युद्ध काण्ड अध्याय 113

राम के राज्य की शांति

राम के शासन में संपूर्ण राज्य में शांति का साम्राज्य था। कोई कलह नहीं, कोई युद्ध नहीं, सब धर्मपूर्वक रहते थे।

विवरण

राम के राज्य में न केवल भौतिक समृद्धि थी, बल्कि सर्वत्र शांति का वातावरण भी था। न कहीं युद्ध की आशंका, न आंतरिक कलह। प्रजा परस्पर प्रेम से रहती थी, सभी वर्ण अपने-अपने धर्म का पालन करते थे। राज्य में किसी प्रकार का अपराध नहीं होता था। वन्य पशु भी आपस में बैर नहीं रखते थे। देश की सीमाएँ सुरक्षित थीं और पड़ोसी राज्य भी मैत्रीभाव से रहते थे। इस प्रकार राम के शासनकाल में अखंड शांति स्थापित थी।

📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – युद्धकाण्ड – सर्ग ११३

(राम के राज्य की शांति)

ॐ श्री परमात्मने नमः ॥ अथ त्रयोदशोत्तरशततमः सर्गः ॥

🔆 प्रस्तावना : समृद्धि और यश के पश्चात राम के राज्य की सबसे बड़ी विशेषता थी वहाँ की अटूट शांति। इस सर्ग में उस शांति का सुंदर वर्णन है।

☮️ राज्य में शांति का वातावरण (श्लोक १-५)

॥ श्लोक १-५ ॥
न विग्रहः क्वचिद्राज्ञो न विरोधः परस्परम् ।
प्रजाः सुखेन वर्तन्ते रामे राज्यं प्रशासति ॥
न चौराः प्राणिनां हिंस्रा न दस्युभयमण्वपि ।
न शस्त्रकोपो न क्षुद्भयमासीद्रामस्य शासने ॥
सर्वे धर्मपरा नित्यं सत्यवाक्या जितेन्द्रियाः ।
आसन्नरेन्द्रे रामे तु पालयति प्रजाः प्रियाः ॥
📖 भावार्थ : राम के राज्य शासन करते समय राजा (राम) का किसी से विग्रह (युद्ध) नहीं था, न ही प्रजा में परस्पर विरोध था। सभी प्रजा सुखपूर्वक निवास करती थी। कोई चोर प्राणियों की हिंसा नहीं करता था, डाकुओं का तनिक भी भय नहीं था। न शस्त्रों का कोप था, न भूख का भय। राम के शासन में सभी नित्य धर्मपरायण, सत्यवादी और जितेंद्रिय थे। जब राजा राम अपनी प्रिय प्रजा का पालन करते थे, तब यह स्थिति थी। यहाँ शांति के मूल में धर्म और संयम को रखा गया है। जब प्रजा स्वयं धर्मपरायण होती है, तो राज्य में शांति स्वाभाविक रूप से स्थापित होती है।

🕊️ प्रकृति में शांति और सहअस्तित्व (श्लोक ६-१०)

॥ श्लोक ६-१० ॥
सिंहाश्च गोवृषैः सार्धं वनेषु सह चेरिरे ।
बिडाला मूषकैः सार्धं क्रीडन्ति स्म निराकुलाः ॥
नकुलाश्च सरीसृपैर्व्याघ्रा मृगगणैः सह ।
वर्तन्ते स्म निरातङ्का रामस्य वसुधाधिपे ॥
वृक्षाः सर्वे फलोपेता लता गुल्माश्च पुष्पिताः ।
विहङ्गा मधुरं गीतं गायन्ति स्म मुदान्विताः ॥
📖 भावार्थ : राम के राज्य में वनों में सिंह और गौ-वृषभ (बैल) एक साथ विचरण करते थे। बिल्लियाँ चूहों के साथ निराकुल होकर खेलती थीं। नेवले और सरीसृप (साँप आदि), व्याघ्र और मृगगण – सब निर्भय होकर रहते थे। सभी वृक्ष फलों से लदे थे, लताएँ और झाड़ियाँ पुष्पित थीं। पक्षी आनंदपूर्वक मधुर गीत गाते थे। यह वर्णन अद्भुत है – राम के धर्मपरायण शासन का प्रभाव समस्त प्रकृति पर पड़ा। परभक्षी और शाकाहारी प्राणियों के बीच भी वैरभाव समाप्त हो गया। यह शांति की चरम अभिव्यक्ति है कि स्वभाव से विरोधी जीव भी साथ रह सकते हैं।

