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माखन चोर नन्द किशोर – कृष्ण भजन (Makhan Chor Nand Kishor) | Krishna Bhajan

121 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 माखन चोर नन्द किशोर – कृष्ण भजन

(Makhan Chor Nand Kishor) – Krishna Bhajan 2026

कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे ॥

📝 भजन विवरण

🎤 अपलोडकर्ता: अनिल भोपाल बाघीओ वाले
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन
📍 स्थान: गोकुल, वृन्दावन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

माखन चोर, नन्द किशोर, मन मोहन, घनश्याम रे ll
कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे

॥ अंतरा १ ॥

देवकी माँ ने, जनम दिया, और मईया यशोदा ने पाला ll
तू गोकुल का, ग्वाला वृन्दा, वन का बांसुरी वाला
हो आज तेरी बंसी, फिर बजी, मेरे मन के धाम रे,
कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे
माखन चोर, नन्द किशोर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

॥ अंतरा २ ॥

काली नाग के, साथ लड़ा तूँ, ज़ालिम कंस को मारा ll
बाल अवस्था, में ही तूने, खेला खेल ये सारा
हो तेरा बचपन, तेरा जीवन, जैसे एक संग्राम रे
कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे
माखन चोर, नन्द किशोर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

॥ अंतरा ३ ॥

तूने सब का, चैन चुराया, ओ चितचोर कन्हैया ll
वो जाने कब घर, आए देखे, राह यशोदा मैया
अरे व्याकुल राधा ढूंढे श्याम, न आया हो गई शाम रे
कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे
माखन चोर, नन्द किशोर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

🎵 अपलोड करता- अनिल भोपाल बाघीओ वाले

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों और नामों का गुणगान करता है। "माखन चोर, नन्द किशोर, मन मोहन, घनश्याम" – ये सभी कृष्ण के विभिन्न नाम हैं, जो उनकी लीलाओं और गुणों को दर्शाते हैं। भक्त कहता है कि तेरे कितने रूप हैं और कितने नाम हैं।

"देवकी माँ ने जनम दिया, और मईया यशोदा ने पाला" – देवकी ने जन्म दिया, पर यशोदा ने पालन-पोषण किया। तू गोकुल का ग्वाला है, वृन्दावन के वन का बांसुरी वाला। आज तेरी बांसुरी फिर बजी, मेरे मन के धाम में।

"काली नाग के साथ लड़ा, ज़ालिम कंस को मारा" – कृष्ण ने बाल अवस्था में ही कालिया नाग से लड़ाई की और कंस जैसे अत्याचारी को मारा। उनका बचपन और जीवन एक संग्राम की तरह था।

"तूने सब का चैन चुराया, ओ चितचोर कन्हैया" – कन्हैया ने सबका चैन चुरा लिया। यशोदा मैया राह देख रही हैं कि कब घर आए। राधा व्याकुल होकर श्याम को ढूंढ़ रही हैं, पर शाम हो गई और वे नहीं आए।

यह भजन कृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी वीरता, उनके मोहक रूप और उनके प्रति भक्तों, माता यशोदा और राधा के प्रेम का सुंदर चित्रण है।

📖 कृष्ण के नामों का अर्थ

  • माखन चोर: माखन चुराने वाले, बाल कृष्ण की माखन लीला का प्रतीक
  • नन्द किशोर: नन्द के किशोर पुत्र, नन्द के घर पले-बढ़े
  • मन मोहन: मन को मोह लेने वाले, आकर्षक
  • घनश्याम: काले बादल के समान साँवले रंग वाले
  • चितचोर: चित्त (मन) चुराने वाले

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🎭 बहुरूपी कृष्ण

यह भजन कृष्ण के अनेक रूपों को एक साथ दर्शाता है – बाल कृष्ण (माखन चोर), ग्वाला (बांसुरी वाला), योद्धा (काली नाग संहारक, कंस का वध), और मोहक प्रेमी (चितचोर, राधा के प्रिय)।

💞 मातृ-प्रेम और प्रेम-व्याकुलता

यशोदा की राह देखना और राधा का व्याकुल होकर श्याम को ढूंढ़ना – यह दोनों ही भाव मातृ-प्रेम और प्रेमिका के प्रेम को दर्शाते हैं, जो कृष्ण भक्ति के अभिन्न अंग हैं।

🎯 संदेश : कृष्ण के रूप और नाम अनंत हैं। भक्त उनके हर रूप में उन्हें देखता है – माखन चुराते बालक के रूप में, बांसुरी बजाते ग्वाले के रूप में, कालिया नाग का दमन करते वीर के रूप में, और राधा के मन को मोह लेने वाले प्रेमी के रूप में। हर रूप में वे अनूठे हैं।

॥ कितने तेरे रूप रे, कितने तेरे नाम रे ॥
॥ माखन चोर नन्द किशोर मन मोहन घनश्याम रे ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "माखन चोर नन्द किशोर – कृष्ण भजन (Makhan Chor Nand Kishor) | Krishna Bhajan" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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