बाल काण्ड
अध्याय 57 | 0 श्लोक
विश्वामित्र की तपस्या और त्रिशंकु
बाल काण्ड का सत्तावनवाँ सर्ग विश्वामित्र द्वारा राजा त्रिशंकु के लिए एक पृथक् स्वर्ग की रचना का वर्णन करता है। यह सर्ग विश्वामित्र के अप्रतिम तपोबल और उनके दृढ़ संकल्प की अद्भुत गाथा है, जिसमें वे राजा त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग लोक भेजने का संकल्प लेते हैं और देवताओं के विरोध के बावजूद अपने तपोबल से एक नया स्वर्ग ही रच डालते हैं।
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