अयोध्या काण्ड
अध्याय 33 | 0 श्लोक
अयोध्या में दशरथ का स्वर्गवास
अयोध्याकाण्ड का तैंतीसवाँ सर्ग राजा दशरथ के स्वर्गवास का वर्णन करता है। राम के वन गमन के पश्चात् शोकातुर दशरथ को अपने पूर्वकृत पाप (श्रवण कुमार के श्राप) की याद आती है और वे पुत्र-वियोग में ही प्राण त्याग देते हैं।
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