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मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन – मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद (Hanuman: The Auspicious One Worshipped by All Gods and Sages)

234 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 मंगलमूर्ति मारुति नंदन

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें।

सकल अमंगल मूल निकंदन

मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद॥

हनुमान जी – जिन्हें स्वयं देवता और ऋषि-मुनि स्मरण करते हैं

🌟 हनुमान जी – सर्वमंगलकारी, सर्वदेववंदित

“मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन।
मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद॥”

इस श्लोक में हनुमान जी की अद्भुत महिमा का वर्णन है। वे स्वयं मंगल (कल्याण) के मूर्तिमान स्वरूप हैं और पवनदेव के पुत्र होने के कारण “मारुति नंदन” कहलाते हैं। वे सभी प्रकार के अमंगल, दुःख, संकट, रोग, शोक और बाधाओं को जड़ से समाप्त करने वाले हैं।

इतना ही नहीं, माता-पिता, गुरु, गणपति, माँ सरस्वती (शारदा), भगवान शिव-पार्वती (शिवा समेत शंभु), शुकदेव और नारद जैसे महान देवता और ऋषि भी हनुमान जी का स्मरण करते हैं। उनकी यह सार्वभौमिक पूज्यता दर्शाती है कि हनुमान जी केवल एक देवता नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के आराध्य हैं।

📖 श्लोक का भावार्थ – हनुमान जी की सार्वभौमिक पूज्यता

🔹 प्रथम पंक्ति

मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन
→ हनुमान जी कल्याण के स्वरूप और पवनपुत्र हैं। वे समस्त अशुभता, दुःख, संकट, भय, रोग, ऋण आदि का जड़ से नाश करने वाले हैं।

🔹 द्वितीय पंक्ति

मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद
→ माता-पिता, गुरु, गणपति (गणेश जी), शारदा (सरस्वती माता), शिवा (पार्वती) सहित शंभु (शिव), शुकदेव और नारद – ये सभी महान देवता और ऋषि भी हनुमान जी का स्मरण करते हैं।

✨ महत्व: यह श्लोक हमें बताता है कि हनुमान जी की महिमा इतनी अपार है कि स्वयं देवता, ऋषि-मुनि और गुरुजन उनकी आराधना करते हैं। यदि वे हनुमान जी का स्मरण करते हैं, तो हम सामान्य मनुष्यों के लिए तो यह और भी अधिक आवश्यक एवं लाभकारी है।

🔬 आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि: क्यों हनुमान जी सर्वपूज्य हैं

🧘 आध्यात्मिक कारण

  • प्राण ऊर्जा के स्वामी: हनुमान जी पवनपुत्र हैं – प्राण (वायु) ही समस्त चेतना का आधार है। इसलिए सभी देवता उनका सम्मान करते हैं।
  • राम-भक्ति का शिखर: भगवान राम के परम भक्त होने के कारण वे सभी देवताओं में विशेष स्थान रखते हैं।
  • अष्ट सिद्धि, नव निधि के दाता: हनुमान जी को अष्टसिद्धियों और नवनिधियों का स्वामी माना जाता है, जिससे देवता भी उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  • संकटमोचन: जब देवताओं पर भी संकट आते हैं, तो वे हनुमान जी की शरण लेते हैं।

⚛️ वैज्ञानिक दृष्टि

  • मंत्रों का ध्वनि प्रभाव: हनुमान मंत्र (ॐ हनुमते नमः) की आवृत्तियाँ मस्तिष्क की थीटा तरंगों को सक्रिय कर भय, तनाव समाप्त करती हैं।
  • साहस और आत्मविश्वास: हनुमान जी की उपासना से कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) घटता है और सेरोटोनिन बढ़ता है।
  • सामूहिक चेतना: हनुमान जी की पूजा सदियों से की जा रही है – यह सामूहिक विश्वास स्वयं में एक शक्तिशाली उपचार ऊर्जा उत्पन्न करता है।

📜 पौराणिक आधार: जब देवताओं ने हनुमान जी का स्मरण किया

1. माता-पिता (मातु पिता): माता अंजनी और पिता केसरी ने स्वयं हनुमान जी को पुत्र रूप में प्राप्त कर उनकी महिमा का गान किया।

2. गुरु: सूर्यदेव (हनुमान जी के गुरु) ने उन्हें विद्या दान दी और स्वयं उनके शिष्य बनकर गर्वित हुए।

3. गणपति: गणेश जी और हनुमान जी दोनों ही बुद्धि, विघ्ननाशक के प्रतीक हैं। कई ग्रंथों में दोनों की एकता का वर्णन है।

4. शारदा (सरस्वती): माँ सरस्वती ने हनुमान जी को वाणी और विद्या का वरदान दिया।

5. शिवा समेत शंभु (शिव-पार्वती): हनुमान जी शिव के अवतार (रुद्रावतार) माने जाते हैं। शिव-पार्वती सदा उनकी रक्षा करते हैं और उनकी भक्ति में लीन रहते हैं।

6. शुकदेव और नारद: महान ऋषि शुकदेव और नारद हनुमान जी के परम उपासक हैं। नारद जी ने हनुमान जी की स्तुति में अनेक स्तोत्र रचे हैं।

🕉️

सर्वदेव नमस्कृत
हनुमान जी को सभी देवता नमन करते हैं

“ये सभी देवता और ऋषि-मुनि जिनका स्मरण करते हैं, उन हनुमान जी की कृपा से ही सभी का कल्याण होता है।”

