इंद्रजीत वध पर रावण का शोक
इंद्रजीत के वध का समाचार सुनकर रावण अत्यंत शोकाकुल हो जाता है। वह पुत्र के वियोग में विलाप करता है और युद्ध में जाने का निश्चय करता है।
विवरण
जब रावण को इंद्रजीत के वध का समाचार मिलता है, तो वह मूर्छित होकर गिर पड़ता है। होश में आने पर वह पुत्र के गुणों का स्मरण करते हुए विलाप करता है। वह राम और लक्ष्मण को कोसता है और युद्ध में जाने का निश्चय करता है। उसकी पत्नियाँ भी शोक करती हैं। रावण की सेना में भी शोक की लहर दौड़ जाती है। रावण अब स्वयं युद्ध के लिए तैयार होता है।
(इंद्रजीत वध पर रावण का शोक)
🔆 प्रस्तावना : इंद्रजीत के वध का समाचार सुनकर रावण शोक से व्याकुल हो गया। अपने परम प्रिय पुत्र के वियोग में वह विलाप करने लगा। यह सर्ग उस करुण दृश्य का वर्णन करता है।
😢 समाचार सुनना (श्लोक १-१०)
निपपात महीपृष्ठे मुहूर्तं च विचेतनः ॥
ततः संज्ञां समासाद्य विललाप सुदुःखितः ।
हा पुत्र हा महाबाहो हा वीर हा महाबल ॥
येन जित्वा पुरा देवान् सगन्धर्वान् सदानवान् ॥
💔 रावण का विलाप (श्लोक ११-२२)
न मे प्रियं राज्येन न प्राणैर्न धनेन च ॥
यस्य त्वं निधनं प्राप्तो लक्ष्मणेन बलीयसा ।
तं न पश्यामि संग्रामे हत्वा शत्रुं निवर्तये ॥
उत्थाय च महाराज युद्धायैव मनो दधे ॥
आज्ञापयामास तदा बलं सर्वं समन्ततः ।
युद्धायैव दृढं क्रुद्धः पुत्रशोकसमन्वितः ॥
👸 रानियों का शोक (श्लोक २३-३२)
निपपात महीपृष्ठे हाहाकारं चकार ह ॥
तां दृष्ट्वा पतितां देवीं राक्षस्यः समुपाद्रवन् ।
आश्वासयन्त्यो बहुधा विलपन्तीं सुदुःखिताम् ॥
युद्धोत्सुकाः समाजग्मु रावणस्याज्ञया तदा ॥
🔰 युद्ध का निर्णय (श्लोक ३३-४०)
हन्तुकामः सुसंक्रुद्धो युद्धाय समुपस्थितः ॥
आरुरोह रथं शीघ्रं तप्तकाञ्चनभूषणम् ।
राक्षसैः परिवार्याथ युद्धायाभिमुखो ययौ ॥
इत्येष पञ्चचत्वारिंशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
रावणस्य सुतशोको रामयुद्धाय निर्गमः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
💔 पितृ-वियोग
रावण का शोक अत्यंत मार्मिक है, जो उसके हृदय की कोमलता को दर्शाता है, यद्यपि वह अत्याचारी है।
⚔️ प्रतिशोध की अग्नि
पुत्र के वध ने रावण को और अधिक क्रोधित कर दिया और वह अंतिम युद्ध के लिए तैयार हो गया।
🎯 शिक्षा : अत्याचारी के पास भी पुत्र-स्नेह होता है, किन्तु उसके कर्म उसे विनाश की ओर ले जाते हैं।