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होरी खेलत नंदलाल बृज में – होली भजन (Hori Khelat Nandalal) | Krishna Holi Bhajan

199 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 होरी खेलत नंदलाल बृज में – होली भजन

(Hori Khelat Nandalal) – Krishna Holi Bhajan 2026

बाजत ढोलक झांझ मजीरा ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, कृष्ण भजन
📍 स्थान: ब्रज, वृन्दावन, यमुना तट

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

होरी खेलत नंदलाल बृज में, होरी खेलत नंदलाल।
ग्वाल बाल संग रास रचाए, नटखट नन्द गोपाल॥
होरी खेलत नंदलाल बृज में, होरी खेलत नंदलाल।
ग्वाल बाल संग रास रचाए, नटखट नन्द गोपाल॥

॥ अंतरा १ ॥

बाजत ढोलक झांझ मजीरा,
गावत सब मिल आज कबीर।
नाचत दे दे ताल, होरी खेलत नंदलाल...

॥ अंतरा २ ॥

भर भर मारे रंग पिचकारी,
रंग गए बृज के नर नारी।
उड़त अबीर गुलाल, होरी खेलत नंदलाल...

॥ अंतरा ३ ॥

ऐसी होरी खेली कन्हाई,
यमुना तट पर धूम मचाई।

🎵 पारम्परिक ब्रज होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध होली भजन ब्रज में नंदलाल (कृष्ण) द्वारा खेली जा रही होली का वर्णन करता है। "होरी खेलत नंदलाल बृज में" – अर्थात नंद के लाल कृष्ण ब्रज में होली खेल रहे हैं।

भजन में ग्वाल-बालों के साथ रास रचाने और नटखट नंदगोपाल की चंचल लीलाओं का वर्णन है। ढोलक, झांझ, मजीरा जैसे वाद्ययंत्र बज रहे हैं और सब मिलकर गा रहे हैं और ताल पर नाच रहे हैं।

"भर भर मारे रंग पिचकारी" – पिचकारियों में रंग भर-भरकर मारा जा रहा है और ब्रज के नर-नारी सभी रंग गए हैं। अबीर और गुलाल उड़ रहा है। कन्हाई ने यमुना के तट पर ऐसी होली खेली कि धूम मच गई।

इस भजन का संदेश है कि प्रभु के साथ होली खेलने का अर्थ है उनके प्रेम में रंग जाना। जैसे ब्रज में सभी रंगों में सराबोर होकर झूम रहे हैं, वैसे ही भक्त को भी भगवान के प्रेम-रंग में रंग जाना चाहिए।

📍 ब्रज की होली – एक परिचय

ब्रज की होली विश्वविख्यात है। यहाँ की होली कृष्ण-राधा के प्रेम और लीलाओं से जुड़ी है। इस भजन में वर्णित ढोलक, झांझ, मजीरा जैसे वाद्ययंत्र ब्रज की पारंपरिक होली के अभिन्न अंग हैं।

यमुना तट पर होली का विशेष महत्व है। यह वह स्थान है जहाँ कृष्ण ने अनेक लीलाएँ कीं। इस भजन में यमुना तट पर कन्हाई द्वारा खेली गई होली का उल्लेख इसे और भी पवित्र बनाता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🥁 संगीतमय अभिव्यक्ति

इस भजन में ढोलक, झांझ, मजीरा का उल्लेख है – ये सभी वाद्ययंत्र उत्सव और आनंद के प्रतीक हैं। भक्ति में भी संगीत और नृत्य का महत्वपूर्ण स्थान है।

🎨 रंगों का उल्लास

रंग, अबीर, गुलाल और पिचकारी – ये सभी होली के उत्सव के प्रतीक हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति भी एक उत्सव है, जहाँ हम प्रभु के प्रेम में रंग जाते हैं।

🎯 संदेश : जैसे कन्हाई ने यमुना तट पर होली खेली और सबको अपने रंग में रंग लिया, वैसे ही भगवान हर भक्त को अपने प्रेम-रंग में रंग लेते हैं। बस जरूरत है समर्पण भाव से उनकी होली में शामिल होने की।

॥ होरी खेलत नंदलाल बृज में ॥
॥ नाचत दे दे ताल ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "होरी खेलत नंदलाल बृज में – होली भजन (Hori Khelat Nandalal) | Krishna Holi Bhajan" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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