निकुंभ का वध
निकुंभ युद्ध में वानर सेना का संहार करता है, अंततः हनुमान उसे मार गिराते हैं।
विवरण
निकुंभ सेनापति बनकर युद्धभूमि में उतरता है। वह अत्यंत पराक्रम से युद्ध करता है, अनेक वानरों को मार गिराता है। वानर सेना में हाहाकार मच जाता है। तब हनुमान उसका सामना करते हैं। दोनों में घोर युद्ध होता है। निकुंभ मायावी शक्तियों का प्रयोग करता है, परंतु हनुमान अपने बल और भक्ति से उसे परास्त कर देते हैं। अंततः हनुमान निकुंभ का वध कर देते हैं। इससे राक्षस सेना को बड़ा झटका लगता है।
(निकुंभ का वध)
🔆 प्रस्तावना : निकुंभ सेनापति बनकर युद्ध में उतरता है और वानरों का संहार करता है। हनुमान उसका सामना करते हैं और अंततः उसका वध करते हैं।
💢 निकुंभ का आक्रमण (श्लोक १-१५)
गदया भीमरूपया निजघान प्लवंगमान् ॥
ते वानरा भयत्रस्ता निकुम्भभयपीडिताः ।
दुद्रुवुः सर्वतो राजन् न शेकुः स्थातुमग्रतः ॥
गदां गृहीत्वा वेगेन तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत् ॥
⚡ हनुमान-निकुंभ युद्ध (श्लोक १६-४०)
निकुम्भो मायया युद्धं चकार स महाकपिः ॥
हनूमानपि तेजस्वी मायां तस्य व्यनाशयत् ।
गदया ताडयामास निकुम्भं हृदि दारुणम् ॥
तस्मिन् हते महावीर्ये राक्षसाः समकम्पयन् ॥
हाहाकारो महानासीत् सैन्येषु राक्षसेशितुः ।
हनूमता हतं दृष्ट्वा निकुम्भं युद्धदुर्मदम् ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🦍 हनुमान का पराक्रम
हनुमान ने एक बार फिर अपनी वीरता का परिचय दिया और एक शक्तिशाली राक्षस का वध किया।
📉 रावण का घटता बल
निकुंभ के वध से रावण के प्रमुख योद्धा समाप्त हो गए, अब उसके पास स्वयं के अतिरिक्त कोई नहीं बचा।
🎯 शिक्षा : अधर्म और अहंकार के पुजारी अंततः नष्ट हो जाते हैं। धर्म की रक्षा करने वाले हनुमान जैसे भक्त सदा विजयी होते हैं।