रावण और यक्षों के बीच युद्ध
रावण द्वारा यक्षों पर आक्रमण और उनके राज्य को लूटने का वर्णन। यक्षराज कुबेर के आदेश पर यक्षों ने रावण का सामना किया, परंतु रावण की अजेयता के कारण वे पराजित हुए।
विवरण
रावण ने अपनी अमित शक्ति के बल पर यक्षों के राज्य पर आक्रमण किया। यक्ष, जो कुबेर के अनुयायी थे, ने वीरतापूर्वक युद्ध किया, लेकिन रावण के प्रचंड पराक्रम के सामने टिक न सके। रावण ने यक्षों के धन-सम्पत्ति लूट ली और उनके नगर को नष्ट कर दिया। अंत में कुबेर ने हस्तक्षेप किया और यक्षों को समझाकर युद्ध समाप्त किया।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – उत्तरकाण्ड – सर्ग १४
(रावण और यक्षों के बीच युद्ध)
🔆 प्रस्तावना : रावण के अत्याचार बढ़ते जा रहे थे। अब उसकी दृष्टि यक्षों के धन और ऐश्वर्य पर पड़ी। यह सर्ग रावण और यक्षों के युद्ध का वर्णन करता है, जिसमें रावण विजयी होता है।
यक्षराज्यं समुद्दिश्य प्रययौ राक्षसेश्वरः ॥
मणिभद्रः सुसेनश्च यक्षसेनापती उभौ ।
प्रत्युद्ययौ रणे राम रावणं बलदर्पितम् ॥
शरवर्षैः महाघोरैः अन्योन्यं समवर्षयन् ॥
रावणो राक्षसैः सार्धं यक्षानीकं व्यनाशयत् ।
पेतुर्यक्षसहस्राणि रणे राम सहस्रशः ॥
कुबेरं शरणं प्राप्ता रावणानीकपीडिताः ॥
कुबेरस्तानुवाचेदं यूयं युद्धान्निवर्तत ।
रावणो दुर्जयो युद्धे ब्रह्मदानवरो हि सः ॥
रावण और यक्षों का युद्ध रावण की अजेयता और उसके बढ़ते अहंकार को दर्शाता है। यक्षों की पराजय यह बताती है कि रावण के सामने उस समय कोई टिक नहीं सकता था। कुबेर का यह कथन कि रावण दुर्जय है, ब्रह्मा के वरदान के कारण, आगे चलकर राम के अवतार की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह सर्ग रावण की विजयगाथा का हिस्सा है, परंतु साथ ही यह संकेत देता है कि उसके अत्याचारों का अंत निकट है।