इंद्रजीत का पुनः युद्ध में आना
रावण की सेना की दयनीय स्थिति देखकर इंद्रजीत पुनः युद्ध में आने का निश्चय करता है। वह रावण से आज्ञा लेकर रथ पर सवार होकर युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करता है।
विवरण
रावण के पराजित होने के बाद राक्षस सेना में हाहाकार मच जाता है। तब महावीर इंद्रजीत अपने पिता रावण से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगता है। रावण उसे आशीर्वाद देता है। इंद्रजीत रथ पर आरूढ़ होकर, विविध अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित, युद्धभूमि की ओर प्रस्थान करता है। उसे देखकर वानर सेना में भय का संचार होता है, क्योंकि वह पूर्व में इंद्र को पराजित कर चुका है।
(इंद्रजीत का पुनः युद्ध में आना)
🔆 प्रस्तावना : रावण के पराजित होने और उसके रथ के भंग हो जाने के बाद राक्षस सेना निराश हो गई। तब इंद्रजीत ने पिता की आज्ञा लेकर पुनः युद्ध में आने का निर्णय लिया। यह सर्ग उसके रणोत्साह और वानर सेना में भय के संचार का वर्णन करता है।
⚔️ इंद्रजीत का निर्णय (श्लोक १-१२)
रावणिं क्रोधसंयुक्तो रावणो वाक्यमब्रवीत् ॥
पुत्र गच्छ महाबाहो युद्धायैव समाहितः ।
जहि शत्रून् रणे वीर यथा वृत्रं पुरंदरः ॥
आरुरोह रथं शीघ्रं तप्तकाञ्चनभूषणम् ॥
तमारूढं रथेन्द्रेण दीप्यमानं स्वतेजसा ।
न शेकुर्वानरा द्रष्टुं भास्करं प्रति रश्मयः ॥
😨 वानरों में भय (श्लोक १३-२५)
स्मृत्वा तस्य पुरा कर्म येन जित्वा सुरेश्वरम् ॥
सुग्रीवस्त्वब्रवीद्रामं भयार्तः शरणैषिणम् ।
अयं स रावणिः क्रूरो युद्धाय समुपस्थितः ॥
न भेतव्यं प्लवंगेन्द्र मया सार्धं समागतः ॥
अहमेनं विनाशिष्ये ससैन्यं रणमूर्धनि ।
प्रतीक्षतां भवानत्र यावदेनं निहन्म्यहम् ॥
🔮 युद्ध की तैयारी (श्लोक २६-३८)
उवाच लक्ष्मणं वीरं सुग्रीवं च महाबलम् ॥
सज्जीभवन्तु सैन्यानि राक्षसेन्द्रजितं प्रति ।
अद्य पश्यत मे वीर्यं युद्धे तस्मिन् दुरात्मनि ॥
नर्दन्तः सिंहनादांश्च चेलुः सर्वे समन्ततः ॥
इत्येष एकोनचत्वारिंशः सर्गो युद्धकाण्डतः ।
रावणेः पुनरागमो रामस्य च महोद्यमः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
👊 इंद्रजीत का साहस
पिता की पराजय के बाद भी इंद्रजीत युद्ध में उतरता है, जो उसकी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है।
🛡️ राम का आत्मविश्वास
राम वानरों को आश्वस्त करते हैं और स्वयं युद्ध के लिए तत्पर होते हैं।
🎯 शिक्षा : कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।