राम का महाप्रस्थान (देह त्याग) के लिए प्रस्थान
समय आने पर राम अपने पुत्रों को राज्य सौंपकर महाप्रस्थान के लिए तैयार होते हैं। काल (यम) के आगमन पर वे सभी प्राणियों सहित सरयू नदी की ओर प्रस्थान करते हैं।
विवरण
राम ने अयोध्या में बहुत वर्षों तक धर्मपूर्वक राज्य किया। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि उनका अवतार काल समाप्त होने वाला है, तब उन्होंने अपने पुत्रों कुश और लव को राज्य सौंपा। भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, विभीषण आदि सभी सहयोगियों को बुलाकर उनसे विदा ली। तब काल (मृत्यु) राम के समक्ष प्रकट हुआ और उन्हें अपने धाम लौट चलने का संकेत दिया। राम ने सभी से कहा कि जो उनके साथ जाना चाहे, वह उनके पीछे चले। वे स्वयं योगमार्ग से सरयू नदी की ओर बढ़े, और अनेक प्राणी – वानर, राक्षस, ऋषि – उनके पीछे-पीछे चल पड़े। यह सर्ग राम के सांसारिक जीवन के अंतिम क्षणों का मार्मिक वर्णन करता है।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – उत्तरकाण्ड – सर्ग १२१
(राम का महाप्रस्थान – देह त्याग के लिए प्रस्थान)
🔆 प्रस्तावना : राम ने अयोध्या में अनेक वर्षों तक धर्मपूर्वक राज्य किया। अब उनके अवतार का समय पूर्ण हुआ। वे अपने पुत्रों को राज्य सौंपकर, सभी सखाओं से विदा लेकर, महाप्रस्थान के लिए सरयू नदी की ओर चल पड़े। यह सर्ग उस अविस्मरणीय प्रस्थान की कथा कहता है।
👑 राज्य-त्याग और पुत्रों को राज्य सौंपना (श्लोक १-१०)
ददर्श धर्मतो राज्यं पालयन् पृथिवीमिमाम्॥
अथ दीर्घस्य कालस्य रामः सत्यपराक्रमः।
आज्ञाय दैवयोगेन कालं स्वर्गाय निश्चितः॥
आहूय लक्ष्मणं भ्राता भरतं च शत्रुहनम्।
सुग्रीवं च हनूमन्तं विभीषणमुखानपि॥
उवाच प्राञ्जलिर्वाक्यं धर्मार्थसहितं शुभम्।
मम कालः समायातो युष्माभिर्गम्यतां पुनः॥
कुशलवौ मम सुतौ राज्ये स्थाप्य यथाविधि।
पालनीया प्रजा धर्म्यैर्मद्वाक्यैरनुशासितौ॥
न्यासं यथाक्रमं दत्त्वा तूष्णीमासीद्धि वीर्यवान्॥
ततः सर्वे समागम्य भरतः सहलक्ष्मणः।
शत्रुघ्नश्च महातेजाः सुग्रीवश्च विभीषणः॥
ऊचुः प्राञ्जलयो रामं राजानं प्रियदर्शनम्।
वयं सर्वे त्वया सार्धं गमिष्यामः परां गतिम्॥
न त्यक्ष्यामो महाबाहो सदा त्वच्चरणप्रियाः।
यत्र यत्र गमिष्यामो भवान्नस्तत्र नायकः॥
श्रुत्वा तेषां वचः श्लक्ष्णं रामः प्रीतमनाभवत्।
अनुज्ञातास्ततो राममुपतस्थुः समन्ततः॥
⏳ काल का आगमन और महाप्रस्थान की तैयारी (श्लोक ११-२५)
ध्यानस्थः परया भक्त्या योगयुक्तो बभूव ह॥
तस्य योगेन देवर्षे पुरतः काल आगतः।
ज्वालामाली महावीर्यो विवृत्तास्यो भयानकः॥
उवाच कालो रामं तु प्राञ्जलिः प्रणतो भृशम्।
अहं कालो महाबाहो ब्रह्मणा प्रेरितः प्रभो॥
त्वया सह गमिष्यामि यत्र देवाः सवासवाः।
विष्णुलोकं परं धाम पुनरागमनाय च॥
