राम का अंगद को सम्मानित करना
राम अंगद के साहस, बुद्धि और वीरता की प्रशंसा करते हैं, विशेष रूप से रावण के दरबार में उनके दूतत्व की। अंगद को सम्मानित करते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
विवरण
राम ने अंगद को बुलाकर उनके अद्वितीय साहस का स्मरण किया, जब वे रावण के दरबार में दूत बनकर गए थे और अपनी बुद्धि से राक्षसों को चुनौती दी थी। राम ने अंगद के बल, पराक्रम और निष्ठा की सराहना की। अंगद ने विनम्रतापूर्वक राम की स्तुति की और उनके प्रति अपनी भक्ति व्यक्त की। राम ने अंगद को आशीर्वाद दिया कि वे सदा सम्मानित रहेंगे। यह सर्ग वीरता और कूटनीति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग १२०
(राम का अंगद को सम्मानित करना)
🔆 प्रस्तावना : युद्ध के बाद राम ने सभी वीरों का यथोचित सम्मान किया। अब वे अंगद को बुलाते हैं, जिन्होंने रावण के दरबार में दूत बनकर अद्वितीय साहस और बुद्धि का परिचय दिया था।
🦁 राम द्वारा अंगद के साहस की प्रशंसा (श्लोक १-५)
अङ्गद त्वत्कृतं कर्म स्मरामि सुमहत् प्रियम् ॥
रावणस्य सभामध्ये गत्वा यत् साहसं कृतम् ।
यत्र रक्षांसि दुर्धर्षा भवता तर्जितानि च ॥
बालेनापि त्वया वीर्यं दर्शितं रावणस्य ह ।
न त्वादृशो मया दृष्टः कश्चिदन्यः प्लवंगमः ॥
🙇 अंगद की विनम्रता (श्लोक ६-१०)
प्राञ्जलिः प्रणतो भूत्वा वचनं चेदमब्रवीत् ॥
न मया किञ्चिदप्यत्र कृतं राम तव प्रभो ।
त्वत्प्रसादादिदं प्राप्तं यत्किञ्चित् साधु वाsसाधु ॥
त्वं गतिस्त्वं महाबाहो त्वं नाथस्त्वं परायणः ।
न मेऽन्यदस्ति राजेन्द्र त्वत्पादाब्जात् परायणम् ॥
यदा त्वं मयि धर्मात्मन् प्रसन्नो रघुनन्दन ।
तदा मे सर्वमेवेदं सुखं जयपराजयौ ॥
✨ राम का आशीर्वाद और अंगद का सम्मान (श्लोक ११-१५)
अङ्गद प्रीतोsस्मि भद्रं ते सर्वदा त्वं मम प्रियः ॥
मत्प्रसादाच्च ते वीर्यं बुद्धिश्चापि विवर्धताम् ।
यशश्च तव धर्मात्मन् स्थास्यति जगतीतले ॥
इत्युक्त्वा राघवः श्रीमान् अङ्गदं समपूजयत् ।
माल्यैर्वस्त्रैश्च भूषैश्च प्रीतियुक्तो नरर्षभः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🧠 बुद्धि और साहस
अंगद ने रावण के दरबार में जो साहस और बुद्धि का परिचय दिया, वह अद्वितीय है। उन्होंने अकेले ही सभी राक्षसों को चुनौती दी और राम का संदेश प्रभावी ढंग से पहुँचाया।
👑 राम का नेतृत्व
राम ने अंगद को सम्मानित करके यह सिद्ध किया कि वे प्रत्येक योद्धा के योगदान को महत्त्व देते हैं, चाहे वह कितना भी युवा हो। यह एक कुशल नेता का गुण है।
🎯 शिक्षा : अंगद का चरित्र हमें सिखाता है कि सच्चा साहस और बुद्धि किसी भी आयु में प्रकट हो सकती है। साथ ही, विनम्रता और समर्पण ही व्यक्तित्व को निखारते हैं।