किष्किन्धा काण्ड
अध्याय 5 | 0 श्लोक
मित्रता की शपथ (राम-सुग्रीव मैत्री)
किष्किन्धाकाण्ड के पांचवें सर्ग में राम और सुग्रीव के बीच मित्रता की स्थापना का वर्णन है। हनुमान राम के पास दूत बनकर आते हैं और सुग्रीव से मित्रता का प्रस्ताव रखते हैं। राम सुग्रीव से मिलकर अग्नि को साक्षी मानकर मित्रता करते हैं और उसे बाली के भय से मुक्त कराने का वचन देते हैं।
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