Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

बाड़ी शेर पर सवार भजन लिरिक्स

पढ़ें बाड़ी शेर पर सवार भजन लिरिक्स का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

"बाड़ी शेर पर सवार" (Badi Sher Par Savar) सनातन धर्म की अगाध श्रद्धा और मातृ-शक्ति की उपासना का एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी देवी भजन है। यह भजन विशेष रूप से भोजपुरी और हिंदी भाषी क्षेत्रों में देवी दुर्गा की आराधना के समय अत्यंत भक्ति भाव से गाया जाता है। इस भजन में भक्त अपनी आराध्य माता दुर्गा से शेर पर सवार होकर आने और अपने जीवन के अंधकार को दूर करने की व्याकुल पुकार लगाता है। इस भजन का मुख्य भाव 'समर्पण' और 'वात्सल्य' है, जहां एक अबोध बालक अपनी मां को पुकार रहा है। नवरात्रि के पावन पर्व, जगराता, माता की चौकी और दैनिक पूजा-अर्चना के समय इस भजन के गायन से संपूर्ण वातावरण दैवीय ऊर्जा और सकारात्मकता से भर जाता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी शास्त्रीय मान्यताओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics


॥ मुखड़ा ॥

बाड़ी शेर पर सवार, माई आजा एक बार।
तोहरी बाट जोहेला, मोरा जियरा बेकरार॥
बाड़ी शेर पर सवार, माई आजा एक बार...

॥ अंतरा १ ॥

लाल चुनरिया सोहे मैया तोरे अंग में,
चूड़ी खनके तोरी गोरी-गोरी कलाई में।
माथे पे बिंदिया चमके, चमके चंद्रहार,
बाड़ी शेर पर सवार, माई आजा एक बार॥

॥ अंतरा २ ॥

हाथ में त्रिशूल सोहे, खप्पर विराजे,
दुष्टन को मारे मैया, सिंह गर्जे।
भक्तन के काज संवारे, महिमा अपार,
बाड़ी शेर पर सवार, माई आजा एक बार॥

॥ अंतरा ३ ॥

मनोज तिवारी गावे तोहरी आरती,
चरणन में शीश झुकावे सारी धरती।
हमको भी दे दो मैया, भक्ति का उपहार,
बाड़ी शेर पर सवार, माई आजा एक बार॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान के बीच के अनूठे और निश्छल संबंध को दर्शाता है। यहाँ भक्त अपनी माता (आदिशक्ति दुर्गा) से प्रार्थना कर रहा है कि हे माँ! आप सिंह पर सवार होकर मेरे घर पधारें। मेरा हृदय आपके दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल है और मैं निरंतर आपकी राह देख रहा हूँ।

भजन के प्रथम अंतरा में माता के दिव्य और अलौकिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है। माता ने लाल रंग की चुनरी धारण की हुई है, जो शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक है। उनकी कलाई में चूड़ियाँ खनक रही हैं और माथे पर लगी बिंदिया तथा गले का चंद्रहार उनकी दिव्यता को और अधिक बढ़ा रहा है। यह सौंदर्य केवल भौतिक नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रकटीकरण है।

द्वितीय अंतरा में माता के संहारक और रक्षक रूप का वर्णन है। माता के हाथों में त्रिशूल और खप्पर है, जो इस बात का प्रतीक है कि वे अपने भक्तों के कष्टों और आंतरिक शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ, मोह) का नाश करती हैं। उनका वाहन सिंह गर्जना कर रहा है, जिससे आसुरी शक्तियां भयभीत होती हैं। अंत में, भक्त माता से प्रार्थना करता है कि वे उसे अपनी अनन्य भक्ति का उपहार प्रदान करें, जिससे उसका जीवन धन्य हो सके।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का भाव: यह भजन साधक को पूर्ण शरणागति सिखाता है। जब भक्त स्वयं को असहाय महसूस करता है, तब वह जगदम्बा को पुकारता है।
  • शक्ति की उपासना: सिंह पर सवार माता दुर्गा शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक हैं। इस भजन के श्रवण से मन में साहस का संचार होता है।
  • सांस्कृतिक एकता: भोजपुरी और लोक भाषाओं में रचित यह भजन जनमानस को अपनी जड़ों से जोड़ता है और लोक संस्कृति को समृद्ध करता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन की लय और धुन अत्यंत मधुर है, जो अशांत मन को शांत कर ध्यान की अवस्था में ले जाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • नवरात्रि पर्व: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन का गायन विशेष रूप से फलदायी होता है।
  • संध्या आरती: प्रतिदिन शाम के समय माता की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर इस भजन को गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
  • जगराता और चौकी: माता के जागरण या चौकी के प्रारंभ में देवी का आह्वान करने के लिए यह एक उत्तम भजन है।
  • गायन विधि: शांत चित्त होकर, लाल आसन पर बैठकर, माता दुर्गा का ध्यान करते हुए पूर्ण श्रद्धा के साथ इस भजन का कीर्तन करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात आदिशक्ति महामाया, दुर्गा माता को समर्पित है। सनातन परंपरा में माता दुर्गा को संपूर्ण सृष्टि की जननी, संहारक और संरक्षिका माना गया है। श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब माता विभिन्न रूपों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना करती हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त उसी परम शक्ति का आह्वान करता है। इस भजन को प्रसिद्ध लोक गायक और कलाकार मनोज तिवारी ने अपनी सुरीली आवाज देकर जन-जन तक पहुँचाया है, जिससे यह भजन हर घर में गूंजने लगा है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन लोक संस्कृति और पारंपरिक देवी गीतों की समृद्ध विरासत से प्रेरित है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रों में देवी पूजा की एक लंबी परंपरा रही है, जहाँ स्थानीय बोलियों में माता के गीत गाए जाते हैं। "बाड़ी शेर पर सवार" इसी परंपरा का एक आधुनिक और परिष्कृत रूप है। इस भजन की रचना में सरल शब्दों का प्रयोग किया गया है ताकि एक साधारण व्यक्ति भी माता की भक्ति में लीन हो सके। इसकी पृष्ठभूमि पूरी तरह से भक्ति आंदोलन और लोक संगीत के समन्वय पर आधारित है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा भोजपुरी मिश्रित हिंदी है, जो इसे अत्यंत सुगम और कर्णप्रिय बनाती है। इसकी काव्य शैली 'पद' और 'गीत' विधा के अंतर्गत आती है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक माता के दिव्य स्वरूप को सजीव करते हैं। उदाहरण के लिए, "लाल चुनरिया" और "गोरी-गोरी कलाई" जैसे शब्द बिंब विधान का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। भजन की लयबद्धता और अंतरा-मुखड़ा का संयोजन ऐसा है कि यह श्रोता को झूमने पर विवश कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति ही नहीं सिखाता, बल्कि जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:

  1. निर्भयता: माता का सिंह पर सवार होना हमें यह सिखाता है कि हमें अपने जीवन की विपरीत परिस्थितियों और भयों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।
  2. सौंदर्य और शक्ति का संतुलन: माता का सौम्य रूप (चूड़ी, बिंदिया) और उनका उग्र रूप (त्रिशूल, खप्पर) यह दर्शाता है कि जीवन में करुणा और शक्ति दोनों का होना आवश्यक है।
  3. अहंकार का त्याग: जब हम माता के चरणों में शीश झुकाते हैं, तो हमारे भीतर के अहंकार का नाश होता है, जो आध्यात्मिक प्रगति की पहली सीढ़ी है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ और आध्यात्मिक महत्व
बाड़ी विराजमान हैं / हैं माता के सर्वव्यापी और साक्षात होने का सूचक।
बाट जोहेला राह देखना / प्रतीक्षा करना भक्त की तीव्र व्याकुलता और प्रतीक्षा का भाव।
जियरा हृदय / प्राण आत्मा का परमात्मा से मिलने का आंतरिक अनुराग।
चंद्रहार चंद्रमा के समान सुंदर हार माता की शीतलता और दिव्यता का प्रतीक।
खप्पर एक पात्र (हथियार) बुराइयों और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने का प्रतीक।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"बाड़ी शेर पर सवार, माई आजा एक बार।"
हे माता! आप सिंह वाहिनी हैं, आप अपने दिव्य वाहन शेर पर सवार होकर मेरे जीवन में एक बार अवश्य पधारें।

