अरण्य काण्ड
अध्याय 35 | 0 श्लोक
रावण का मारीच के पास जाना
अरण्यकाण्ड के पैंतीसवें सर्ग में रावण, शूर्पणखा से राम-सीता के विषय में सुनकर, मारीच के आश्रम जाता है। वह मारीच को स्वर्णमृग का रूप धारण कर राम को वन में दूर ले जाने के लिए मनाता है, ताकि वह सीता का हरण कर सके। मारीच राम के पराक्रम से भयभीत होकर पहले मना करता है, परन्तु रावण के क्रोध और दबाव के कारण अन्ततः विवश होकर सहमति दे देता है।
अध्याय के सभी श्लोक
इस अध्याय में अभी कोई श्लोक उपलब्ध नहीं है।