🎬 आई रे होली आई – आवाज दे कहाँ है

(Aayi Re Holi Aayi) – Bollywood Holi Song

गीतकार: हसन कमाल ॥

🎬 गीत विवरण

🎥 फिल्म: आवाज दे कहाँ है (1990)
🎤 गायक: अनुराधा पौडवाल, मोहम्मद अज़ीज़
✍️ गीतकार: हसन कमाल
🎶 संगीतकार: नौशाद अली
🎭 कलाकार: अविनाश वाढवन, शिखा स्वरूप, अन्नू कपूर
🏷️ श्रेणी: होली गीत, फिल्मी गीत

📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

होली हैं होली
बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

॥ अंतरा १ ॥

आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

॥ अंतरा २ ॥

ऐसी पिया कस के मोहे
अमरी हैं पिचकरी
ऐसी पिया कस के मोहे
अमरी हैं पिचकरी
कपा मोरा गोरा बदन
भीगी मोरी सारी
कपा मोरा गोरा बदन
भीगी मोरी सारी

॥ अंतरा ३ ॥

रूपा सैलोना तोरा गोरी
मन मोरा ललचाये
रूपा सैलोना तोरा गोरी
मन मोरा ललचाये
हल्के तोरा गोरा बदन
बिजली चमक जाये
बिजली चमक जाये

आयी रे होली आयी
आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

॥ अंतरा ४ ॥

लगे मोहे आके गली
होली के बहने
लगे मोहे आके गली
होली के बहने
आग छुए रंग भरे
बात नहीं मने

॥ अंतरा ५ ॥

रंग रंगीला दिन रसीला
कहे तू सरमाये
रंग रंगीला दिन रसीला
कहे तू सरमाये
मन की उमंग आज जरा
कुछ तो निकल जाये
कुछ तो निकल जाये

बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

🎵 फिल्म: आवाज दे कहाँ है (1990) | संगीत: नौशाद अली | गीत: हसन कमाल | गायक: अनुराधा पौडवाल, मोहम्मद अज़ीज़

🎭 गीत का अर्थ और भावार्थ

"आयी रे होली आयी, बरसा गुलाल आज, घटा रंग भारी छाई" – होली आ गई है, आज गुलाल बरस रहा है और रंगों की घटा (बादल) छाई हुई है। यह होली के आगमन का उत्सव है।

"आ में सजना के रंग मैं, तन अपना भी रंग लायी" – नायिका कहती है कि मैं अपने सजना (प्रेमी) के रंग में आकर अपने तन को भी रंग लाई हूँ। यह प्रेम और होली के रंगों के मेल को दर्शाता है।

"ऐसी पिया कस के मोहे अमरी हैं पिचकरी" – प्रीतम ने ऐसी जोर से पिचकारी मारी कि मेरा गोरा बदन काँप गया और मेरी साड़ी भीग गई। यह श्रृंगारिक भाव है।

"रूपा सैलोना तोरा गोरी, मन मोरा ललचाये" – हे गोरी, तुम्हारा सुंदर रूप देखकर मेरा मन ललचा जाता है। तुम्हारा हल्का सा गोरा बदन ऐसे चमकता है जैसे बिजली कौंधे।

"लगे मोहे आके गली होली के बहने" – होली की बहारें (झोंके) मुझे गली में आकर लग रही हैं। आग छूए रंग भरे हैं, बात नहीं मानते।

"रंग रंगीला दिन रसीला, कहे तू सरमाये" – यह रंगों भरा दिन रसीला है, लेकिन तू कहकर शर्मा जाती है। मन की उमंग आज कुछ तो निकल जाए।

यह गीत होली के उत्सव और प्रेम के श्रृंगारिक भावों को एक साथ व्यक्त करता है। अनुराधा पौडवाल और मोहम्मद अज़ीज़ की आवाज़ में यह गीत होली की यादों में आज भी बसा हुआ है।

🎬 फिल्म आवाज दे कहाँ है और यह गीत

आवाज दे कहाँ है 1990 में आई फिल्म थी, जिसमें अविनाश वाढवन, शिखा स्वरूप और अन्नू कपूर ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं। फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद अली ने दिया था, जो मुगल-ए-आज़म जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।

होली गीत "आयी रे होली आयी" इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत है। अनुराधा पौडवाल और मोहम्मद अज़ीज़ की जोड़ी ने इस गीत को बेहद उत्साह और श्रृंगारिकता से भर दिया है।

इस गीत की भाषा ब्रज और अवधी के मिश्रण में है, जैसे "मोहे", "पिया कस के", "अमरी हैं पिचकरी", "कपा मोरा गोरा बदन" – ये सभी शब्द गीत को एक ग्रामीण और पारंपरिक होली का स्वाद देते हैं।

🔍 गीत का विशेष महत्त्व

🎨 होली का उत्सव

यह गीत होली के उत्सव को पूरी तरह से जीवंत कर देता है। गुलाल बरसना, रंगों की घटा छाना, पिचकारियाँ चलना – सब कुछ इस गीत में समाया है।

💞 प्रेम का श्रृंगार

गीत में प्रेमी-प्रेमिका के बीच होली के रंगों में श्रृंगारिक भाव बड़ी खूबसूरती से उकेरे गए हैं। "रूपा सैलोना", "मन ललचाये", "बिजली चमक जाये" जैसे शब्द इसी भाव को दर्शाते हैं।

🎯 संदेश : होली का यह गीत हमें सिखाता है कि होली सिर्फ रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि प्रेम और उत्साह का भी त्यौहार है। रंगों के साथ-साथ दिल भी रंग जाते हैं, और यही होली की सच्ची मिठास है।

॥ आयी रे होली आयी ॥
॥ बरसा गुलाल आज, घटा रंग भारी छाई ॥