अयोध्या काण्ड
अध्याय 89 | 0 श्लोक
मारीच का स्वर्णमृग बनने का निश्चय
रावण, सीता हरण की अपनी योजना के तहत, मारीच के आश्रम में जाता है और उसे स्वर्णमृग बनने का आदेश देता है। मारीच रावण को राम के पराक्रम से पुनः आगाह करते हुए इस कार्य में अनेक बार मना करता है, लेकिन अंततः रावण के क्रोध और बल से भयभीत होकर उसकी आज्ञा मान लेता है।
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