🙏 हनुमान जी की पूजा विधि – जैसा देव-ऋषि करते हैं

1

शुद्धि एवं आसन

मंगलवार या शनिवार को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल या केसरिया वस्त्र शुभ माने जाते हैं। लाल आसन पर बैठें।

2

प्रार्थना एवं संकल्प

“मैं हनुमान जी की पूजा कर रहा हूँ, जिन्हें माता-पिता, गुरु, गणपति, सरस्वती, शिव-पार्वती, शुकदेव और नारद स्मरण करते हैं। मेरे जीवन के सभी अमंगल नष्ट हों।”

3

अर्घ्य एवं मंत्र जाप

लाल चंदन, सिंदूर, फूल, लड्डू अर्पित करें। ॐ हनुमते नमः का 108 बार जाप करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें।

4

विशेष मंत्र

“मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन। मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद॥” – इस श्लोक का 11 या 21 बार उच्चारण करें।

5

आरती एवं क्षमा

हनुमान आरती करें, फिर क्षमा प्रार्थना करें। भोग (चना, गुड़, मूंगफली) वितरित करें।

📌 ध्यान दें: जिन देव-ऋषियों का इस श्लोक में उल्लेख है, उनका भी स्मरण करते हुए हनुमान जी की उपासना करने से अद्भुत फल की प्राप्ति होती है।

✨ हनुमान जी की उपासना के अद्भुत लाभ

  • ✅ सभी प्रकार के अमंगल (दुःख, भय, रोग, ऋण, शत्रु) का नाश
  • ✅ शारीरिक और मानसिक बल की वृद्धि
  • ✅ मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों से मुक्ति
  • ✅ ग्रह बाधाओं एवं नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
  • ✅ आत्मविश्वास, साहस, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति
  • ✅ कार्यों में सफलता, विवाद समाप्ति
  • ✅ आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति
  • ✅ देव-ऋषियों का आशीर्वाद – जैसा श्लोक में वर्णित है

❓ आत्मचिंतन: हनुमान जी की शिक्षाएँ

हनुमान जी का जीवन और यह श्लोक हमें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है:

  • 🔸 क्या मैं अपने माता-पिता, गुरुजनों का सम्मान करता हूँ?
  • 🔸 क्या मुझमें साहस, सेवा और भक्ति का भाव है?
  • 🔸 क्या मैं अपने जीवन के अमंगल (बुरी आदतें, नकारात्मकता) को समाप्त कर रहा हूँ?
  • 🔸 क्या मैं उन देवताओं और ऋषियों के गुणों को अपना रहा हूँ जो हनुमान जी का स्मरण करते हैं?

हनुमान जी की उपासना से हम भी उन देव-ऋषियों के समान पूज्य, शक्तिशाली और मंगलमय बन सकते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: “मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद” का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है – माता, पिता, गुरु, गणेश जी, सरस्वती माता, शिव-पार्वती, शुकदेव और नारद – ये सभी हनुमान जी का स्मरण करते हैं। अर्थात हनुमान जी इतने महान हैं कि स्वयं देवता और ऋषि-मुनि उनकी आराधना करते हैं।

प्रश्न 2: क्या हनुमान जी की उपासना से माता-पिता, गुरु आदि का आशीर्वाद मिलता है?

उत्तर: हाँ, इस श्लोक के अनुसार जब स्वयं माता-पिता, गुरु, गणपति आदि हनुमान जी का स्मरण करते हैं, तो उनकी उपासना से उन सभी का आशीर्वाद स्वतः प्राप्त होता है।

प्रश्न 3: क्या महिलाएं हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?

उत्तर: बिल्कुल। हनुमान जी सभी के लिए सुलभ हैं। मासिक धर्म के दौरान कुछ परंपराओं में मंदिर जाने से बचने का विधान है, लेकिन मानसिक जप और घर पर पूजा हमेशा कर सकते हैं।

प्रश्न 4: इस श्लोक का जाप कैसे करें?

उत्तर: प्रतिदिन सुबह-शाम, विशेषकर मंगलवार या शनिवार को, हनुमान जी की प्रतिमा के सामने 11, 21 या 108 बार इस श्लोक का जाप करें। इससे सभी अमंगल दूर होते हैं और जीवन में मंगल आता है।

📝 सारांश: हनुमान जी – सर्वदेव नमस्कृत, सर्वामंगल नाशक

हनुमान जी केवल एक देवता नहीं, बल्कि साहस, भक्ति, सेवा और अमंगल नाशक ऊर्जा के प्रतीक हैं। “मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन” यह बताता है कि वे सभी अशुभता का नाश करने वाले हैं। दूसरी पंक्ति “मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद” यह प्रमाणित करती है कि स्वयं देवता और ऋषि-मुनि उनकी आराधना करते हैं।

यदि हम सच्चे मन से हनुमान जी की शरण में जाएँ, तो हमें भी उन सभी देव-ऋषियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जो उनका स्मरण करते हैं। इस कलियुग में हनुमान जी ही सबसे सुलभ और शक्तिशाली आराध्य हैं।

🙏 ॐ हनुमते नमः 🙏
जय श्री राम, जय बजरंगबली

🚩 मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन 🚩
मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद
हनुमान जी की कृपा से हो सबका कल्याण

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "मंगलमूर्ति मारुति नंदन, सकल अमंगल मूल निकंदन – मातु पिता गुरु गणपति शारद, शिवा समेत शंभु शुक नारद (Hanuman: The Auspicious One Worshipped by All Gods and Sages)" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।

शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता है, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?

शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?

सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?

हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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