आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
Holi Geet

आई रे होली आई – आवाज दे कहाँ है (Aayi Re Holi Aayi) | Anuradha Paudwal, Mohammed Aziz

212 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
आकार:
कंट्रास्ट:

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

🎬 आई रे होली आई – आवाज दे कहाँ है

(Aayi Re Holi Aayi) – Bollywood Holi Song

गीतकार: हसन कमाल ॥

🎬 गीत विवरण

🎥 फिल्म: आवाज दे कहाँ है (1990)
🎤 गायक: अनुराधा पौडवाल, मोहम्मद अज़ीज़
✍️ गीतकार: हसन कमाल
🎶 संगीतकार: नौशाद अली
🎭 कलाकार: अविनाश वाढवन, शिखा स्वरूप, अन्नू कपूर
🏷️ श्रेणी: होली गीत, फिल्मी गीत

📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

होली हैं होली
बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

॥ अंतरा १ ॥

आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

॥ अंतरा २ ॥

ऐसी पिया कस के मोहे
अमरी हैं पिचकरी
ऐसी पिया कस के मोहे
अमरी हैं पिचकरी
कपा मोरा गोरा बदन
भीगी मोरी सारी
कपा मोरा गोरा बदन
भीगी मोरी सारी

॥ अंतरा ३ ॥

रूपा सैलोना तोरा गोरी
मन मोरा ललचाये
रूपा सैलोना तोरा गोरी
मन मोरा ललचाये
हल्के तोरा गोरा बदन
बिजली चमक जाये
बिजली चमक जाये

आयी रे होली आयी
आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

॥ अंतरा ४ ॥

लगे मोहे आके गली
होली के बहने
लगे मोहे आके गली
होली के बहने
आग छुए रंग भरे
बात नहीं मने

॥ अंतरा ५ ॥

रंग रंगीला दिन रसीला
कहे तू सरमाये
रंग रंगीला दिन रसीला
कहे तू सरमाये
मन की उमंग आज जरा
कुछ तो निकल जाये
कुछ तो निकल जाये

बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आ में सजना के रंग मैं
तन अपना भी रंग लायी
आयी रे होली आयी
बरसा गुलाल आज
घटा रंग भारी छाई
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी
आयी रे होली आयी

🎵 फिल्म: आवाज दे कहाँ है (1990) | संगीत: नौशाद अली | गीत: हसन कमाल | गायक: अनुराधा पौडवाल, मोहम्मद अज़ीज़

🎭 गीत का अर्थ और भावार्थ

"आयी रे होली आयी, बरसा गुलाल आज, घटा रंग भारी छाई" – होली आ गई है, आज गुलाल बरस रहा है और रंगों की घटा (बादल) छाई हुई है। यह होली के आगमन का उत्सव है।

"आ में सजना के रंग मैं, तन अपना भी रंग लायी" – नायिका कहती है कि मैं अपने सजना (प्रेमी) के रंग में आकर अपने तन को भी रंग लाई हूँ। यह प्रेम और होली के रंगों के मेल को दर्शाता है।

"ऐसी पिया कस के मोहे अमरी हैं पिचकरी" – प्रीतम ने ऐसी जोर से पिचकारी मारी कि मेरा गोरा बदन काँप गया और मेरी साड़ी भीग गई। यह श्रृंगारिक भाव है।

"रूपा सैलोना तोरा गोरी, मन मोरा ललचाये" – हे गोरी, तुम्हारा सुंदर रूप देखकर मेरा मन ललचा जाता है। तुम्हारा हल्का सा गोरा बदन ऐसे चमकता है जैसे बिजली कौंधे।

"लगे मोहे आके गली होली के बहने" – होली की बहारें (झोंके) मुझे गली में आकर लग रही हैं। आग छूए रंग भरे हैं, बात नहीं मानते।

"रंग रंगीला दिन रसीला, कहे तू सरमाये" – यह रंगों भरा दिन रसीला है, लेकिन तू कहकर शर्मा जाती है। मन की उमंग आज कुछ तो निकल जाए।

यह गीत होली के उत्सव और प्रेम के श्रृंगारिक भावों को एक साथ व्यक्त करता है। अनुराधा पौडवाल और मोहम्मद अज़ीज़ की आवाज़ में यह गीत होली की यादों में आज भी बसा हुआ है।

🎬 फिल्म आवाज दे कहाँ है और यह गीत

आवाज दे कहाँ है 1990 में आई फिल्म थी, जिसमें अविनाश वाढवन, शिखा स्वरूप और अन्नू कपूर ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं। फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद अली ने दिया था, जो मुगल-ए-आज़म जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।

होली गीत "आयी रे होली आयी" इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत है। अनुराधा पौडवाल और मोहम्मद अज़ीज़ की जोड़ी ने इस गीत को बेहद उत्साह और श्रृंगारिकता से भर दिया है।

इस गीत की भाषा ब्रज और अवधी के मिश्रण में है, जैसे "मोहे", "पिया कस के", "अमरी हैं पिचकरी", "कपा मोरा गोरा बदन" – ये सभी शब्द गीत को एक ग्रामीण और पारंपरिक होली का स्वाद देते हैं।

🔍 गीत का विशेष महत्त्व

🎨 होली का उत्सव

यह गीत होली के उत्सव को पूरी तरह से जीवंत कर देता है। गुलाल बरसना, रंगों की घटा छाना, पिचकारियाँ चलना – सब कुछ इस गीत में समाया है।

💞 प्रेम का श्रृंगार

गीत में प्रेमी-प्रेमिका के बीच होली के रंगों में श्रृंगारिक भाव बड़ी खूबसूरती से उकेरे गए हैं। "रूपा सैलोना", "मन ललचाये", "बिजली चमक जाये" जैसे शब्द इसी भाव को दर्शाते हैं।

🎯 संदेश : होली का यह गीत हमें सिखाता है कि होली सिर्फ रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि प्रेम और उत्साह का भी त्यौहार है। रंगों के साथ-साथ दिल भी रंग जाते हैं, और यही होली की सच्ची मिठास है।

॥ आयी रे होली आयी ॥
॥ बरसा गुलाल आज, घटा रंग भारी छाई ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "आई रे होली आई – आवाज दे कहाँ है (Aayi Re Holi Aayi) | Anuradha Paudwal, Mohammed Aziz" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

श्रेणियां: Holi Geet

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!