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श्री नवग्रह आरती(Shir Navgrah Aarati in Hindi) - Bhaktilok

74 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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नवग्रह आरती: सभी ग्रहों की कृपा का महापाठ

नवग्रह आरती से सभी ग्रहों की कृपा प्राप्त करें, यह भक्ति आपके जीवन को सुखमय बनाएगी।

श्री नवग्रह आरती: ॐ जय आदित्य, जय चन्द्रमा, जय मंगल, जय बुध, जय गुरु, जय शुक्र, जय शनि, जय राहु, जय केतु। श्री नवग्रह देवा की आरती, भक्त गाते सदा, बोलो सब मिलकर, जय नवग्रह, जय माता! तेरे चरणों में है भक्ति, मन में है प्रेम सदा, शांति की तू है दाता, हर संकट दूर करे। तेरा लघु नाम लेके, मन को शांति लाए, धन-धान्य, सुख-समृद्धि, भक्त को दें जीवन। श्री नवग्रह देवा की आरती, भक्त गाते सदा, बोलो सब मिलकर, जय नवग्रह, जय माता! जय सूर्य मन्दिर के, जय चन्द्रमा के, जय मंगल स्वामी, सदा सुख देने वाले। तेरी कृपा से हो, हर मनोकामना पूरी, तेरे चरणों में सज़ा, मेरा हर दिन बहार।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री नवग्रह आरती का मुख्य विषय सभी नवग्रहों की महिमा और उन्हें ध्यान में रखते हुए कृपा प्राप्त करने का प्रयास है। इस आरती में आदित्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु का अभिवादन किया जाता है। प्रत्येक ग्रह का एक विशेष स्थान और महत्व है, जो मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। आरती के अंतर्गत जो भावनाएँ व्यक्त की गई हैं, वे भक्तों के अंतर्मन की गहराइयों से प्रेरित होती हैं। उदाहरण स्वरूप, 'तेरे चरणों में है भक्ति, मन में है प्रेम सदा' जैसी पंक्तियाँ भावानुवादित करती हैं कि भक्त अपने इष्ट देवताओं के प्रति अपनी भावनाओं और श्रद्धा को आदर पूर्वक अर्पित करता है। इस प्रकार, यह आरती एक साधक के लगी पूरे नवग्रहों की ऊर्जा को समाहित करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह आरती एक सकारात्मक दृष्टिकोण की निरंतरता को दर्शाती है, जिसमें भक्त अपने सभी ग्रहों की कृपा का स्पर्श पाने का प्रयास करता है। आरती में 'धन-धान्य, सुख-समृद्धि' की अपेक्षा उन सभी भक्तों के लिए है जो जीवन में विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह उन आशाओं को भी जीवित रखती है, जो हमें संतुष्टि और समृद्धि की ओर ले जाती हैं। यहाँ तक कि 'तेरे चरणों में सज़ा, मेरा हर दिन बहार' का संदर्भ दर्शाता है कि ज्ञान और समृद्धि के साथ जीवन को कैसे सजाया जा सकता है। यह आरती सच्चे प्रेम और भक्ति के साथ गाई जाती है, जिससे समस्त ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है और मन के भीतर शांति का संचार होता है।

इस आरती का तात्त्विक पहलू यह दर्शाता है कि भक्ति मार्ग में ग्रहों का प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। भारतीय दर्शन के अनुसार, ग्रहों की स्थिति हमारे जीवन पर अदृश्य प्रभाव डालती है। भक्त इस आरती के माध्यम से नवग्रहों की कृपा से अपने जीवन में संतुलन और शांति बनाने का प्रयास करता है। 'जय नवग्रह, जय माता!' के उद्घोष से भक्त समुदाय में एकता और समर्पण की भावना का संचार होता है। इस प्रकार, नवग्रह आरती सिर्फ एक भक्ति का पाठ नहीं है, बल्कि यह जीवन के विभिन्न पक्षों को सहेजने, समझने और उन्हें अपने अनुकूल बनाने का माध्यम भी है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

नवग्रह आरती का धार्मिक और पौराणिक संदर्भ बहुत गहरा है। पुराणों में नवग्रहों का महत्व स्पष्टतः वर्णित है, जैसे कि स्कंद पुराण और भागवत पुराण में। यह माना जाता है कि नवग्रहों की उपासना से जीवन के कई संकटों से मुक्ति मिलती है। महाभारत में भी ग्रहों के विभिन्न प्रभावों का वर्णन मिलता है, और यहाँ तक कि कुंडली का अध्ययन भी ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है। शास्त्रों के अनुसार, विभिन्न ग्रहों से संबंधित मौसमी प्रभाव भी जीवन पर गहरा असर डालते हैं। इसलिए इस आरती के माध्यम से भक्तों द्वारा ग्रहों की उपासना करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। नवग्रह आरती का जाप मानसिक शांति, आत्मिक संतोष, और सभी ग्रहों की कृपा को आकर्षित करने में सहायक होता है। नियमित रूप से इस आरती का पाठ करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। यह भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से दूर रखने के साथ-साथ सकारात्मकता और विश्वास का संचार करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस आरती का पाठ सुबह के समय करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पूजा के दौरान एक दीप जलाना और नवग्रहों के प्रतीकों का ध्यान करते हुए श्रद्धा पूर्वक ध्यान लगाना चाहिए। भक्त को मानसिक शांति और एकाग्रता के साथ इस आरती का पाठ करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नवग्रह आरती का महत्व क्या है?

नवग्रह आरती का महत्व सभी ग्रहों की कृपा को प्राप्त करने में है। यह आरती हमारे जीवन से नकारात्मकता को दूर करके सकारात्मकता और संतुलन लाने में मदद करती है।

कब और कैसे नवग्रह आरती का जाप करना चाहिए?

नवग्रह आरती का जाप सुबह के समय करना चाहिए। पूजा में दीप जलाकर और नवग्रहों की मूर्तियों का ध्यान करके श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए।

क्या यह आरती सभी के लिए लाभदायक है?

जी हाँ, नवग्रह आरती सभी के लिए लाभकारी है। यह ग्रहों की कृपा का मार्ग प्रशस्त करती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने में सहायक होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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