मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।
🙏 करीं नवदुर्गा के स्वागतम – नवरात्रि भजन
(Kari Navdurga Ke Swagatam) – Navratri Bhajan 2026
🎬 गीत विवरण
📜 भजन लिरिक्स (भोजपुरी-हिन्दी मिश्रित)
॥ स्थायी ॥
शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया
लहर लहर लहरता लाली चुनरिया
शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया
लहर लहर लहरता लाली चुनरिया
धन भइल दर्शन कइके नजरिया
धन भइल दर्शन कइके नजरिया
आइल बा नवरातर महीनवाँ
नाँचीं बजा के ढोल, ढम ढम ढम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
॥ अंतरा १ ॥
गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया
लाग-ता देवी के बोल दी मुरतिया
गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया
लाग-ता देवी के बोल दी मुरतिया
ऊँचा भवनवाँ, मोहेला मनवाँ
पंडाल के झाँकी महँगा महँगा
पंडाल के झाँकी महँगा महँगा
जवन कलर साड़ी मईया के
उहे कलर मोर लहँगा लहँगा
जवन कलर साड़ी मईया के
उहे कलर मोर लहँगा
उहे कलर मोर सोरहो सिंगारवा
गरबा में चमकेला चम चम चम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
॥ अंतरा २ ॥
महिमा सनातन के पहुँचे संसार में
जिये परम्परा धर्म के अकवार में
महिमा सनातन के पहुँचे संसार में
जिये परम्परा धर्म के अकवार में
माथे प गोरिया, लेके गगरिया
गावेलू केकरा ला गीतिया गीतिया
गावेलू केकरा ला गीतिया गीतिया
जगदम्बा, लक्षमी सरस्वती के
लागे बड़ा निक झिझीया झिझीया
जगदम्बा, लक्षमी सरस्वती के
लागे बड़ा निक झिझीया झिझीया
सखिया सहेली संग चढ़ते दशहरा
भक्ति के रंग में रंगा गइनी हम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
🎵 गायक: सुरभि कश्यप, राजीव मिश्रा | संगीत: शिशिर पांडेय | गीत: संतोष पुरी
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भोजपुरी-हिन्दी मिश्रित भजन नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ नवदुर्गा के स्वागत में गाया गया है। "स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम" – हम नवदुर्गा का स्वागत करते हैं।
"शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया" – माँ शेर पर सवार होकर आई हैं, उनकी लाल चुनरी लहरा रही है। "धन भइल दर्शन कइके नजरिया" – उनके दर्शन करके आँखें धन्य हो गईं। "आइल बा नवरातर महीनवाँ" – नवरात्रि का महीना आ गया है, आओ ढोल बजाकर नाचें।
"गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया" – कुम्हार ने ऐसी सुंदर मूर्ति गढ़ी है, मानो देवी बोल रही हों। ऊँचे भवनों में, मन मोह लेने वाले पंडालों में भव्य झाँकियाँ सजी हैं।
"जवन कलर साड़ी मईया के, उहे कलर मोर लहँगा" – माँ जिस रंग की साड़ी पहनती हैं, वही रंग मेरा लहंगा है। वही रंग मेरा सोलह श्रृंगार है, और गरबा में मैं चमकती हूँ।
"महिमा सनातन के पहुँचे संसार में, जिये परम्परा धर्म के अकवार में" – सनातन की महिमा संसार में फैले, धर्म की परम्परा हमेशा जीवित रहे।
"माथे प गोरिया, लेके गगरिया, गावेलू केकरा ला गीतिया" – माथे पर गोरिया (मटकी) लेकर, किसके लिए गीत गाती हूँ? जगदम्बा, लक्ष्मी, सरस्वती का नाम लेकर भक्ति में रंग जाती हूँ।
"सखिया सहेली संग चढ़ते दशहरा, भक्ति के रंग में रंगा गइनी हम" – सखियों-सहेलियों के संग दशहरा (विजयादशमी) मनाते हुए, मैं भक्ति के रंग में रंग गई हूँ।
यह भजन नवरात्रि के उत्साह, माँ के दर्शन की धन्यता, पंडालों की भव्यता, और गरबा-नृत्य के उल्लास को बखूबी दर्शाता है।
📖 विशेष शब्दों के अर्थ
- मयरिया: मैया, माता
- सुरतिया: सुंदर आकृति, मूर्ति
- लाग-ता: लगता है, मानो
- मुरतिया: मूर्ति
- मोहेला: मोह लेने वाला
- लहँगा: लहंगा (पारंपरिक स्कर्ट)
- सोरहो सिंगार: सोलह श्रृंगार
- अकवार: आकर, स्वरूप
- गोरिया: छोटा मटका (गरबा में प्रयुक्त)
- गगरिया: घड़ा, कलश
- झिझीया: जयकारा, जोश भरा नारा
- चढ़ते दशहरा: दशहरा (विजयादशमी) मनाते हुए
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🦁 माँ का शेर पर सवारी
माँ दुर्गा का शेर पर सवार होना उनके शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदा तत्पर हैं।
🎨 गरबा और पंडाल की झाँकी
नवरात्रि में गरबा नृत्य और पंडालों में माँ की भव्य झाँकियाँ सजाने की परंपरा है। यह भजन उस सांस्कृतिक उत्सव को जीवंत करता है।
🎯 संदेश : नवरात्रि का पावन पर्व आ गया है। माँ शेर पर सवार होकर आई हैं, उनकी लाल चुनरी लहरा रही है। पंडालों में भव्य झाँकियाँ सजी हैं, गरबा की धुन पर सब झूम रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर नवदुर्गा का स्वागत करें और भक्ति के रंग में रंग जाएँ।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "करीं नवदुर्गा के स्वागतम – नवरात्रि भजन (Kari Navdurga Ke Swagatam) | Surabhi Kashyap" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
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