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मेरो मन वृंदावन में अटको – कृष्ण भजन (Mero Man Vrindavan Mein Atako) | Indresh Upadhyay

232 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 मेरो मन वृंदावन में अटको – कृष्ण भजन

(Mero Man Vrindavan Mein Atako) – Indresh Upadhyay | Krishna Bhajan

मेरो मन हरि चरणन में अटको ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: श्री इंद्रेश उपाध्याय
🎶 संगीतकार/अरेंजर: करण खेमानी
✍️ गीतकार: नवदीप पंचाल शुभ
🎬 निर्माता: मोहित लालवानी
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन, विरह भजन
📍 भाव: वृन्दावन की कुंज गलियों में मिलन की तड़प

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

मेरो मन वृंदावन में अटको
मेरो मन हरि चरणन में अटको
बनके जोगन डोलत ब्रज में
बन के जोगन डोलत ब्रज में
पीवत यमुना जल को
मेरो मन वृंदावन में अटको
मेरो मन हरि चरणन में अटको ॥

॥ अंतरा १ ॥

मेरो मुझ में कुछ ना मोहन
तेरी मिट्टी तेरो कण कण
मेरो मुझ में कुछ ना मोहन
तेरी मिट्टी तेरो कण कण
वृंदावन की कुंज गलिन में
वृंदावन की कुंज गलिन में
मिल जाओ प्रभु मुझको
मेरो मन वृंदावन में अटको
मेरो मन हरि चरणन में अटको ॥

॥ अंतरा २ ॥

इस जोगन के तुम हो साजन
करना है सब आत्म समर्पण
इस जोगन के तुम हो साजन
करना है सब आत्म समर्पण
अंत समय आनंद मिले मोहे
अंत समय आनंद मिले मोहे
बस वेणु के रस को
मेरो मन वृंदावन में अटको
मेरो मन हरि चरणन में अटको ॥

॥ अंतरा ३ ॥

याद में तोरी भई बावरी
सुद लो मोरी कुंज बिहारी
याद में तोरी भई बावरी
सुद लो मोरी कुंज बिहारी
अब आओ मेरे प्राण पियारे
अब आओ मेरे प्राण पियारे
अपनाओ या जन को
मेरो मन वृंदावन में अटको
मेरो मन हरि चरणन में अटको ॥

॥ अंतरा ४ ॥

बन के जोगन डोलत ब्रज में
बन के जोगन डोलत ब्रज में
पिवत यमुना जल को
मेरो मन वृंदावन में अटको
मेरो मन हरि चरणन में अटको ॥

॥ अंतरा ५ ॥

गिरधर नागर नटवर नागर
तरसे मेरो मन
खीचे मेरो ध्यान बुलावे
तेरो वृंदावन
बरसे नैना बैरी रैना
कब दोगे दर्शन
यमुना तट पे
एक दिन मुझको
मिल जाओ मोहन ॥

🎵 गायक: श्री इंद्रेश उपाध्याय | संगीत: करण खेमानी | गीत: नवदीप पंचाल शुभ | निर्माता: मोहित लालवानी

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक भक्त (जोगन – योगिनी) के हृदय की वह व्यथा है जिसका मन वृन्दावन और हरि के चरणों में अटक गया है। "मेरो मन वृंदावन में अटको, मेरो मन हरि चरणन में अटको" – मेरा मन वृन्दावन में लग गया, मेरा मन हरि के चरणों में अटक गया।

"बनके जोगन डोलत ब्रज में, पीवत यमुना जल को" – मैं योगिनी (भक्तिन) बनकर ब्रज में विचरती हूँ और यमुना का जल पीती हूँ। यह वृन्दावन में रमण करने की लालसा है।

"मेरो मुझ में कुछ ना मोहन, तेरी मिट्टी तेरो कण कण" – हे मोहन, मुझमें मेरा कुछ नहीं, तेरी मिट्टी (वृन्दावन की धूल) ही तेरा कण-कण है। "वृंदावन की कुंज गलिन में मिल जाओ प्रभु मुझको" – हे प्रभु, वृन्दावन की कुंज गलियों में मुझे मिल जाओ।

