कुंभकर्ण-राम युद्ध
कुंभकर्ण युद्धभूमि में प्रवेश करता है और वानर सेना का संहार करता है। अंत में राम उससे युद्ध करते हैं।
विवरण
रावण द्वारा जगाए जाने पर महापराक्रमी कुंभकर्ण युद्ध के लिए तैयार होता है। वह लंका से निकलकर वानर सेना पर टूट पड़ता है, हजारों वानरों को मार गिराता है। उसके भीषण पराक्रम से सभी वानर भयभीत हो जाते हैं। तब राम स्वयं कुंभकर्ण का सामना करते हैं। दोनों में घमासान युद्ध होता है, जिसमें राम दिव्यास्त्रों का प्रयोग करते हैं किंतु कुंभकर्ण मायावी शक्तियों से उनका सामना करता है। यह सर्ग कुंभकर्ण के अदम्य साहस और राम के धैर्य को दर्शाता है।
(कुंभकर्ण-राम युद्ध)
🔆 प्रस्तावना : निद्रा से जागृत कुंभकर्ण भीषण रूप धारण कर युद्धभूमि में आता है। वानर सेना उसे देखकर त्रस्त हो जाती है। राम उसका सामना करते हैं और घोर युद्ध आरंभ होता है।
🏹 कुंभकर्ण का युद्ध-प्रवेश (श्लोक १-१५)
निर्ययौ नगरात् तूर्णं रावणेन समाहितः ॥
स ददर्श महात्मानं रामं दशरथात्मजम् ।
वानरैर्बहुभिः सार्धं युद्धाय समुपस्थितम् ॥
गिरीन् प्रक्षिप्य वेगेन निजघान प्लवंगमान् ॥
ते भग्ना वानराः सर्वे दुद्रुवुः सर्वतो दिशम् ।
न शेकुः स्थातुमग्रे तु कुम्भकर्णस्य रक्षसः ॥
⚔️ राम-कुंभकर्ण संग्राम (श्लोक १६-४८)
शरैराहत्य सङ्क्रुद्धस्तस्थौ सिंह इवानदत् ॥
कुम्भकर्णोऽपि संक्रुद्धो राघवं प्रति धन्विनम् ।
अभिदुद्राव वेगेन गर्जन् मेघ इवाम्बरे ॥
रामः शरैः कुम्भकर्णं विव्याध हृदि दारुणैः ॥
कुम्भकर्णो गदां गृह्य राममभ्यद्रवद् बली ।
रामश्चिच्छेद तां गदां शरैः सन्नतपर्वभिः ॥
एवं युद्धं प्रवृत्तं तद् भीमरूपं भयानकम् ।
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
👹 कुंभकर्ण का राक्षसी पराक्रम
कुंभकर्ण का युद्ध कौशल और बल अद्वितीय है। वह अकेला ही वानर सेना को तितर-बितर कर देता है।
🛡️ राम का धैर्य
राम शांतिपूर्वक कुंभकर्ण के प्रहारों का सामना करते हैं और अंत में उसे परास्त करने की योजना बनाते हैं।
🎯 शिक्षा : इस सर्ग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि चाहे शत्रु कितना भी शक्तिशाली हो, धैर्य और नीति से उसका सामना किया जा सकता है।