इंद्रजीत द्वारा माया से युद्ध
इंद्रजीत युद्ध में माया का प्रयोग करता है। वह अदृश्य होकर राम और लक्ष्मण पर बाणों की वर्षा करता है और दोनों भाइयों को नागपाश में बांध देता है।
विवरण
इंद्रजीत राम और लक्ष्मण से युद्ध करता है। वह माया का प्रयोग करके अदृश्य हो जाता है और आकाश से बाणों की वर्षा करता है। राम और लक्ष्मण उसे देख नहीं पाते, किन्तु उसके बाणों से घायल होते हैं। अंत में इंद्रजीत नागपाश नामक दिव्य अस्त्र का प्रयोग करता है, जिससे राम और लक्ष्मण बंध जाते हैं। वे मूर्छित होकर गिर पड़ते हैं। यह देख वानर सेना में हाहाकार मच जाता है। इंद्रजीत विजयी होकर लंका लौट जाता है।
(इंद्रजीत द्वारा माया से युद्ध)
🔆 प्रस्तावना : इंद्रजीत ने राम से युद्ध करने के लिए माया का सहारा लिया। वह अदृश्य होकर बाणों की वर्षा करता है और अंत में नागपाश से राम-लक्ष्मण को बांध देता है। यह सर्ग इंद्रजीत की मायावी युद्ध कला का वर्णन करता है।
🌀 माया का प्रयोग (श्लोक १-१२)
मायामास्थाय दुर्धर्षो युद्ध्यमानो न दृश्यते ॥
स रथेन महाघोरेण सिंहनादेन नादयन् ।
दिशः सर्वा विदिशश्च बाणवर्षैरवाकिरत् ॥
दिशो विदिश आकाशं बाणैरापूरयद् बली ॥
न च तं द्रष्टुमशकत् मायया प्रतिसंवृतम् ॥
🐍 नागपाश (श्लोक १३-२५)
नागपाशेन तौ बद्ध्वा रामलक्ष्मणावरिंदमौ ॥
ननाद सिंहनादं च हर्षेण महता वृतः ।
वानराश्च भयत्रस्ता विदुद्रुवुरितस्ततः ॥
हाहाकारो महानासीत् सर्वेषां वानराधिपे ॥
सुग्रीवो विह्वलः शोकाद् विभीषणसमन्वितः ।
निषेदुर्धरणीपृष्ठे मुह्यमाना मुहुर्मुहुः ॥
🏹 इंद्रजीत की विजय (श्लोक २६-४२)
उवाच प्रणतो वाक्यं रावणं राक्षसेश्वरम् ॥
बद्धौ मया महाबाहो रामलक्ष्मणवानरौ ।
नागपाशेन दुर्धर्षौ किं करोमि तवानघ ॥
साधु पुत्र महाबाहो कृतं कर्म सुदुष्करम् ॥
विश्राम्यतां भवानद्य श्वो युद्धं करवामहे ।
इत्युक्त्वा प्रेषयामास रावणो रावणिं गृहम् ॥
इत्येष चत्वारिंशः सर्गो युद्धकाण्डस्य वर्णितः ।
इन्द्रजिन्मायया युद्धं रामलक्ष्मणबन्धनम् ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🐍 नागपाश का प्रभाव
नागपाश एक दिव्य अस्त्र है, जिससे राम-लक्ष्मण बंध जाते हैं, जो युद्ध के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।
😢 वानरों की दुर्दशा
राम-लक्ष्मण के बंधन से वानर सेना में शोक और भय छा जाता है।
🎯 शिक्षा : युद्ध में कभी-कभी परिस्थितियाँ प्रतिकूल हो जाती हैं, लेकिन धैर्य नहीं खोना चाहिए।