बाल काण्ड अध्याय 33 | 0 श्लोक

कुशनाभ की पुत्रियों का विवाह

बाल काण्ड का तैंतीसवाँ सर्ग राजा कुशनाभ की सौ पुत्रियों के विवाह की कथा वर्णित करता है। वायु देवता द्वारा उनके सतीत्व भंग के प्रयास और उसके फलस्वरूप उनके टेढ़े हो जाने का वर्णन है। पश्चात् ब्रह्मर्षि चूली के पुत्र ब्रह्मदत्त से उनका विवाह होता है, जिससे वे पुनः सीधी हो जाती हैं।

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