रामः प्रोवाच काले तु स्वागतं ते नमोऽस्तु ते।
गम्यते यत्र गन्तव्यं भवांश्चानुगमिष्यति॥
प्रायात् सरय्वाः पुलिनं योगी परमको विभुः॥
तं दृष्ट्वा प्रस्थितं रामं सर्वे ते वानरर्षभाः।
राक्षसाश्च महावीर्या ऋषयश्च तपोधनाः॥
हनूमान् भरतः श्रीमान् लक्ष्मणश्च महाबलः।
शत्रुघ्नो भरतश्चैव सुग्रीवश्च विभीषणः॥
अन्वगच्छन्महात्मानं रामं सत्यपराक्रमम्।
प्रेमगद्गदया वाचा स्तुवन्तो विविधैः स्तवैः॥
सरय्वाः पुलिने रम्ये योगिनां प्रिय आश्रमे।
उपाविशन्महातेजा रामः परमधार्मिकः॥
🧘 सरयू तट पर योग समाधि और विदाई (श्लोक २६-५५)
जलान्ते स्थापयामास देहं लोकहिते रतः॥
तस्य देहान्निःसृता दीप्तिर्ब्रह्मलोकं जगाम ह।
पश्यतां सर्वभूतानां तिर्यगूर्ध्वं च सर्वतः॥
हा हा कष्टमिति प्रोचुर्भरतप्रमुखा जनाः।
निपेतुर्धरणीपृष्ठे मूर्च्छिताः शोककर्शिताः॥
हनूमांस्तु महातेजाः समाश्वास्य च तान्पुनः।
उवाच वचनं श्लक्ष्णं रामस्यैवानुशासनात्॥
मा शोचत नरव्याघ्रा रामः स परमेश्वरः।
अन्तर्धिमगमद्योगात्पुनरावर्तते न च॥
गम्यतां स्वपुरं सर्वे राज्यं पाल्यं यथाविधि।
रामाज्ञया हितं वाक्यं कर्तव्यं नात्र संशयः॥
राक्षसाश्च महावीर्या ऋषयश्च तपोधनाः॥
प्रदक्षिणं ततः कृत्वा सरय्वां पुलिनं शुभम्।
जग्मुः स्वान्यायतनानि राममेवानुचिन्तयन्॥
लक्ष्मणो भरतः शत्रुघ्नः कुशलवौ च वीर्यवान्।
अयोध्यायां महाराज्यं चक्रुर्धर्मेण शाश्वतम्॥
एवं रामः परं धाम गतः सत्यपराक्रमः।
महाप्रस्थानमाख्यातं पुण्यं पापप्रणाशनम्॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🧘 योग और देह त्याग
राम का योगपूर्वक देह त्याग यह दर्शाता है कि वे केवल एक राजा नहीं, अपितु योगीश्वर भी थे। उनका सशरीर स्वर्गारोहण इस बात का प्रतीक है कि धर्म की पराकाष्ठा पर पहुँचकर जीवात्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है।
👨👩👧👦 भक्तों का अनुगमन
सभी भाई, सुग्रीव, हनुमान, विभीषण आदि का राम के पीछे चलना उनकी अनन्य भक्ति को दर्शाता है। वे राम से अलग नहीं रह सकते थे, भले ही वे देह त्याग कर रहे हों।
📿 काल का आगमन
काल का राम के समक्ष विनयपूर्वक आना यह बताता है कि परमात्मा के समक्ष काल भी शक्तिहीन है। राम स्वयं काल के भी काल हैं, फिर भी लीला के अनुसार उन्होंने काल का आदर किया।
🏛️ राज्य का उत्तराधिकार
राम ने अपने पुत्रों को राज्य सौंपकर एक आदर्श राजा का कर्तव्य निभाया। वंश परम्परा का निर्वाह और प्रजापालन की चिन्ता उनके लोकहितकारी स्वरूप को उजागर करती है।
🎯 शिक्षा : राम का महाप्रस्थान हमें सिखाता है कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए, योग और धर्म में स्थिर रहते हुए, अंत में परमात्मा में लीन हो जाना चाहिए। यह शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है।