्तचत्वारिंशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
विरूपाक्षवधो यत्र हनूमत्पराक्रमः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🦍 हनुमान का पराक्रम
हनुमान ने एक बार फिर अपनी अद्वितीय शक्ति का प्रदर्शन किया और एक प्रमुख राक्षस योद्धा का वध किया।
💪 राम का आशीर्वाद
राम हनुमान की प्रशंसा करते हैं, जो उनके प्रति उनके स्नेह और सम्मान को दर्शाता है।
🎯 शिक्षा : सच्चा पराक्रम धर्म की रक्षा में ही निहित है।