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होली खेल रहे कृष्ण मुरारी लगाये रंग राधा प्यारी – होली भजन (Holi Khel Rahe Krishna Murari) | Radha Krishna Holi

1,061 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🙏 होली खेल रहे कृष्ण मुरारी – होली भजन

(Holi Khel Rahe Krishna Murari) – Radha Krishna Holi Bhajan 2026

लगाये रंग राधा प्यारी ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: पारम्परिक
🏷️ श्रेणी: होली भजन, राधा-कृष्ण भजन
📍 स्थान: ब्रज, वृन्दावन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

देखो झूम रहे धरती झूम रहे गगन,
मेघ बरसाये बदरा होके मगन,
होली खेल रहे कृष्ण मुरारी
लगाये रंग राधा प्यारी।।

॥ अंतरा १ ॥

रंग रसिया रंग खेल रहे है
हाथ में लेके कनक पिचकारी,
वृन्दावन की कुञ्ज गली में
दौड़ रहे है कृष्ण मुरारी,
लीला रच रहे लीला धारी,
लगाये रंग राधा प्यारी।।

॥ अंतरा २ ॥

सतरंगी सी सजी फुलवाड़ी
हर्षित हो रही दुनिया सारी,
स्वर्ग सा सुंदर लगे वृन्दावन
भीग रहे है सब नर नारी,
किरपा बरसा रहे वनवारी
लगाये रंग राधा प्यारी।।

🎵 राधा-कृष्ण होली भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन वृन्दावन में होली के उत्सव का अद्भुत चित्रण करता है। "देखो झूम रहे धरती झूम रहे गगन" – आकाश और पृथ्वी दोनों झूम रहे हैं, बादल भी मगन होकर बरस रहे हैं। पूरा वातावरण उल्लास से भरा है।

"होली खेल रहे कृष्ण मुरारी, लगाये रंग राधा प्यारी" – कृष्ण और राधा होली खेल रहे हैं। राधा प्यारी रंग लगा रही हैं। "रंग रसिया" – रंगों के रसिया कृष्ण हाथ में सोने की पिचकारी लेकर वृन्दावन की कुंज गलियों में दौड़ रहे हैं।

भजन में वृन्दावन की सुंदरता का वर्णन है – "सतरंगी सी सजी फुलवाड़ी" – फुलवारी (बगीचा) सतरंगी सजा है। पूरी दुनिया हर्षित है। वृन्दावन स्वर्ग से भी सुंदर लग रहा है और सभी नर-नारी रंगों में भीग रहे हैं। वनवारी (कृष्ण) कृपा बरसा रहे हैं।

यह भजन राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और होली के उल्लास को एक साथ व्यक्त करता है। भक्त भी इस होली में रंग जाते हैं और वृन्दावन की इस दिव्य लीला में लीन हो जाते हैं।

📍 वृन्दावन की कुंज गलियाँ और होली

वृन्दावन की कुंज गलियाँ राधा-कृष्ण की लीलाओं का केंद्र हैं। ये संकरी गलियाँ, बगीचे और कुंज (बेलों से घिरे स्थान) आज भी भक्तों को उन दिव्य लीलाओं का स्मरण कराते हैं। होली के अवसर पर ये गलियाँ रंगों से सराबोर हो जाती हैं।

कनक पिचकारी – सोने की पिचकारी, जो कृष्ण के हाथ में है। यह उनकी दिव्यता और ऐश्वर्य का प्रतीक है। राधा द्वारा रंग लगाना और कृष्ण का दौड़ना – यह उनकी चिरंतन प्रेमलीला का ही एक रूप है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🌍 प्रकृति का उल्लास

इस भजन में धरती, गगन और बादल भी झूम रहे हैं। यह दर्शाता है कि राधा-कृष्ण की होली केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि उसमें भाग लेती है।

✨ वृन्दावन की दिव्यता

"स्वर्ग सा सुंदर लगे वृन्दावन" – यह पंक्ति वृन्दावन की आध्यात्मिक महिमा को दर्शाती है। भक्तों के लिए वृन्दावन स्वर्ग से भी बढ़कर है क्योंकि यहाँ राधा-कृष्ण की नित्य लीला होती है।

🎯 संदेश : राधा-कृष्ण की होली में भाग लेने का अर्थ है उनकी कृपा से सराबोर हो जाना। जैसे वृन्दावन की हर कुंज गली में कृष्ण दौड़ रहे हैं, वैसे ही भक्त के हृदय में भी प्रभु की लीला सदा होती रहनी चाहिए।

॥ होली खेल रहे कृष्ण मुरारी ॥
॥ लगाये रंग राधा प्यारी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "होली खेल रहे कृष्ण मुरारी लगाये रंग राधा प्यारी – होली भजन (Holi Khel Rahe Krishna Murari) | Radha Krishna Holi" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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