"इस जोगन के तुम हो साजन, करना है सब आत्म समर्पण" – इस योगिनी के तुम साजन (प्रियतम) हो, अब मुझे पूर्ण आत्म समर्पण करना है। "अंत समय आनंद मिले मोहे, बस वेणु के रस को" – अंत समय में मुझे वह आनंद मिले, जो केवल बाँसुरी के रस में है।

"याद में तोरी भई बावरी, सुद लो मोरी कुंज बिहारी" – हे कुंज बिहारी, तेरी याद में मैं बावरी (दीवानी) हो गई हूँ, मेरी सुध लो। "अब आओ मेरे प्राण पियारे, अपनाओ या जन को" – अब आओ मेरे प्राण प्यारे, इस जन को अपना लो।

"गिरधर नागर नटवर नागर, तरसे मेरो मन" – हे गिरधर नागर, नटवर नागर, मेरा मन तरस रहा है। "खीचे मेरो ध्यान बुलावे तेरो वृंदावन" – तेरा वृन्दावन मेरा ध्यान खींच रहा है और मुझे बुला रहा है। "बरसे नैना बैरी रैना, कब दोगे दर्शन" – आँखें बरस रही हैं, रात बैरन हो गई है, कब दर्शन दोगे? "यमुना तट पे एक दिन मुझको मिल जाओ मोहन" – हे मोहन, एक दिन यमुना के तट पर मुझे मिल जाओ।

यह भजन वृन्दावन के प्रति आसक्ति, कृष्ण के चरणों में मन लगने की लालसा, और उनके दर्शनों की तीव्र व्याकुलता को व्यक्त करता है। भक्त ने अपना सब कुछ त्यागकर वृन्दावन की धूल अपना ली है और अब केवल कुंज गलियों में प्रभु के मिलन की आस लगाए है।

📖 विशेष शब्दों के अर्थ

  • अटको: अटक गया, लग गया
  • जोगन: योगिनी, भक्तिन, साधिका
  • डोलत: विचरती हुई, घूमती हुई
  • पीवत: पीती हुई
  • कुंज गलिन: बेलों से घिरी गलियाँ, वृन्दावन की संकरी गलियाँ
  • आत्म समर्पण: स्वयं को पूर्णतः अर्पित करना
  • वेणु: बाँसुरी
  • बावरी: दीवानी, पागल
  • सुद: सुध, खबर
  • गिरधर नागर: गिरिधर (गोवर्धन धारण करने वाले) नागर (नगर के स्वामी)
  • नटवर नागर: नटवर (नटखट), नागर (नगर के स्वामी)

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🌿 वृन्दावन की धूल

"तेरी मिट्टी तेरो कण कण" – भक्त वृन्दावन की धूल को ही अपना सब कुछ मानता है। वृन्दावन की कण-कण में कृष्ण बसते हैं, इसलिए भक्त वहाँ रमना चाहता है।

🎵 वेणु के रस की लालसा

भक्त को अंत समय में केवल बाँसुरी के रस की लालसा है। कृष्ण की मुरली ही सच्चा आनंद देने वाली है।

🎯 संदेश : सच्चा भक्त अपना सब कुछ त्यागकर वृन्दावन की धूल में समा जाता है। वह योगिनी बनकर ब्रज की कुंज गलियों में विचरता है और यमुना जल पीता है। उसे कुछ नहीं चाहिए, केवल कृष्ण के चरणों में मन लगाना है। वह बार-बार पुकारता है – हे कुंज बिहारी, अब आओ, मुझे अपना लो। यह भजन हमें सिखाता है कि वृन्दावन की धूल भी कृष्ण प्रेम का मार्ग है।

॥ मेरो मन वृंदावन में अटको ॥
॥ मेरो मन हरि चरणन में अटको ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "मेरो मन वृंदावन में अटको – कृष्ण भजन (Mero Man Vrindavan Mein Atako) | Indresh Upadhyay" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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