बालि द्वारा रावण को अपनी कमर में बांधना
रावण अहंकार में किष्किन्धा जाता है और बालि को युद्ध के लिए ललकारता है। बालि उसे पकड़कर अपनी कमर में बाँध लेता है और समुद्र पार की यात्रा पर निकल जाता है।
विवरण
रावण ने एक बार फिर अपने बल के अहंकार में वानरराज बालि को युद्ध के लिए ललकारा। वह किष्किन्धा गया और वहाँ बालि को ललकारा। उस समय बालि सुग्रीव आदि के साथ विश्राम कर रहा था। बालि ने क्रोधित होकर रावण को पकड़ लिया और उसे अपनी बगल (या कमरबन्द) में दबोच लिया। फिर वह रावण को लेकर समुद्र के पार चला गया और उसे एक खिलौने की तरह इधर-उधर घुमाया। रावण के सभी प्रयास विफल रहे। अन्त में बालि ने उसे छोड़ दिया और रावण को उपदेश दिया कि बल का घमंड न करे। रावण लज्जित होकर लंका लौट गया।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – उत्तरकाण्ड – सर्ग ३९
(बालि द्वारा रावण को अपनी कमर में बांधना)
🔆 प्रस्तावना : रावण को अर्जुन से मुक्ति मिली, किन्तु उसका अहंकार शान्त नहीं हुआ। अब वह किष्किन्धा जाकर वानरराज बालि को चुनौती देता है। परिणाम उसकी पुनः पराजय होती है।
🚩 रावण का किष्किन्धा गमन (श्लोक १-५)
अर्जुनस्य पराभूतो बालिं स्मृत्वा च वीर्यवान्॥
कथं नु खलु वानरेन्द्रो बालिर्नाम महाबलः।
तस्य वीर्यं परं ज्ञातुं गमिष्यामि स्वयं तदा॥
इति संचिन्त्य रात्रौ स ययौ किष्किन्धया सह।
प्रभाते सूर्यनाभासे किष्किन्धां ददृशे ततः॥
सुग्रीवप्रमुखा वीरा वानराश्च समन्ततः।
बालिं च ददृशे राज्ञः शयानं माल्यभूषितम्॥
💢 बालि का क्रोध और युद्ध (श्लोक ६-१०)
किं त्वया मे प्रयोजनं युद्धेनाक्षिप्तचेतसा॥
रावणः प्राह विक्रम्य युद्धं देहि न संशयः।
ततः क्रोधात्समुत्थाय बाली तं परिगृह्य च॥
कक्षे बद्ध्वा महाबाहुः समुद्रं प्रति जग्मिवान्।
ननन्द च मनो बालेर्बलेन परमेण हि॥
रावणो विस्मितो वीक्ष्य बलं तस्य महात्मनः।
न चैनं मोचयामास बालिनं यत्नवानपि॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🐒 बालि का अद्वितीय बल
बालि ने रावण को बिना किसी अस्त्र-शस्त्र के केवल अपने शारीरिक बल से परास्त किया। यह बताता है कि सच्चा बल अहंकार में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और साधना में निहित है। बालि को ब्रह्मा का वरदान था कि उससे युद्ध करने वाला आधा बल उसमें समा जाता था।
🌊 विनम्रता की सीख
रावण का बार-बार पराजित होना उसके अहंकार का परिणाम था। वह अर्जुन से भी हारा और बालि से भी। इससे स्पष्ट है कि बल का घमंड करने वाले का पतन निश्चित है। रावण को बालि ने छोड़ते समय यही उपदेश दिया।
🎯 शिक्षा : इस सर्ग से शिक्षा मिलती है कि चाहे कितना भी बलशाली क्यों न हो, विनम्रता और धर्म ही सच्ची रक्षा करते हैं। अहंकार सदैव पतन का कारण बनता है।