हनुमान् और अंगद द्वारा यज्ञ भंग
लक्ष्मण के साथ हनुमान, अंगद और वानर सेना निकुंभिला पहुँचते हैं और इंद्रजीत के यज्ञ को भंग कर देते हैं। इंद्रजीत को युद्ध के लिए विवश होना पड़ता है।
विवरण
लक्ष्मण, हनुमान, अंगद, सुग्रीव, जाम्बवान और अन्य वानर निकुंभिला पहुँचते हैं, जहाँ इंद्रजीत यज्ञ कर रहा है। वे यज्ञ सामग्री को नष्ट कर देते हैं और राक्षसों से युद्ध करते हैं। इंद्रजीत को यज्ञ अधूरा छोड़कर युद्ध के लिए तैयार होना पड़ता है। वह क्रोधित होकर लक्ष्मण पर आक्रमण करता है। इस प्रकार इंद्रजीत की अमोघ शक्ति प्राप्त करने की योजना विफल हो जाती है।
(हनुमान् और अंगद द्वारा यज्ञ भंग)
🔆 प्रस्तावना : लक्ष्मण के नेतृत्व में वानर सेना निकुंभिला पहुँची और इंद्रजीत के यज्ञ को भंग कर दिया। इस प्रकार इंद्रजीत की अमोघ शक्ति प्राप्त करने की योजना विफल हो गई। यह सर्ग उस विजय का वर्णन करता है।
🏹 यज्ञ भंग (श्लोक १-१०)
इन्द्रजितं महाबाहुं यज्ञं कुर्वाणमास्थितम् ॥
हनूमान् अंगदश्चैव चेरतुः परमाहवे ।
विध्वंसयन्तौ यज्ञस्य सामग्री राक्षसान् रणे ॥
राक्षसाश्च महावीर्याः पेतुर्निहता भूतले ॥
😡 इंद्रजीत का क्रोध (श्लोक ११-२२)
धनुरादाय सज्यं च लक्ष्मणं प्रत्यवारयत् ॥
उवाच च महातेजा लक्ष्मणं रणमूर्धनि ।
अद्य त्वां निहनिष्यामि मद्बाणैर्भीमविक्रम ॥
मा त्वं वाचा बहूक्त्या च युद्ध्यस्व यदि शक्यते ॥
⚔️ युद्ध प्रारंभ (श्लोक २३-३४)
चिक्षेप बहुभिर्बाणैर्दीप्तैराशीविषोपमैः ॥
लक्ष्मणोऽपि महातेजाश्चिच्छेद तान् शरैः शितैः ॥
वारयामासुरन्योन्यं राक्षसांश्च समन्ततः ॥
इत्येष द्विचत्वारिंशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
यज्ञविघ्नो हनूमत्या इन्द्रजिद्युद्धमेव च ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🛡️ यज्ञ भंग का महत्व
यज्ञ भंग करके वानरों ने इंद्रजीत को अजेय होने से रोक दिया, जो रणनीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।
🤝 सामूहिक प्रयास
हनुमान, अंगद आदि सभी वानरों ने मिलकर यह कार्य किया, जो सामूहिक शक्ति का प्रतीक है।
🎯 शिक्षा : समय रहते शत्रु की योजना को विफल करना ही विजय की कुंजी है।