बाल काण्ड
अध्याय 35 | 0 श्लोक
गंगा का अवतरण
बाल काण्ड का पैंतीसवाँ सर्ग गंगा के अवतरण की कथा का वर्णन करता है। राजा भगीरथ अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए घोर तपस्या करते हैं, जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी गंगा को पृथ्वी पर भेजने का वरदान देते हैं। परन्तु गंगा के वेग को सहन करने के लिए भगीरथ शिव जी को प्रसन्न करते हैं, जो गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर लेते हैं। तत्पश्चात् गंगा का पृथ्वी पर अवतरण होता है और वह भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर सागर तक जाती है और सगर के पुत्रों का उद्धार करती है।
अध्याय के सभी श्लोक
इस अध्याय में अभी कोई श्लोक उपलब्ध नहीं है।