🛡️ सीमाओं की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय शांति (श्लोक ११-१५)

॥ श्लोक ११-१५ ॥
न कश्चिद्विग्रहस्तत्र न कश्चित्प्रतिरोधकः ।
राजानः सर्व एवासन् रामस्य वशवर्तिनः ॥
सुग्रीवो वानरैः सार्धं विभीषणपुरोगमाः ।
राक्षसाश्चापि मैत्र्यासन् रामे राज्यं प्रशासति ॥
सर्वदेशाः सुनिर्विघ्ना वणिक्पथाः सुखावहाः ।
रामस्य शासने नित्यं शान्तिरासीदकृत्रिमा ॥
📖 भावार्थ : राज्य में कहीं भी कोई विग्रह नहीं था, न कोई प्रतिरोधक (विरोधी) था। सभी राजा राम के अधीन हो गए थे। सुग्रीव वानरों के साथ और विभीषण प्रमुख राक्षसगण राम के प्रति मैत्रीभाव से रहते थे। सभी देश निर्विघ्न थे, व्यापार मार्ग सुखद थे। राम के शासन में नित्य अकृत्रिम (स्वाभाविक) शांति थी। यहाँ बताया गया है कि राम की शांति केवल आंतरिक नहीं थी, बल्कि बाह्य शत्रुओं से भी मुक्ति थी। मित्र राज्यों के साथ सौहार्द था और व्यापार निर्बाध था। यह वैश्विक शांति का आदर्श है।
॥ श्लोक १६-१७ ॥
एवं शान्तिमये राज्ये रामो राजर्षिसत्तमः ।
रेमे सीतया सार्धं भ्रातृभिः परिवारितः ॥
शान्तिरेषा परा प्रोक्ता राज्ञो धर्मपरस्य च ।
यां प्राप्य न निवर्तन्ते शान्तिपदं सनातनम् ॥
📖 भावार्थ : इस प्रकार शांतिमय राज्य में राजर्षिश्रेष्ठ राम सीता के साथ और भाइयों से परिवारित होकर आनंदित रहते थे। यह शांति परम कही गई है, जो धर्मपरायण राजा को प्राप्त होती है। इस शांति को प्राप्त करके वे सनातन शांतिपद से विचलित नहीं होते। अंतिम श्लोक में शांति को परम पद बताया गया है, जो धर्मपरायण राजा का लक्ष्य है।

🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व

🕊️ शांति का वैश्विक स्वरूप

इस सर्ग में शांति केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं, बल्कि पशु-पक्षी और प्रकृति तक व्याप्त है। यह दर्शाता है कि सच्ची शांति सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण में निहित है।

⚖️ धर्म और शांति का संबंध

राम के राज्य में शांति का कारण धर्म का पालन था। जहाँ धर्म होता है, वहाँ अधर्म से उत्पन्न संघर्ष स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

🦁 प्रकृति का सामंजस्य

सिंह और बैल का साथ रहना असंभव-सा लगता है, परंतु रामराज्य में ऐसा संभव हुआ। यह बताता है कि धर्म का प्रभाव प्राकृतिक नियमों को भी बदल सकता है।

🤝 अंतर्राष्ट्रीय सौहार्द

सभी राजा राम के अधीन और मित्रता में रहते हैं – यह एक वैश्विक शांति व्यवस्था का आदर्श प्रस्तुत करता है, जहाँ कोई युद्ध नहीं, केवल सहयोग है।

🎯 शिक्षा : इस सर्ग से हमें यह सीख मिलती है कि शांति केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि आंतरिक धर्म और नैतिकता से आती है। राम की तरह यदि हम धर्मपूर्वक आचरण करें, तो हमारे आसपास भी शांति का वातावरण बन सकता है।

ॐ तत्सत् – इति वाल्मीकीय रामायणे युद्धकाण्डे त्रयोदशोत्तरशततमः सर्गः ॥
॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥
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