अरण्य काण्ड
अध्याय 32 | 0 श्लोक
रावण का वैभव और घमंड
अरण्यकाण्ड के बत्तीसवें सर्ग में रावण के ऐश्वर्य, पराक्रम एवं अहंकार का विस्तृत वर्णन है। खर-दूषण आदि के वध का समाचार सुनकर क्रोधित रावण अपनी अलौकिक शक्तियों और देवताओं पर विजय का बखान करता है। वह स्वयं को त्रिलोक में अप्रतिम बताते हुए मारीच के पास जाने और सीता का हरण करने की योजना बनाता है।
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