🙏 आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार – राम भजन
(Aahi Gaye Raghunandan Sajwa Do Dwar Dwar) – Ramayan Bhajan
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
सजी नगरिया है यह सारी
नाचे गावे नर और नारी
सजी नगरिया है यह सारी
नाचे गावे नर और नारी
सजी नगरिया है यह सारी
नाचे गावे नर और नारी
खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार
खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार
आ ही गए...
॥ अंतरा १ ॥
आज लड़ियों से, मणियों से,
फुलझड़ियों से
सजा राम दरबार
आज लड़ियों से, मणियों से,
फुलझड़ियों से
सजा राम दरबार
आज लड़ियों से, मणियों से,
फुलझड़ियों से
सजा राम दरबार
शोभा अजब बनी
शोभा अजब बनी
शोभा अजब बनी
शोभा अजब बनी
शोभा अजब बनी
सजा राम दरबार
शोभा अजब बनी,
शोभा अजब बनी
॥ अंतरा २ ॥
कंचन कलश शुभ चित्र सवारे
सब ही सजे धर निज निज द्वारे
सब ही सजे धर निज निज द्वारे
खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार
खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार
आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार
आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार
आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार
आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंदनवार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार
आ ही गए...
🎵 राम भजन | अयोध्या में राम के आगमन का उल्लास
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन भगवान राम के अयोध्या आगमन पर प्रजा के उल्लास और स्वागत का अद्भुत चित्रण है। "आ ही गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार" – रघुनंदन (राम) आ गए हैं, चलो द्वार-द्वार सजाएँ।
"सजी नगरिया है यह सारी, नाचे गावे नर और नारी" – पूरी नगरी सज गई है, नर-नारी नाच-गा रहे हैं। "खुशियां मनाओ गाओरी मंगल चार" – खुशियाँ मनाओ, गौरी (सीता) के मंगल गाओ। "स्वर्ण कलश रखवा दो, बंधवा दो बंधनवार" – स्वर्ण कलश रखवा दो, द्वारों पर बंधनवार (तोरण) बंधवा दो।
"आज लड़ियों से, मणियों से, फुलझड़ियों से सजा राम दरबार" – आज लड़ियों, मणियों, फुलझड़ियों से राम का दरबार सजा है। "शोभा अजब बनी" – अनोखी शोभा छाई है।
"कंचन कलश शुभ चित्र सवारे, सब ही सजे धर निज निज द्वारे" – सुनहरे कलश, शुभ चित्र सजाए गए हैं, सब अपने-अपने द्वार सजाकर खड़े हैं।
यह भजन अयोध्या में राम, सीता और लक्ष्मण के आगमन के अवसर पर गाया जाता है। यह दीपावली, रामनवमी और अन्य राम-उत्सवों में विशेष रूप से लोकप्रिय है।
📍 राम के अयोध्या आगमन का उत्सव
रामायण के अनुसार, चौदह वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद भगवान राम, सीता और लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने उनका भव्य स्वागत किया था। इसी प्रसंग को यह भजन अंकित करता है।
इस भजन में वर्णित "स्वर्ण कलश", "बंधनवार", "लड़ियाँ-मणियाँ", "फुलझड़ियाँ" सब अयोध्या के उस स्वागत की झाँकी हैं। दीपावली का पर्व भी इसी खुशी में मनाया जाता है, जब घर-घर दीप जलाए जाते हैं और राम के स्वागत में पूरी नगरी सज जाती है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🎉 राम के स्वागत का उल्लास
यह भजन उस परम उल्लास का प्रतीक है जो अयोध्यावासियों के मन में राम के लौटने पर था। यह हमें भी राम के प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को उत्सव के रूप में व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।
🏠 सजते द्वार
"सजवा दो द्वार द्वार" – हर द्वार का सजना यह दर्शाता है कि राम किसी एक के नहीं, सभी के हैं। अयोध्या की प्रजा ने अपने-अपने द्वार सजाकर उनके आगमन का स्वागत किया।
🎯 संदेश : जब रघुनंदन आते हैं, तो पूरी नगरी सज जाती है। नर-नारी नाच-गाते हैं, खुशियाँ मनाते हैं, स्वर्ण कलश रखते हैं, बंधनवार बाँधते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि राम के आगमन का स्वागत हर द्वार पर, हर हृदय में किया जाना चाहिए।