बाल काण्ड
अध्याय 15 | 0 श्लोक
पुत्रेष्टि और रावण की कहानी
बाल काण्ड का पन्द्रहवाँ सर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें ऋष्यशृंग द्वारा राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ प्रारम्भ किया जाता है। इस यज्ञ के फलस्वरूप देवताओं के आह्वान पर भगवान् विष्णु राजा दशरथ के पुत्र रूप में अवतार लेने का निश्चय करते हैं। साथ ही, इस सर्ग में रावण की कहानी और उसके वध के रहस्य का भी वर्णन है।
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