रावण का क्रोध और विरूपाक्ष को सेनापति बनाना
पुत्र के वध से क्रोधित रावण विरूपाक्ष को सेनापति नियुक्त करता है और उसे युद्ध के लिए भेजता है। विरूपाक्ष विशाल सेना के साथ युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करता है।
विवरण
इंद्रजीत के वध से रावण अत्यंत क्रोधित और शोकाकुल हो जाता है। वह प्रतिशोध की अग्नि में जलता हुआ अपने सेनापतियों को बुलाता है। रावण विरूपाक्ष को सेनापति नियुक्त करता है और उसे विशाल राक्षस सेना के साथ युद्ध के लिए भेजता है। विरूपाक्ष रथ पर सवार होकर, अनेक अस्त्र-शास्त्रों से सुसज्जित, युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करता है। उसे देखकर वानर सेना में कुछ भय का संचार होता है, लेकिन वे युद्ध के लिए तैयार हो जाते हैं।
(रावण का क्रोध और विरूपाक्ष को सेनापति बनाना)
🔆 प्रस्तावना : इंद्रजीत के वध से रावण का क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने प्रतिशोध की अग्नि में जलते हुए विरूपाक्ष को सेनापति नियुक्त किया और युद्ध के लिए भेजा। यह सर्ग उसकी मानसिक स्थिति और युद्ध की तैयारी का वर्णन करता है।
😡 रावण का क्रोध (श्लोक १-१०)
विरूपाक्षं महात्मानं सेनापतिमथाब्रवीत् ॥
गच्छ शीघ्रं महाबाहो सैन्येन महता वृतः ।
जहि शत्रून् रणे वीर मम पुत्रस्य कारणात् ॥
आरुरोह रथं शीघ्रं तप्तकाञ्चनभूषणम् ॥
राक्षसैः बहुभिः सार्धं युद्धायाभिमुखो ययौ ॥
🚩 सेना का प्रस्थान (श्लोक ११-२२)
बभूव तुमुलः शब्दः सागरस्येव पर्वणि ॥
रथनेमिस्वनैर्घोरैर्भेरीशङ्खरवैस्तथा ।
दिशः सर्वा विरेजुश्च प्रकम्पितमहीतलाः ॥
व्यथितानि दिशो याता राक्षसं घोरदर्शनम् ॥
रामस्तु प्रत्युवाचेदं सुग्रीवं सत्यविक्रमः ।
न भेतव्यं प्लवंगेन्द्र मया सार्धं समागतः ॥
🛡️ युद्ध की तैयारी (श्लोक २३-३८)
उवाच लक्ष्मणं वीरं सुग्रीवं च महाबलम् ॥
सज्जीभवन्तु सैन्यानि विरूपाक्षं प्रति द्रुतम् ।
अद्य पश्यत मे वीर्यं युद्धे तस्मिन् दुरात्मनि ॥
नर्दन्तः सिंहनादांश्च चेलुः सर्वे समन्ततः ॥
इत्येष षट्चत्वारिंशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
विरूपाक्षाभिषेको यो रावणस्य च निश्चयः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
😤 रावण का क्रोध
पुत्र के वध ने रावण को अंधा कर दिया है, वह बिना सोचे-समझे नए सेनापति नियुक्त कर रहा है।
🛡️ राम का धैर्य
राम हर परिस्थिति में धैर्य नहीं खोते और सेना का मनोबल बढ़ाते हैं।
🎯 शिक्षा : क्रोध में लिए गए निर्णय प्रायः विनाशकारी होते हैं।