आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
Shri Shani Dev Arati

आरती गजबदन विनायक की लिरिक्स (Aarti Gajavadan Vinayak Ki Lyrics in Hindi) - Ganesh Chaturthi Aarti Varsha Srivsatava - Bhaktilok

80 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

गणेश आरती: संकटों का नाशक गाजेवन मुँद्रिका

गणेश की आरती गजबदन, सुख-समृद्धि और विघ्न नाश की प्रार्थना करता अद्भुत भजन है।

आरती गजबदन विनायक की लिरिक्स (Aarti Gajavadan Vinayak Ki Lyrics in Hindi) - आरती गजबदन विनायककी। सुर-मुनि-पूजित गणनायककी॥आरती गजबदन विनायककी॥एकदन्त शशिभाल गजानन विघ्नविनाशक शुभगुण कानन। शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन दुःखविनाशक सुखदायक की॥आरती गजबदन विनायककी॥ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति। अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति विद्या-विनय-विभव-दायककी॥आरती गजबदन विनायककी॥पिङ्गलनयन विशाल शुण्डधर धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर। लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर सुर-वन्दित सब विधि लायककी॥आरती गजबदन विनायककी॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आरती गजबदन विनायक की प्रार्थना में, भगवान गणेश की महिमा का उल्लेख किया गया है। 'गजबदन' शब्द का अर्थ है, वह जिससे आपदा दूर होती है। इस आरती में गणेश जी को सर्वप्रथम नमन किया गया है, जिनकी पूजा साधकों द्वारा की जाती है। गणेश जी को 'एकदन्त' कहा गया है, जो उनकी विशेषता है, और उन्हें 'गजानन' कहा गया है, मतलब हाथी के सिर वाला। इस प्रकार, यह आरती उनकी शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है। हमारे दुःखों का नाश करने और सुख प्रदान करने के लिए शिवसुत का भी वर्णन किया गया है। आरती में 'विघ्नविनाशक' और 'सुखदायक' जैसे शब्द उनकी चरित्र विशेषताओं को दर्शाते हैं, जिससे भक्तों को विश्वास होता है कि गणेश जी संकटमोचक हैं।

गणेश जी की आरती में प्रस्तुत गुणों का भावार्थ यह है कि वे केवल विघ्न नाशक नहीं, अपितु भक्तजनों को बुद्धि, विवेक और समृद्धि का भी दान करते हैं। 'ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी' जैसा विशेषण उनकी अलौकिक शक्तियों को दर्शाता है। यह विश्वास दिलाता है कि यदि हम सच्चे मन से गणेश जी की आराधना करें, तो हमें भी ये विशेषताएं प्राप्त होंगी। यहाँ 'विमल बुद्धि' से तात्पर्य है कि गणेश जी हमारी बुद्धि को शुद्ध करते हैं। इस आरती में विनय और विद्या के दायक रूप को वर्णित किया गया है, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा और विनम्रता का मार्ग ही उत्तम है।

इस आरती में 'लम्बोदर' नाम से जनति है कि भगवान गणेश के मध्य भाग में विशालता है, जो हमें यह सिखाता है कि हमें आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार की रुचियों को संतुलित रखना चाहिए। 'धूम्रवर्ण' और 'वज्रांकुश-कर' शब्द उनके तेजस्विता और शक्ति का प्रतीक है। यह आरती भक्तों को भक्ति मार्ग पर चलने का संकेत देती है, जहाँ प्रेम और श्रद्धा से उनके प्रति समर्पण किया जाता है। भक्ति मार्ग में लगता है कि गणेश जी हमें हर बाधा से पार लगाने के लिए हमेशा हमारे साथ हैं और कालांतर से उनकी आराधना का महत्व सर्वोपरि है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश जी की पूजा का आधार 'गणेश पुराण' और 'श्रीमत भागवत' में मिलता है, जहाँ गणेश जी को प्रथम पूजनीय माना गया है। गणेश चतुर्थी पर उनकी आरती का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन उनकी उत्पत्ति का प्रतीक है। पुराणों में उल्लेख है कि गणेश जी ने पहले ही बाधाओं का सामना कर उनकी शक्ति और महिमा का परिचय दिया था। संकटनाशक होने के नाते, भक्त उन्हें विभिन्न समस्याओं के निवारण हेतु पुकारते हैं, विशेष रूप से नए कार्यों की शुरुआत में। इस प्रकार, उनकी आरती एक शुभ संदेश लेकर आती है, जो हर भक्त के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। आरती गजबदन विनायक की प्रतिदिन सुनने से मानसिक शांति, ऊर्जा और सकारात्मकता में वृद्धि होती है। इससे मन की चंचलता कम होती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है। भक्तों को यह आरती सुनने और गाने से संतान सुख, आर्थिक समृद्धि, और सामाजिक प्रतिष्ठा में सुधार की भी अनुभूति होती है। जब संपूर्ण श्रद्धा से आरती की जाती है, तब भगवान गणेश की कृपा से कठिनाईयां दूर होने लगती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

आरती गजबदन विनायक की सुबह या शाम के समय करनी चाहिए, जब मन शांत हो। इस आरती के दौरान एक तेल का दीपक जलाएं और गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने रखें। शुद्ध मानसिकता से आरती का पाठ करना चाहिए। मंत्रोच्चारण करते समय श्रद्धा और प्रेम से मन में भाव निहित करना आवश्यक है, जिससे भगवान की कृपा प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

आरती गजबदन विनायक का महत्व क्या है?

आरती गजबदन विनायक का महत्व यह है कि यह भक्तों को विघ्नों और बाधाओं से मुक्त करने के लिए गणपति की कृपा प्राप्त करने का साधन है। यह आरती विशेषकर गणेश चतुर्थी जैसे पर्व पर गाई जाती है।

आरती गजबदन विनायक कब पढ़ना चाहिए?

आरती गजबदन विनायक को सुबह और शाम के समय श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। यह उचित समय है जब मन शांत हो और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त हो सके।

आरती गजबदन विनायक को गाने से क्या लाभ होता है?

इस आरती को गाने से मानसिक शांति, सकारात्मकता, और आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह भक्तों को उचित दिशा में प्रेरित करती है और उन्हें कठिनाइयों से उबरने में मदद करती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!