🐘 भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026

आज व्रत-पूजा विधि, समय और गणेश मंत्र

भगवान गणेश को समर्पित विशेष व्रत

🙏 संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है। जब यह चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

वर्ष 2026 में यह विशेष संयोग आज बना है। आइए जानते हैं व्रत की विधि, शुभ मुहूर्त, और भगवान गणेश के प्रभावशाली मंत्र।

📅 भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026 – तिथि एवं समय

पंचांग के अनुसार, 2026 में भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का पर्व मंगलवार, 3 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। व्रत से जुड़े प्रमुख समय इस प्रकार हैं:

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 3 मार्च, प्रातः 07:42 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 4 मार्च, प्रातः 08:15 बजे
  • चंद्रोदय समय (व्रत पारण): रात्रि 08:27 बजे (चंद्रमा दर्शन के बाद व्रत तोड़ा जाता है)
  • संकष्टी पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 06:30 बजे से रात 08:00 बजे तक
⚠️ ध्यान दें: यह समय दिल्ली के अनुसार है। अपने शहर के स्थानीय समय के लिए पंचांग अवश्य देखें।
📆

मंगलवार
3 मार्च 2026

📝 भालचंद्र संकष्टी व्रत विधि (Puja Vidhi)

1

प्रातः स्नान और संकल्प

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें: 'आज मैं भालचंद्र संकष्टी का व्रत करूंगा, जो मेरे सभी कष्टों का नाश करेगा।'

2

गणेश मूर्ति स्थापना

पूजा स्थान पर लाल या पीले वस्त्र बिछाएं। भगवान गणेश की मिट्टी या धातु की प्रतिमा स्थापित करें। गणेश जी को रोली, चंदन, अक्षत, फूल, दूर्वा (दूब) अर्पित करें।

3

षोडशोपचार पूजा

16 उपचारों से पूजा करें – आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, नीराजन, मंत्रपुष्पांजलि।

4

व्रत कथा का पाठ

संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद गणेश जी की आरती करें।

5

चंद्रमा को अर्घ्य (पारण)

रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। फिर भोजन ग्रहण करें (व्रत पारण करें)।

🔱 प्रमुख गणेश मंत्र (Ganesh Mantra)

संकष्टी चतुर्थी के दिन निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

ॐ गणाधिपाय नमः।

(Om Ganadhipaya Namah) – 108 बार जाप करें।

ॐ गं गणपतये नमः।

(Om Gam Ganapataye Namah) – गणेश जी का मूल मंत्र।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

(Vakratunda Mahakaya Mantra) – विघ्न निवारण के लिए।

ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥

(Ganesh Gayatri Mantra) – बुद्धि और विवेक के लिए।

ॐ श्री गणेशाय नमः।

(Om Shri Ganeshaya Namah) – सरल और सार्वभौमिक मंत्र।

सिद्धि-बुद्धि सहिताय नमः।

(Siddhi-Buddhi Sahitaya Namah) – सिद्धि-बुद्धि प्रदाता।

📖 संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Vrat Katha)

प्राचीन काल में एक राजा थे – हरिश्चंद्र। उनके कोई संतान नहीं थी। एक दिन राजा ने संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया और भगवान गणेश की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।

एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने अपने भाल (मस्तक) पर चंद्रमा धारण किया था। इसी कारण इस व्रत को भालचंद्र संकष्टी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से चंद्र से संबंधित दोष समाप्त होते हैं और मन को शांति मिलती है।

पूजा के समय कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। पूरी कथा के लिए किसी ग्रंथ या पंडित से सहायता लें।

✨ भालचंद्र संकष्टी व्रत के लाभ

  • सभी प्रकार के संकटों का नाश होता है।
  • ग्रह-नक्षत्र दोष शांत होते हैं, विशेषकर चंद्र दोष।
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • बुद्धि, विवेक और ज्ञान में वृद्धि होती है।
  • धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
  • कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

🌙 भालचंद्र का अर्थ और चंद्र पूजा

'भाल' का अर्थ है मस्तक और 'चंद्र' का अर्थ है चंद्रमा। भगवान गणेश अपने मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं, इसलिए उन्हें 'भालचंद्र' भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। चंद्रमा मन के कारक हैं। इस व्रत से मन स्थिर और शांत होता है।

जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष हो या मानसिक अशांति हो, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी है।

🍬 भोग और प्रसाद (Offerings)

भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय हैं। इस दिन मोदक, लड्डू, दूर्वा, केले का भोग लगाएं। भोग में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।

नैवेद्य मंत्र: 'ॐ गणेशाय नमः। एतानि मोदकानि समर्पयामि।'

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या संकष्टी चतुर्थी का व्रत निर्जल रखा जाता है?

उत्तर: अधिकतर भक्त निर्जल व्रत रखते हैं, लेकिन यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे तो फलाहार ले सकते हैं। व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद ही करें।

प्रश्न 2: क्या महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

उत्तर: हां, कोई भी स्त्री या पुरुष यह व्रत रख सकता है। विशेषकर संतान की कामना से महिलाएं यह व्रत करती हैं।

प्रश्न 3: अगर चंद्रोदय न दिखे तो क्या करें?

उत्तर: यदि बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई न दे, तो निर्धारित समय पर अर्घ्य देकर व्रत खोल सकते हैं।

प्रश्न 4: क्या बिना गणेश मूर्ति के पूजा हो सकती है?

उत्तर: मूर्ति उपलब्ध न होने पर गणेश जी की तस्वीर पर भी पूजा कर सकते हैं। भावना सबसे महत्वपूर्ण है।

🌟 निष्कर्ष

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026 का यह पावन अवसर हमारे जीवन के सभी संकटों को हरने वाला है। विधिपूर्वक व्रत और पूजा करके हम भगवान गणेश की कृपा के पात्र बन सकते हैं। गणपति बप्पा मोरया!

🙏 ॐ गं गणपतये नमः। ॐ शांति शांति शांति।।

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व्रत-पूजा विधि, समय और गणेश मंत्र