रावण का सीता के पास आगमन
हनुमान जी अशोक वाटिका में वृक्ष पर छिपकर सीता को देख रहे हैं। तभी रावण वहाँ आता है और सीता को प्रलोभन देता है। सीता उसे दृढ़तापूर्वक अस्वीकार कर देती हैं। क्रोधित होकर रावण उन्हें दो मास की मोहलत देकर चला जाता है। हनुमान यह सब देखते हैं और सीता के धैर्य की प्रशंसा करते हैं।
विवरण
हनुमान जी अशोक वाटिका में सीता को खोजकर एक वृक्ष पर छिप गए और उनकी प्रतीक्षा करने लगे। प्रातःकाल रावण अपनी रानियों एवं परिचारिकाओं सहित अशोक वाटिका में आता है। वह सीता के रूप पर मोहित हो जाता है और उन्हें अपनी रानी बनने के लिए अनेक प्रकार से प्रलोभन देता है – ऐश्वर्य, सुख-सुविधाएँ, लंका का राज्य आदि। सीता रावण की बातों को पूर्णतः अनसुना कर देती हैं और राम के प्रति अपनी अटल निष्ठा व्यक्त करती हैं। क्रोधित होकर रावण सीता को दो मास का समय देता है; यदि इस अवधि में वह उसकी बात नहीं मानतीं तो उसे मार डाला जाएगा। इतना कहकर रावण महल लौट जाता है। हनुमान यह सब देखकर सीता के धैर्य और पातिव्रत्य की प्रशंसा करते हैं और अब राम को सूचना देने हेतु प्रस्थान करने का निश्चय करते हैं।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – सुन्दरकाण्ड – सर्ग १८
(रावण का सीता के पास आगमन – प्रलोभन और धमकी)
🔆 प्रस्तावना : हनुमान जी ने सीता को अशोक वाटिका में पा लिया था और वृक्ष पर छिपकर उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी प्रभात काल में राक्षसराज रावण अपनी रानियों एवं परिचारिकाओं सहित वहाँ आता है। वह सीता के रूप पर मोहित होकर उन्हें अनेक प्रकार से प्रलोभन देता है, किन्तु सीता दृढ़तापूर्वक राम के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करती हैं। क्रुद्ध होकर रावण उन्हें दो मास की मोहलत देकर चला जाता है। हनुमान यह सब देखते हैं।
👑 रावण का अशोक वाटिका में आगमन (श्लोक १-५)
उत्थाय शयनाद्धीमान् सीतादर्शनलालसः ॥
वृक्षमूलेऽवटे दीनां चिन्तापरवशां स्थिताम् ॥
🎭 रावण द्वारा सीता को प्रलोभन (श्लोक ६-१५)
सीते मयि स्थिते देवि किं करिष्यति राघवः ॥
त्रैलोक्ये पृथिवी चेयं सनागयक्षकिन्नरा ॥
मया सार्धं विहरस्व सीते भद्रे वरानने ॥
🛡️ सीता का दृढ़ उत्तर (श्लोक १६-२४)
तस्माद्रामे स्थिता नित्यं रावणं न भजाम्यहम् ॥
राम एव गतिर्मह्यं रामे सर्वं प्रतिष्ठितम् ॥
🔥 रावण का क्रोध और धमकी (श्लोक २५-३०)
द्वौ मासौ जीवितं दत्त्वा ययौ त्रस्त इवाहिपः ॥
प्रविवेश गृहं राजा चिन्ताशोकसमन्वितः ॥
🙉 हनुमान का साक्षीभाव (श्लोक ३१-३३)
चिन्तयामास धीमान् स सीतायाश्चरितं महत् ॥
प्रतीक्षते स्म तां देवीं रामस्य प्रियकाम्यया ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
🛡️ सीता का पातिव्रत्य
इस सर्ग में सीता का राम के प्रति अटल प्रेम और पतिव्रता धर्म अत्यंत मार्मिक रूप में प्रकट हुआ है। वे रावण के सभी प्रलोभनों को ठुकरा देती हैं।
👿 रावण का अहंकार
रावण अपनी शक्ति का घमंड करता है और सीता को डराने-धमकाने का प्रयास करता है, किन्तु सीता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
🐒 हनुमान का धैर्य
हनुमान यह सब देखकर भी शांत रहते हैं, क्योंकि उनका कार्य केवल सीता का पता लगाना है। वे अपने मिशन में सफल होते हैं।
⏳ दो मास की मोहलत
रावण द्वारा दी गई दो मास की मोहलत आगे की घटनाओं (राम के आगमन) के लिए समय-सीमा निर्धारित करती है।
🎯 शिक्षा : इस सर्ग से हमें सीता के समान धैर्य, पतिव्रत धर्म और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य पर दृढ़ रहने की प्रेरणा मिलती है। हनुमान का संयम भी हमें सिखाता है कि लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए।