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नन्द के आनंद भयो – कृष्ण भजन (Nand Ke Anand Bhayo) | Nand Ghar Anand Bhayo Lyrics

240 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 नन्द के आनंद भयो – कृष्ण भजन

(Nand Ke Anand Bhayo) – Nand Ghar Anand Bhayo

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन, जन्मोत्सव भजन
📍 स्थान: गोकुल, ब्रज

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥
॥ आनंद उमंग भयो…॥

॥ अंतरा १ ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा २ ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो नंदलाल की, जय यशोदा लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ३ ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ४ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ५ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ६ ॥

पूनम के चाँद जैसी, शोभी है बाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ७ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ८ ॥

भक्तो के आनंदकंद, जय यशोदा लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो यशोदा लाल की, जय हो गोपाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ९ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा १० ॥

आनंद से बोलो सब, जय हो बृज लाल की ।
हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की ॥

जय हो बृज लाल की, पावन प्रतिपाल की ।
गोकुल में आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

॥ अंतरा ११ ॥

कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥

गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की॥

आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ।
नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥
॥ बृज में आनंद भयो…॥

🎵 कृष्ण जन्मोत्सव भजन | नन्द गाँव का आनंद

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह उल्लासपूर्ण भजन नन्द के घर कृष्ण के जन्म की खुशी में गाया जाता है। "नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की" – नन्द के घर आनंद हुआ है, कन्हैया लाल की जय हो।

"आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की" – आनंद और उमंग छा गया है, नन्दलाल की जय हो। "बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की" – ब्रज में आनंद हुआ है, यशोदा के लाल की जय हो।

"हाथी घोडा पालकी, जय कन्हिया लाल की" – हाथी, घोड़ा, पालकी (ऐश्वर्य के प्रतीक) के साथ कन्हैया लाल की जय हो। यह शोभायात्रा का वर्णन है।

"कोटि ब्रह्माण्ड के, अधिपति लाल की" – करोड़ों ब्रह्माण्डों के स्वामी (कृष्ण) की जय हो। यह बताता है कि नन्द के इस बालक में सारे ब्रह्माण्ड का अधिपति निवास करता है।

"गौ चरने आये, जय हो पशुपाल की" – वे गाय चराने आए हैं, पशुपालक (गोपाल) की जय हो। "पूनम के चाँद जैसी, शोभी है बाल की" – पूर्णिमा के चाँद के समान इस बालक की शोभा है।

"भक्तो के आनंदकंद, जय यशोदा लाल की" – भक्तों के आनंद के कंद (मूल), यशोदा के लाल की जय। "जय हो बृज लाल की, पावन प्रतिपाल की" – ब्रज के लाल की जय, जो पावन (पवित्र) की रक्षा करते हैं।

यह भजन कृष्ण के जन्मोत्सव पर गाया जाने वाला एक पारंपरिक भजन है, जिसमें नन्द-यशोदा, गोकुल-बृज सबके आनंद का वर्णन है। यह भक्तों को भी उस आनंद में शामिल होने का आह्वान करता है।

📖 भजन का महत्व

नन्द के आनंद भयो भजन कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है। यह उस आनंद और उल्लास का वर्णन करता है जो नन्द के घर कृष्ण के जन्म पर हुआ था।

इस भजन में बार-बार "जय कन्हिया लाल की" का उद्घोष है। यह एक सामूहिक उद्घोष है, जैसे कोई समूह कीर्तन कर रहा हो और सब मिलकर जय-जयकार कर रहे हों।

"हाथी घोडा पालकी" – यह राजसी ठाठ-बाठ के प्रतीक हैं, जो कृष्ण के दिव्य स्वरूप और ऐश्वर्य को दर्शाते हैं। वे भले ही गोकुल के ग्वाले लगते हों, पर वास्तव में वे करोड़ों ब्रह्माण्डों के स्वामी हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎉 आनंद और उमंग का प्रतीक

यह भजन पूरी तरह से आनंद और उमंग से भरा हुआ है। हर पंक्ति में "आनंद" और "जय" शब्द आते हैं, जो उत्सव के माहौल को और भी उल्लासपूर्ण बना देते हैं।

🌍 ब्रह्मांडीय स्वामी

"कोटि ब्रह्माण्ड के अधिपति" – यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि यह नंदलाल केवल गोकुल के ग्वाले नहीं हैं, बल्कि सारे ब्रह्मांड के स्वामी हैं। फिर भी वे अपने भक्तों के बीच सहज भाव से विहार करते हैं।

🎯 संदेश : जब कृष्ण का जन्म होता है, तो केवल नन्द के घर ही नहीं, बल्कि पूरे ब्रज में, गोकुल में, और हर भक्त के हृदय में आनंद छा जाता है। वे भक्तों के आनंदकंद हैं। आइए, हम सब मिलकर उनके इस आनंदोत्सव में शामिल हों और जय-जयकार करें।

॥ नन्द के आनंद भयो, जय कन्हिया लाल की ॥
॥ आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "नन्द के आनंद भयो – कृष्ण भजन (Nand Ke Anand Bhayo) | Nand Ghar Anand Bhayo Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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