🙏 करीं नवदुर्गा के स्वागतम – नवरात्रि भजन
(Kari Navdurga Ke Swagatam) – Navratri Bhajan 2026
🎬 गीत विवरण
📜 भजन लिरिक्स (भोजपुरी-हिन्दी मिश्रित)
॥ स्थायी ॥
शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया
लहर लहर लहरता लाली चुनरिया
शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया
लहर लहर लहरता लाली चुनरिया
धन भइल दर्शन कइके नजरिया
धन भइल दर्शन कइके नजरिया
आइल बा नवरातर महीनवाँ
नाँचीं बजा के ढोल, ढम ढम ढम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
॥ अंतरा १ ॥
गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया
लाग-ता देवी के बोल दी मुरतिया
गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया
लाग-ता देवी के बोल दी मुरतिया
ऊँचा भवनवाँ, मोहेला मनवाँ
पंडाल के झाँकी महँगा महँगा
पंडाल के झाँकी महँगा महँगा
जवन कलर साड़ी मईया के
उहे कलर मोर लहँगा लहँगा
जवन कलर साड़ी मईया के
उहे कलर मोर लहँगा
उहे कलर मोर सोरहो सिंगारवा
गरबा में चमकेला चम चम चम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
॥ अंतरा २ ॥
महिमा सनातन के पहुँचे संसार में
जिये परम्परा धर्म के अकवार में
महिमा सनातन के पहुँचे संसार में
जिये परम्परा धर्म के अकवार में
माथे प गोरिया, लेके गगरिया
गावेलू केकरा ला गीतिया गीतिया
गावेलू केकरा ला गीतिया गीतिया
जगदम्बा, लक्षमी सरस्वती के
लागे बड़ा निक झिझीया झिझीया
जगदम्बा, लक्षमी सरस्वती के
लागे बड़ा निक झिझीया झिझीया
सखिया सहेली संग चढ़ते दशहरा
भक्ति के रंग में रंगा गइनी हम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम
🎵 गायक: सुरभि कश्यप, राजीव मिश्रा | संगीत: शिशिर पांडेय | गीत: संतोष पुरी
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भोजपुरी-हिन्दी मिश्रित भजन नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ नवदुर्गा के स्वागत में गाया गया है। "स्वागतम स्वागतम, करीं नवदुर्गा के स्वागतम" – हम नवदुर्गा का स्वागत करते हैं।
"शेर प सवार भइल बाड़ी मयरिया" – माँ शेर पर सवार होकर आई हैं, उनकी लाल चुनरी लहरा रही है। "धन भइल दर्शन कइके नजरिया" – उनके दर्शन करके आँखें धन्य हो गईं। "आइल बा नवरातर महीनवाँ" – नवरात्रि का महीना आ गया है, आओ ढोल बजाकर नाचें।
"गढ़ले कुम्हार बाटे अइसन सुरतिया" – कुम्हार ने ऐसी सुंदर मूर्ति गढ़ी है, मानो देवी बोल रही हों। ऊँचे भवनों में, मन मोह लेने वाले पंडालों में भव्य झाँकियाँ सजी हैं।
"जवन कलर साड़ी मईया के, उहे कलर मोर लहँगा" – माँ जिस रंग की साड़ी पहनती हैं, वही रंग मेरा लहंगा है। वही रंग मेरा सोलह श्रृंगार है, और गरबा में मैं चमकती हूँ।
"महिमा सनातन के पहुँचे संसार में, जिये परम्परा धर्म के अकवार में" – सनातन की महिमा संसार में फैले, धर्म की परम्परा हमेशा जीवित रहे।
"माथे प गोरिया, लेके गगरिया, गावेलू केकरा ला गीतिया" – माथे पर गोरिया (मटकी) लेकर, किसके लिए गीत गाती हूँ? जगदम्बा, लक्ष्मी, सरस्वती का नाम लेकर भक्ति में रंग जाती हूँ।
"सखिया सहेली संग चढ़ते दशहरा, भक्ति के रंग में रंगा गइनी हम" – सखियों-सहेलियों के संग दशहरा (विजयादशमी) मनाते हुए, मैं भक्ति के रंग में रंग गई हूँ।
यह भजन नवरात्रि के उत्साह, माँ के दर्शन की धन्यता, पंडालों की भव्यता, और गरबा-नृत्य के उल्लास को बखूबी दर्शाता है।
📖 विशेष शब्दों के अर्थ
- मयरिया: मैया, माता
- सुरतिया: सुंदर आकृति, मूर्ति
- लाग-ता: लगता है, मानो
- मुरतिया: मूर्ति
- मोहेला: मोह लेने वाला
- लहँगा: लहंगा (पारंपरिक स्कर्ट)
- सोरहो सिंगार: सोलह श्रृंगार
- अकवार: आकर, स्वरूप
- गोरिया: छोटा मटका (गरबा में प्रयुक्त)
- गगरिया: घड़ा, कलश
- झिझीया: जयकारा, जोश भरा नारा
- चढ़ते दशहरा: दशहरा (विजयादशमी) मनाते हुए
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
🦁 माँ का शेर पर सवारी
माँ दुर्गा का शेर पर सवार होना उनके शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदा तत्पर हैं।
🎨 गरबा और पंडाल की झाँकी
नवरात्रि में गरबा नृत्य और पंडालों में माँ की भव्य झाँकियाँ सजाने की परंपरा है। यह भजन उस सांस्कृतिक उत्सव को जीवंत करता है।
🎯 संदेश : नवरात्रि का पावन पर्व आ गया है। माँ शेर पर सवार होकर आई हैं, उनकी लाल चुनरी लहरा रही है। पंडालों में भव्य झाँकियाँ सजी हैं, गरबा की धुन पर सब झूम रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर नवदुर्गा का स्वागत करें और भक्ति के रंग में रंग जाएँ।