"तोहरी बाट जोहेला, मोरा जियरा बेकरार।"
मेरा मन और प्राण आपके दर्शन के लिए अत्यंत व्याकुल हैं। मैं निरंतर आपके आगमन की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।

"लाल चुनरिया सोहे मैया तोरे अंग में, चूड़ी खनके तोरी गोरी-गोरी कलाई में।"
आपके श्रीअंगों पर सुशोभित लाल चुनरी और आपकी कलाई में खनकती चूड़ियाँ आपके ममतामयी और सुहागिन रूप को दर्शाती हैं, जो भक्तों का कल्याण करने वाला है।

"माथे पे बिंदिया चमके, चमके चंद्रहार।"
आपके मस्तक पर लगी बिंदिया और गले का हार पूरे ब्रह्मांड को आलोकित कर रहा है।

"हाथ में त्रिशूल सोहे, खप्पर विराजे, दुष्टन को मारे मैया, सिंह गर्जे।"
आपके हाथों में सुशोभित त्रिशूल और खप्पर दुष्टों के विनाश के लिए हैं। आपके सिंह की गर्जना से समस्त पाप और भय दूर भाग जाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ माता दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का जाप करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो शरण देने वाली, तीन नेत्रों वाली, कल्याणकारी और सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं, उन नारायणी गौरी को नमस्कार है।

इसके अतिरिक्त, नवरात्रि के समय देवी सूक्तम का पाठ करने से माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम बाड़ी शेर पर सवार (Badi Sher Par Savar)
समर्पित देवता माता दुर्गा (आदिशक्ति)
मुख्य गायक मनोज तिवारी (Manoj Tiwari)
भाषा भोजपुरी / हिंदी (Bhojpuri / Hindi)
भक्ति भाव समर्पण, वात्सल्य, करुणा (Devotion & Surrender)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जगराता, माता की चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को सुप्रसिद्ध लोक गायक और अभिनेता मनोज तिवारी ने गाया है। उनकी अनूठी शैली और सुरीली आवाज ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और निश्छल प्रेम है। यह हमें सिखाता है कि जब हम सच्चे हृदय से माता को पुकारते हैं, तो वे हमारे सभी कष्टों को दूर करने अवश्य आती हैं।

यद्यपि इसे कभी भी गाया जा सकता है, परंतु चैत्र और शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जगराता और माता की चौकी के पावन अवसरों पर इसका गायन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

सनातन धर्म में लाल रंग शक्ति, ऊर्जा, सौभाग्य और तेज का प्रतीक है। माता दुर्गा को लाल चुनरी अत्यंत प्रिय है, जो उनके ममतामयी और कल्याणकारी रूप को दर्शाती है।

हाँ, इस भजन की मधुर धुन और भक्तिमय शब्द मन की चंचलता को शांत करते हैं और साधक के अंतर्मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

त्रिशूल और खप्पर माता के संहारक रूप के प्रतीक हैं। ये दर्शाते हैं कि माता अपने भक्तों की रक्षा के लिए आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार की आसुरी शक्तियों का नाश करती हैं।

हाँ, यह भजन भोजपुरी और पूर्वी लोक संगीत की शैली में रचित है, जो इसे बहुत ही जीवंत और आम जनमानस के करीब बनाता है।

बच्चों में इस भजन के श्रवण से अच्छे संस्कार, साहस और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना जाग्रत होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आती है। इस भजन के लिरिक्स और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों, लोक परंपराओं और संगीत संकलनों से मिलान करके तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और त्रुटिहीन जानकारी पहुँचाना है ताकि वे माता की आराधना पूर्ण श्रद्धा और सही उच्चारण के साथ कर सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - गीताप्रेस गोरखपुर
  • पारंपरिक भोजपुरी देवी गीत संग्रह
  • मनोज तिवारी के आधिकारिक संगीत एल्बम

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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