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कृष्ण(Kanha Ne Murli Bajai)

कान्हा ने मुरली बजाई भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित सुंदर राधा कृष्ण भजन और इसके लाभ जानें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।
🎵 कान्हा ने मुरली बजाई – कृष्ण भजन

(Kanha Ne Murli Bajai) – Radha Krishna Bhajan

राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन, राधा-कृष्ण भजन
📍 स्थान: गोकुल, वृन्दावन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ प्रस्तावना ॥

सुनो री चंदर की पूर्णिमा
रस बरसाके रात
कजन तले कान्हा खड़े
लिया मुरलिया वाले

॥ स्थायी ॥

राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे
राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा १ ॥

जिनके बिना सुन तोहे निंदिया ना आयी रे
जिनके बिना सुन तोहे निंदिया ना आयी रे
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा २ ॥

माना सखी री नटखट हैं वो
गोकुल वाला ग्वाला
गोकुल वाला ग्वाला
फिर कहे को उसके रंग का
कजरा नैनो मे डाला
कजरा नैनो मे डाला

तू छोड़ ये बहना
अब हमसे क्या छुपाना
हैं बात तेरी झूठी
हैं बात तेरी झूठी
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा ३ ॥

तेरे उसके बीच खड़ी हैं
ये बंसी बरैनिया
ये बंसी बरैनिया
छोड़ भी दो ये बंस की पोरी
राधा की सोतानिया
राधा की सोतानिया

रजे जरा चटपट
मिटाओ ना खटपट
नहीं तो प्रीत टूटी
नहीं तो प्रीत टूटी
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा ४ ॥

कान्हा टोरी राधा से क्या हैं लड़ाई रे
जाके जरा इतना तो पूछो कन्हाई रे
सखी री कहे रुती
सखी री कहे रुती

॥ अंतरा ५ ॥

चंचल चंचल चल तुनहरी
हिरनी धोखा खाए
गोरा गोरा देख के मुखड़ा
चंदा चुप चुप जाये

बात करे तो फूल झरे
मुस्काये तो रंग भरे
बात करे तो फूल झरे
मुस्काये तो रंग भरे
जुर्म करे नैन तुम्हारे क्या कहने

🎵 राधा-कृष्ण प्रेम भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन एक विशेष रात्रि के वर्णन से शुरू होता है – "सुनो री चंदर की पूर्णिमा, रस बरसाके रात, कजन तले कान्हा खड़े, लिया मुरलिया वाले" – हे सखी, सुनो! चाँद की पूर्णिमा की रात है, रस बरस रहा है। केले के पेड़ के नीचे कान्हा मुरली लिए खड़े हैं।

सखियाँ राधा से कहती हैं – "राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे" – हे राधा, तेरे कान्हा ने मुरली बजाई है। सखियाँ बार-बार यही कह रही हैं।

"जिनके बिना सुन तोहे निंदिया ना आयी रे" – जिनके बिना तुझे नींद नहीं आती, उन्हीं कान्हा ने मुरली बजाई है। सखियाँ राधा को चिढ़ा रही हैं।

"माना सखी री नटखट हैं वो, गोकुल वाला ग्वाला" – माना कि वो नटखट है, गोकुल का ग्वाला है, फिर क्यों उसके रंग का काजरा तूने अपनी आँखों में डाला? तू छोड़ यह बहाना, अब हमसे क्या छुपाना? तेरी बातें झूठी हैं।

"तेरे उसके बीच खड़ी हैं ये बंसी बरैनिया" – तुझमें और उसमें यह बाँसुरी बाधा बनकर खड़ी है। इस बाँस की बनी हुई बाँसुरी को छोड़ दे, यह राधा की सौतन है। सखियाँ कहती हैं कि इस बाँसुरी को मिटा दो, नहीं तो प्रीत टूट जाएगी।

"कान्हा टोरी राधा से क्या हैं लड़ाई रे" – कान्हा, तुम्हारी राधा से क्या लड़ाई है? जाकर जरा इतना तो पूछो। अंत में कृष्ण के रूप का वर्णन है – चंचल चाल, हिरनी धोखा खाए, गोरा मुखड़ा देखकर चाँद भी चुप हो जाए। बात करे तो फूल झरें, मुस्काए तो रंग भर जाएँ।

यह भजन राधा-कृष्ण के प्रेम और सखियों की सहेलियों के बीच की चुहलबाजी का अद्भुत चित्रण है।

📖 विशेष शब्दों के अर्थ

  • कजन तले: केले के पेड़ के नीचे
  • मुरलिया/बंसी: बाँसुरी
  • सखी री कहे रुती: सखियाँ यह कह रही हैं (चिढ़ा रही हैं)
  • बंसी बरैनिया: बाँसुरी रूपी बैरन (दुश्मन)
  • सोतानिया: सौतन, सपत्नी
  • चटपट/खटपट: झगड़ा, कलह
  • तुनहरी: तुम्हारी

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎵 बाँसुरी का महत्व

इस भजन में बाँसुरी को राधा की सौतन कहकर संबोधित किया गया है। यह बाँसुरी के प्रति राधा की ईर्ष्या और कृष्ण के प्रति उनके अटूट प्रेम को दर्शाता है। बाँसुरी कृष्ण के होठों से लगी रहती है, इसलिए वह राधा की प्रतिद्वंद्वी है।

💞 सखियों की चुहल

सखियों का राधा को चिढ़ाना और उनकी प्रेम-कहानी पर टिप्पणी करना ब्रज की गोपी-संस्कृति का अभिन्न अंग है। यह भजन उसी चुहलबाजी और आत्मीयता को दर्शाता है।

🎯 संदेश : कृष्ण की मुरली का रस सुनकर राधा का मन व्याकुल हो जाता है। उनके रूप, उनकी चाल, उनकी मुस्कान सब कुछ इतना मोहक है कि चाँद भी चुप हो जाता है और फूल झर जाते हैं। यह भजन हमें उस दिव्य प्रेम और सौंदर्य की झलक देता है जो राधा-कृष्ण की लीलाओं में समाया है।

॥ राधा तोर कान्हा ने मुरली बजाई रे ॥
॥ सखी री कहे रुती ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "कान्हा ने मुरली बजाई – कृष्ण भजन (Kanha Ne Murli Bajai) | Radha Krishna Bhajan" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

श्रेणियां: Holi Geet

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 18 Oct 2026

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