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होली रे होली बरसाने की होली – राधा-कृष्ण होली भजन (Holi Re Holi Barsane Ki Holi) | Radha Krishna Holi

148 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 होली रे होली बरसाने की होली – होली भजन

(Holi Re Holi Barsane Ki Holi) – Radha Krishna Holi Bhajan 2026

राधा कृष्ण ने मिल कर खेली बरसाने की होली ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, राधा-कृष्ण भजन
📍 स्थान: बरसाना, ब्रज

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

होली रे होली बरसाने की होली
राधा कृष्ण ने मिल कर खेली बरसाने की होली,
संग किशन के ग्वाल सखा है सखियाँ राधा टोली,
होली रे होली बरसाने की होली

॥ अंतरा १ ॥

हाथो में लेके रंगो गुलाल
मोहन ने रंग डाले राधा के गाल,
राधा की होली थी सच मुच कमाल
श्याम रंग वाले को कर डाले लाल,
धूम धड़का खूब मची है मस्त मलंग हर टोली टोली,
होली रे होली बरसाने की होली

॥ अंतरा २ ॥

लाली मेरे लाल की मैं चित देखु तित लाल,
लाली देखन मैं चली मैं भी हो गई लाल,

॥ अंतरा ३ ॥

नैनो से बाते करे नंग लाल
मुश्का के राधा रानी करती कमल,
आज नहीं मन में है कोई मिलाल
वैसा बरसाने में जैसे हो लाल
धूम धड़का खूब मची है मस्त मलंग हर टोली टोली,
होली रे होली बरसाने की होली

🎵 बरसाने की होली पर आधारित राधा-कृष्ण भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन बरसाने की प्रसिद्ध होली का वर्णन करता है। "होली रे होली बरसाने की होली, राधा कृष्ण ने मिल कर खेली बरसाने की होली" – अर्थात बरसाने की होली निराली है, जहाँ राधा और कृष्ण ने मिलकर होली खेली। कृष्ण के साथ ग्वाल-सखा हैं और राधा की टोली में सखियाँ हैं।

"हाथो में लेके रंगो गुलाल, मोहन ने रंग डाले राधा के गाल" – मोहन (कृष्ण) ने हाथों में रंग और गुलाल लेकर राधा के गालों पर रंग डाला। राधा की होली सचमुच कमाल की थी, उन्होंने श्याम रंग वाले (कृष्ण) को भी लाल कर दिया।

"लाली मेरे लाल की, मैं चित देखु तित लाल" – यह पंक्ति मीरा के प्रसिद्ध पद से ली गई प्रतीत होती है। जहाँ भी देखो, वहाँ मेरे लाल (कृष्ण) की लाली ही लाली है। उस लाली को देखने चली तो मैं भी लाल हो गई।

"नैनो से बाते करे नंग लाल, मुश्का के राधा रानी करती कमल" – नंग लाल (कृष्ण) नैनों से बातें कर रहे हैं और राधा रानी मुस्कुराकर कमल (सुंदरता) बिखेर रही हैं। आज मन में कोई मलाल नहीं, ऐसा आनंद बरसाने में ही है।

यह भजन बरसाने की होली के अनूठे उत्सव और राधा-कृष्ण के प्रेम को दर्शाता है। हर टोली में मस्ती और मलंगी छाई हुई है, धूम-धड़का मचा है।

📍 बरसाने की होली – लठमार होली

बरसाने की होली विश्वविख्यात है। इसे लठमार होली के नाम से जाना जाता है। यह होली राधा-कृष्ण के प्रेम और लीलाओं का प्रतीक है।

परंपरा के अनुसार, कृष्ण और उनके साथी नंदगाँव से बरसाने (राधा का गाँव) आते हैं और गोपियाँ उनका स्वागत लाठियों से करती हैं। कृष्ण और उनके साथी उनसे बचने का प्रयास करते हैं और रंग डालते हैं। यह उत्सव ब्रज की सबसे अनूठी परंपराओं में से एक है।

इस भजन में वर्णित "संग किशन के ग्वाल सखा है सखियाँ राधा टोली" इसी लठमार होली की ओर संकेत करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

💞 राधा-कृष्ण की होली

यह भजन विशेष रूप से राधा-कृष्ण की होली पर केंद्रित है। राधा के गालों पर रंग डालना, राधा का कृष्ण को लाल कर देना – यह उनके पारस्परिक प्रेम और छेड़छाड़ को दर्शाता है।

🎨 मीरा का रंग

"लाली मेरे लाल की" पंक्ति मीरा के भक्ति रस की याद दिलाती है। यह दर्शाता है कि कैसे राधा-कृष्ण की होली में भक्त भी रंग जाते हैं और लाल हो जाते हैं।

🎯 संदेश : बरसाने की होली केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव है। जहाँ प्रेम होता है, वहाँ हर टोली मस्त और मलंग हो जाती है। सच्ची होली वही है जहाँ प्रेम के रंग में सब रंग जाएँ।

॥ होली रे होली बरसाने की होली ॥
॥ धूम धड़का खूब मची है मस्त मलंग हर टोली ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "होली रे होली बरसाने की होली – राधा-कृष्ण होली भजन (Holi Re Holi Barsane Ki Holi) | Radha Krishna Holi" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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