अरण्य काण्ड
अध्याय 18 | 0 श्लोक
लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा का अपमान और नाक-कान काटना
अरण्यकाण्ड का अठारहवाँ सर्ग शूर्पणखा के राम के प्रति प्रस्ताव और अस्वीकार, लक्ष्मण द्वारा उसका अपमान तथा क्रोधित होकर सीता पर आक्रमण करने पर लक्ष्मण द्वारा उसकी नाक और कान काटने की कथा का वर्णन करता है। विकृत अवस्था में शूर्पणखा अपने भाइयों खर-दूषण के पास जाती है, जो प्रतिशोध की आग में जल उठते हैं।
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