सुग्रीव की क्षमायाचना से लक्ष्मण शांत हुए
इस सर्ग में क्रोधित लक्ष्मण को सुग्रीव की विनम्र क्षमायाचना से शांत करने का वर्णन है। हनुमान की बुद्धिमानी से लक्ष्मण का क्रोध शांत होता है और सुग्रीव राम की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं।
विवरण
वर्षा ऋतु समाप्त होने पर भी सुग्रीव अपने राजसी सुखों में मग्न थे और उन्होंने सीता की खोज के लिए वानर सेना भेजने का वचन पूरा नहीं किया था। राम के आदेश पर लक्ष्मण किष्किन्धा पहुँचे और सुग्रीव पर क्रोधित हुए। उनके तीखे वचन सुनकर सुग्रीव को अपनी भूल का अहसास हुआ। हनुमान ने बुद्धिमानी से दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित किया। सुग्रीव ने लक्ष्मण से क्षमा माँगी और आश्वासन दिया कि शीघ्र ही सीता की खोज आरम्भ होगी। लक्ष्मण का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने सुग्रीव को राम का संदेश सुनाया।
📖 श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण – किष्किन्धाकाण्ड – सर्ग ३६
(सुग्रीव की क्षमायाचना से लक्ष्मण शांत हुए)
🔆 प्रस्तावना : वर्षा ऋतु बीत जाने पर भी सुग्रीव राजसुख में मग्न हैं और सीता की खोज हेतु वानर सेना नहीं भेज पाए हैं। राम के आदेश पर लक्ष्मण किष्किन्धा पहुँचते हैं और क्रोध से भर जाते हैं। यह सर्ग लक्ष्मण के कोप, सुग्रीव की विनम्र क्षमायाचना और हनुमान की बुद्धिमत्ता से पुनः स्थापित होते सामंजस्य की कथा कहता है।
🔥 लक्ष्मण का किष्किन्धा आगमन और क्रोध (श्लोक १-१०)
किष्किन्धां प्राविशद्वीरो धनुष्पाणिर्महाबलः ॥
स ददर्श महात्मानं सुग्रीवं सह मन्त्रिभिः ।
आसीनं काञ्चने दिव्ये सिंहासनवरे शुभे ॥
तं दृष्ट्वा लक्ष्मणः क्रोधादिदं वचनमब्रवीत् ।
अनार्यं जातिसामान्यं कृतघ्नमविशङ्कितम् ॥
🙏 हनुमान की विनय और सुग्रीव की क्षमायाचना (श्लोक ११-२५)
लक्ष्मणं क्रोधताम्राक्षं शनकैर्वाक्यमब्रवीत् ॥
अवेहि त्वं महाबाहो सुग्रीवं वालिना हतम् ।
राज्यभ्रष्टं परित्रस्तं त्वया च समुपागतम् ॥
न त्वस्य विद्यते दोषो रामकार्ये परंतप ।
प्रियं हि कर्तुकामोऽसौ सुग्रीवः सह वानरैः ॥
स त्वया न चिरात्सर्वान् वानरान् विनियोक्ष्यति ।
मार्गणे जानकी देव्या रामप्रीत्यर्थमाहवे ॥
🕊️ लक्ष्मण का शांत होना और राम संदेश (श्लोक २६-३५)
रामस्य वचनं श्रुत्वा सुग्रीवो हर्षमाप्नुयात् ॥
प्राप्तकालमिदं वाक्यं रामस्याक्लिष्टकर्मणः ।
श्रूयतां सह वानरैः सुग्रीव सह मन्त्रिभिः ॥
इत्युक्त्वा लक्ष्मणः श्रीमान् रामसंदेशमुत्तमम् ।
श्रावयामास सुग्रीवं सह सर्वैर्मन्त्रिभिः ॥
🔍 सर्ग का गूढ़ार्थ एवं विशेष महत्त्व
😤 क्रोध पर नियंत्रण
लक्ष्मण का क्रोध स्वाभाविक था, पर हनुमान ने समय रहते उसे शांत किया। यह दर्शाता है कि सच्चा मित्र वही है जो कठिन समय में समझाए और संयम बनाए रखे।
🧠 हनुमान की दूत-कला
हनुमान ने बड़ी कुशलता से लक्ष्मण के क्रोध को शांत किया और सुग्रीव को उचित मार्ग पर लाए। यह राजनीति और मैत्री का उत्कृष्ट उदाहरण है।
🤝 मैत्री का मर्म
सुग्रीव ने अपनी गलती स्वीकार की और क्षमा माँगी, जिससे मित्रता और प्रगाढ़ हुई। इससे सीख मिलती है कि मानवीय त्रुटियों पर क्षमा और सुधार ही सम्बन्धों को मजबूत बनाता है।
⚡ कर्तव्य की याद
लक्ष्मण के माध्यम से राम ने सुग्रीव को उनके कर्तव्य का बोध कराया। यह संदेश है कि सुख-विलास में कर्तव्य नहीं भूलना चाहिए।
🎯 शिक्षा : इस सर्ग से हमें यह सीख मिलती है कि क्रोध में किए गए कार्य पछतावे का कारण बन सकते हैं। बुद्धिमान मित्र की सलाह से क्रोध शांत होता है और कार्य सफल होता है। साथ ही, अपनी गलतियों को स्वीकार करना और उनका सुधार करना ही सच्ची विनम्रता है।