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satsang Bhajan

कर ले तू सतसंग रसपान(Kar Le Tu Satsang Raspaan Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

75 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सतसंग का अमृत: आत्मा के लिए मार्गदर्शन

सत्संग में जुड़कर भक्ति करते हुए, प्रभु की कृपा को प्राप्त करें एवं जीवन में सुख-शांति का अनुभव करें।

कर ले तू सतसंग रसपान प्रभु मेरे दौड़े आयेंगे।भरोसा कर थोड़ा सा मन में।प्रभु मेरे मिल जायेंगे छन में।मन मन्दिर में भाव जगाले अपने धाम बुलायेंगे।कर ले तू सतसंग रसपान मोह से दृष्टि हटा ले तू भावना शुद्ध बना ले तू।कर ले तू भक्ति रस पान फिर तोय गले लगायेंगे।कर ले तू सतसंग रसपान व्यसनों की छोड़ डगरिया।हरि को भज ले तू बाबरिया।।बीच भँवर में डूबी नाव तेरी पार लगायेंगे।कर ले तू सतसंग रसपान माया साथ न देय निगोड़ी।भज ले हरी समय रही थोड़ी।महावीर भूल करे क्यों भारी प्रभु तुझको अपनायेंगे।कर ले तू सतसंग रसपान

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय सत्संग की महत्ता तथा प्रभु की कृपा को पाने का मार्ग है। भजन में कहा गया है कि यदि हम प्रभु की शरण में जाएँ, तो वे हमारे जीवन में अवश्य आयेंगे। 'भरोसा कर थोड़ा सा मन में' पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि विश्वास ही भक्ति का पहला चरण है। इसके बाद का संदेश है कि हमें हमारे मन की व्यथा और मोह से मुक्त होकर, उच्च भावनाओं की ओर अग्रसर होना चाहिए। 'कर ले तू भक्ति रस पान' यह संकेत करता है कि भक्ति का वास्तविक आनंद तभी आता है जब हम पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ प्रभु का स्मरण करते हैं। भजन में ये भी कहा गया है कि व्यसनों को छोड़कर, हरि की भक्ति अपनाना ही वास्तविक मोक्ष का मार्ग है।

इस भजन के भावार्थ में गूढ़ता है। जब मन मन्दिर में भाव जगाने की बात की जाती है, तो यह हमसे आंतरिक साधना की बात कर रहा है। यहाँ 'भाव जगाले अपने धाम बुलायेंगे' का अर्थ है कि जब हम अपने भीतर भक्ति का भाव उत्पन्न करते हैं, तब प्रभु हमें अपने धाम में आमंत्रित करते हैं। भक्ति के रस का पान करना दरअसल हमारे आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग है। व्यसन और माया के मोह से छुटकारा पाकर, जब हम अपने वास्तविक स्वरुप की पहचान कर लेते हैं, तब हमें सच्ची शांति और संतोष प्राप्त होता है, और भजन का अंतिम संदेश यही है कि हम अपने ह्रदय में हरि का ध्यान करते रहकर उनके प्रेम को अनुभव करें।

इस भजन में प्रकट की गई भक्ति मार्ग की ज्ञानदृष्टि अति महत्वपूर्ण है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति का मार्ग कठिनाइयों और मोह-माया से परे जाकर, निष्ठा और समर्पण से भरा होता है। भक्ति मार्ग में, हर एक भक्ति स्वरूप का अपना स्थान बना रहता है, जहाँ हमारी आंतरिक इच्छा और बाह्य समारोह का सामंजस्य होता है। इस प्रकार, हम अपने जीवन के संघर्षों में सजगता के साथ आगे बढ़ते हैं और सच्चा आत्मज्ञान प्राप्त करते हैं। इसलिए, यह भजन केवल एक साधारण भक्ति गीत नहीं बल्कि हमारे जीवन के मार्ग का अन्वेषण है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ भारतीय भक्ति साहित्य और पंथों में गहरा है। इसे सत्संग की परंपरा से जोड़ा जा सकता है, जिसका उल्लेख भगवद गीता और उपनिषदों में भी मिलता है। 'सत्संग' का अर्थ होता है 'सत्य का संग', जो हमारे मन की कोलाहल से दूर हमें प्रभु की ओर ले जाता है। इस भजन के माध्यम से हम ध्यान करते हैं कि भक्ति में सच्चा मार्गदर्शन हमें कैसे प्राप्त होता है। इसे सुनने या गुनगुनाने से भावनाएँ और श्रद्धा अद्वितीय रूप में प्रकट होती हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मन में शांति और सुकून का अनुभव होता है। यह भक्ति साधक को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है, जिससे मानसिक तनाव और अशांति कम होती है। आध्यात्मिक दृष्टि से, यह भावनात्मक संतुलन और आत्मिक विकास में सहायक होता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से व्यक्ति में धैर्य, साहस, और आंतरिक साहस का विकास होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का समर्पित जाप सुबह के समय या संध्या के समय करना सर्वोत्तम होता है। पूजा स्थल पर दीप जलाकर, फूल एवं प्रसाद चढ़ाना शुभ रहता है। मन को एकाग्र करने के लिए सरल आसन में बैठकर, एकाग्रता पूर्वक भजन का पाठ करें। ध्यान करें कि आपका मन भक्ति और प्रेम से भरा हो और आप प्रभु के प्रति समर्पित हों।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मूल उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्त को सत्संग के महत्व को समझाना एवं प्रभु की भक्ति के माध्यम से जीवन में शांति और खुशियाँ लाना है।

क्या यह भजन किसी विशेष पूजा में गाया जाता है?

यह भजन विशेष रूप से मंदिरों में, भक्ति संध्या या धार्मिक समारोहों में गाया जाता है, ताकि भक्त जन एक साथ मिलकर प्रभु का स्मरण कर सकें।

क्या इस भजन को सुनने से कोई लाभ होता है?

जी हाँ, इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव कम होता है और यह भक्ति भाव को प्रगाढ़ करता है, जिससे व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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