अर्जुन (सहस्रबाहु) द्वारा रावण को बंदी बनाना
रावण के अहंकारपूर्ण व्यवहार से कुपित होकर सहस्रबाहु अर्जुन उसे युद्ध में परास्त करता है और बन्दी बना लेता है।
विवरण
रावण ने महिष्मती पहुँचकर सहस्रबाहु अर्जुन से मिलने की इच्छा प्रकट की। किन्तु अर्जुन अपनी रानियों के साथ नर्मदा के तट पर जल-क्रीड़ा में व्यस्त था। रावण ने उसका अपमान समझा और क्रोध में आकर उसकी सेना पर आक्रमण कर दिया। जब यह समाचार अर्जुन को मिला, तो वह क्रोधित होकर युद्ध-भूमि में आया। उसने अपनी हजार भुजाओं से अनेक अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग कर रावण को चारों ओर से घेर लिया। रावण ने बड़ी वीरता से युद्ध किया, किन्तु अर्जुन के बल के आगे वह टिक न सका। अर्जुन ने उसे बन्दी बनाकर अपनी राजधानी महिष्मती में कारागार में डाल दिया। यह घटना रावण के लिए अत्यन्त लज्जास्पद थी।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – उत्तरकाण्ड – सर्ग ३७
(अर्जुन द्वारा रावण को बन्दी बनाना)
🔆 प्रस्तावना : रावण के अहंकार और अर्जुन के अपमान ने युद्ध की भूमिका तैयार कर दी। अब देखते हैं कि कैसे हजार भुजाओं वाले वीर अर्जुन ने रावण को धूल चटाई।
⚡ रावण का अपमान और आक्रमण (श्लोक १-५)
राजा मिलितुमिच्छति सहस्रबाहुना सह॥
स तु क्रीडारतो दूतं प्रत्युवाच नृपोत्तमः।
गच्छ रावणमाख्याहि व्यग्रोऽहं नागमे पुनः॥
दूतः श्रुत्वा वचस्तस्य रावणाय न्यवेदयत्।
तच्छ्रुत्वा रावणः क्रुद्धो राक्षसान्समचोदयत्॥
हन्यतां दूष्यतां सर्वमर्जुनस्य बलं महत्।
इत्युक्त्वा राक्षसैः सार्धं नर्मदातीरमाययौ॥
🗡️ युद्ध का आरम्भ (श्लोक ६-१०)
हाहाकारो महानासीत्सैन्येषु समराजिरे॥
श्रुत्वा तदर्जुनः क्रोधात्स्वयमायान्महारणे।
ददर्श राक्षसान्सर्वान्हन्यमानान्स्वसैनिकान्॥
ततो धनुः समादाय सहस्रं बाहुभिर्विभुः।
अस्त्राणि विविधान्येव मुमोच राक्षसोपरि॥
विस्फुलिङ्गा विनिष्पेतुः शराणां समरे तदा।
राक्षसा भयसंविग्ना दुद्रुवुः सर्वतो दिशम्॥
⚔️ रावण-अर्जुन युद्ध (श्लोक ११-१५)
अर्जुनं प्रति चिक्षेप शक्तिं कनकभूषिताम्॥
तामापतन्तीं सहसा चिच्छेदार्जुन एव हि।
सहस्रबाहुभिर्बाणैः शतधा समकल्पयत्॥
ततः क्रुद्धो दशग्रीवो मायामास्थाय राक्षसीम्।
मुमोच विविधान्बाणान्वज्राशनिसमप्रभान्॥
न चार्जुनं विव्यथे ते शराः पुष्पमिवापतन्।
तस्य बाहुसहस्रेण प्रतिहन्यन्त सर्वशः॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🤲 अहंकार का पतन
रावण का अहंकार ही उसके पतन का कारण बना। उसने अर्जुन के व्यस्त होने को अपना अपमान समझा और बिना सोचे-समझे आक्रमण कर दिया। परिणामस्वरूप उसे बन्दी बनना पड़ा। यह घटना हमें सिखाती है कि क्रोध में लेकर किया गया कोई भी निर्णय हानिकारक हो सकता है।
💪 सहस्रबाहु का बल
अर्जुन के पास हजार भुजाएँ होने का अर्थ केवल शारीरिक बल नहीं, बल्कि अनेक कार्यों को एक साथ करने की क्षमता भी है। यह बताता है कि ईश्वर ने जिसे जैसी शक्ति दी है, उसका उपयोग धर्म के लिए करना चाहिए। अर्जुन ने अपने बल का दुरुपयोग नहीं किया, बल्कि रावण जैसे आततायी को परास्त कर न्याय किया।
🎯 शिक्षा : इस सर्ग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बल का घमंड करने वाला अंततः पराजित होता है। जो व्यक्ति धर्म और विनय के मार्ग पर चलता है, उसे विजय अवश्य मिलती है।