अरण्य काण्ड
अध्याय 53 | 0 श्लोक
सीता द्वारा रावण के कुकृत्यों की निंदा
अरण्यकाण्ड के तिरपनवें सर्ग में सीता जी, रावण द्वारा हरण कर लिए जाने के बाद अशोक वाटिका में उसे कठोर शब्दों में उसके कुकृत्यों की निंदा करती हैं। वह रावण को धिक्कारती हैं, उसे अधम कहती हैं, और राम के पराक्रम का स्मरण कराते हुए उसके विनाश की चेतावनी देती हैं।
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