बाल काण्ड
अध्याय 58 | 0 श्लोक
त्रिशंकु और विश्वामित्र
बाल काण्ड का अट्ठावनवाँ सर्ग त्रिशंकु की कथा का वर्णन करता है। राजा त्रिशंकु सशरीर स्वर्ग जाना चाहते थे, किन्तु वसिष्ठ एवं उनके पुत्रों के मना करने पर वे विश्वामित्र के पास गए। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल से त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया, जिससे देवताओं ने उन्हें नीचे गिरा दिया। क्रुद्ध विश्वामित्र ने एक नया स्वर्ग ही रच दिया। अन्ततः देवताओं ने समझौता किया और त्रिशंकु नक्षत्र के रूप में आकाश में स्थान पाया।
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