रावण का पराजित होना
राम और रावण के बीच भीषण युद्ध के बाद राम रावण को पराजित कर देते हैं। रावण का रथ भंग हो जाता है और वह धरती पर गिर जाता है।
विवरण
राम और रावण का युद्ध अपने चरम पर होता है। राम ब्रह्मास्त्र का संधान करते हैं और रावण के वक्ष पर प्रहार करते हैं। रावण का रथ भंग हो जाता है, उसके अस्त्र-शस्त्र निष्प्रभावी हो जाते हैं, और वह मूर्छित होकर धरती पर गिर जाता है। राक्षस सेना में हाहाकार मच जाता है, जबकि वानर सेना जय-जयकार करती है। राम रावण के प्रति आदर भाव रखते हैं, क्योंकि वह एक महान योद्धा है। यह सर्ग रावण की पराजय और राम की विजय की पूर्व घोषणा करता है।
(रावण का पराजित होना)
🔆 प्रस्तावना : राम और रावण का युद्ध अब अंतिम चरण में है। राम ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करते हैं और रावण का रथ भंग कर देते हैं। यह सर्ग रावण की पराजय और राम की विजय का प्रारंभिक क्षण है।
🏹 ब्रह्मास्त्र का प्रयोग (श्लोक १-१२)
ब्रह्मास्त्रं प्रसमाधाय मुमोचैनदरिंदमः ॥
तदस्त्रं प्रज्वलन् दीप्त्या रावणस्य वधाय वै ।
जगाम रथिनां श्रेष्ठं रावणं रणमूर्धनि ॥
वक्षस्येव सुसंक्रुद्धः सर्वप्राणहरं महत् ॥
ततः स रावणो राजा भृशमार्तो ननाद ह ।
रथोपस्थे व्यतिष्ठत सम्मूर्छितः पपात च ॥
💥 रथ का भंग होना (श्लोक १३-२२)
भग्नाश्च बहवो यूपा ध्वजो भग्नः पपात ह ॥
रावणस्य तदा राजन् रामबाणप्रपीडितः ।
बभूव विरथः श्रीमान् राक्षसेन्द्रः प्रतापवान् ॥
रामबाणाभिभूतास्ते न शेकुः स्थातुमग्रतः ॥
हाहाकारो महानासीद् राक्षसानां विशां पते ।
वानराश्च महात्मानो नेदुर्हर्षसमन्विताः ॥
🙏 राम का आदर (श्लोक २३-३२)
गच्छ शत्रोर्ममासन्नं रावणं युद्धदुर्मदम् ॥
न हन्तव्यः सुसंक्रुद्धैरयं शत्रुर्नृशंसवत् ।
योद्धव्यं धर्मतः सर्वैः क्षत्रियेण विशेषतः ॥
एतदर्थं हि राज्यानि योधवृत्तं विधीयते ॥
रावणं प्रत्युवाचेदं प्राञ्जलिः समुपस्थितः ॥
रामस्य वचनात् राजन् क्षमस्व सुमहद्वचः ।
युद्धे नोत्सहसे भूयः कृतकर्मासि राक्षस ॥
इत्येष अष्टत्रिंशः सर्गो युद्धकाण्डस्य वर्णितः ।
रावणस्य पराजयश्च रामस्य विजयस्तथा ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🕊️ राम का धर्मपरायणता
राम ने युद्ध के नियमों का पालन करते हुए रावण के प्रति भी आदर दिखाया, जो उनके चरित्र की महानता को दर्शाता है।
💔 रावण की दुर्दशा
रावण का विरथ होना और मूर्छित होना उसके अहंकार के अंत का प्रतीक है।
🎯 शिक्षा : पराजय के बाद भी शत्रु के प्रति सम्मान रखना उच्च चरित्र का लक्षण है। राम ने युद्ध धर्म का पालन किया।