🎶 होली आई रे कन्हाई – होली गीत

(Holi Aayi Re Kanhai) – Krishna Holi Song

रैग छलके सुना दे जरा बासरी ॥

📝 गीत विवरण

🎤 गायक: पारम्परिक/आधुनिक
🏷️ श्रेणी: होली गीत, कृष्ण भजन
📍 स्थान: ब्रज

📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

होली आई रे कन्हाई
होली आई रे
होली आई रे कन्हाई
रैग छलके सुना दे जरा बासरी
होली आई रे कन्हाई
रैग छलके सुना दे जरा बासरी
होली आयी रे आयी रे होली आई रे

॥ अंतरा १ ॥

बरसे गुलाल रंग मोरे आँगनवा
अपने ही रैग में रंग दे मोहे साजनवा हो
देखो नाचे मोरा मनवा

बरसे गुलाल रंग मोरे आँगनवा जी मोरे आँगनवा
अपने ही रंग में रंग दे मोहे साजनवा

तोरे कारन घर से आई तोरे कारण हो
तोरे कारन घर से आई
हुन निकालके सुना दे जरा बासरी

होली आई रे कन्हाई
रैग छलके सुना दे जरा बासरी
होली आयी रे आयी रे होली आई रे

॥ अंतरा २ ॥

छूटे न राग ऐसी रैग दे चुनरिया
धोबन ये धोये चाहे सारी उमरिया हो
मन को रैग देगा सावरिया

छूटे न राग ऐसी रैग दे चुनरिया जी रैग दे चुनरिया
धोबन ये धोये चाहे सारी उमरिया

मोहे भाये न हरजाइ मोहे भाये न
मोहे भाये न हरजाइ मोहे भाये न
रैग हलके सुना दे जरा बासरी

होली आई रे कन्हाई
रैग छलके सुना दे जरा बासरी
होली आई रे कन्हाई
रैग छलके सुना दे जरा बासरी

🎵 कृष्ण होली गीत

🎭 गीत का अर्थ और भावार्थ

"होली आई रे कन्हाई, रैग छलके सुना दे जरा बासरी" – होली आ गई है, हे कन्हाई! राग छलक रहा है, जरा बांसुरी सुना दो। यह कृष्ण से बांसुरी बजाने की प्रार्थना है।

"बरसे गुलाल रंग मोरे आँगनवा" – मेरे आँगन में गुलाल और रंग बरस रहे हैं। गोपी कहती है कि हे साजन (प्रियतम), मुझे अपने ही रंग में रंग दो। मेरा मन नाच रहा है।

"तोरे कारन घर से आई" – तेरे कारण ही मैं घर से आई हूँ। यहाँ "हुन" (गुण/कला) निकालकर बांसुरी सुनाने का अनुरोध है।

"छूटे न राग ऐसी रैग दे चुनरिया" – ऐसा राग दो कि मेरी चुनरी से वह राग कभी न छूटे। चाहे धोबन (धोबी) सारी उमर धोए, फिर भी न जाए। मन को राग देने वाला सावरिया (कृष्ण) है।

"मोहे भाये न हरजाइ" – मुझे हरजाई (बेवफा/धोखेबाज) पसंद नहीं है। यह कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ प्रेम को दर्शाता है।

यह गीत होली के अवसर पर कृष्ण से बांसुरी सुनाने की प्रार्थना और उनके प्रति प्रेम को व्यक्त करता है। "रैग" (राग) शब्द का बार-बार प्रयोग संगीत और प्रेम दोनों के भाव को दर्शाता है।

📖 विशेष शब्दों के अर्थ

  • रैग (राग): संगीत का राग, या प्रेम का भाव
  • छलके: उमड़ना, छलकना
  • साजनवा: साजन, प्रियतम
  • तोरे कारन: तेरे लिए, तेरे कारण
  • हुन: गुण, कला
  • सावरिया: श्याम, कृष्ण
  • हरजाइ: हरजाई, बेवफा, धोखेबाज
  • धोबन: धोबी, कपड़े धोने वाला

🔍 गीत का विशेष महत्त्व

🎵 बांसुरी का महत्व

इस गीत में बार-बार कृष्ण से बांसुरी सुनाने का अनुरोध है। बांसुरी कृष्ण की दिव्यता और उनके प्रेम का प्रतीक है। होली के रंगों के बीच बांसुरी की धुन पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है।

💞 एकनिष्ठ प्रेम

"मोहे भाये न हरजाइ" – यह पंक्ति कृष्ण के प्रति एकनिष्ठ प्रेम को दर्शाती है। गोपी कहती है कि उसे कोई और पसंद नहीं, केवल कृष्ण ही उसके प्रिय हैं।

🎯 संदेश : होली के रंगों के बीच कृष्ण की बांसुरी की धुन का महत्व अद्वितीय है। यह गीत हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम एकनिष्ठ होता है और प्रियतम (कृष्ण) की एक झलक के लिए सब कुछ न्योछावर किया जा सकता है।

॥ होली आई रे कन्हाई ॥
॥ रैग छलके सुना दे जरा बासरी ॥