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Jyeshtha Adhika Purnima 2026: अधिक मास की पूर्णिमा (31 May Sunday) | सत्यनारायण व्रत एवं स्नान दान

अधिक ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा - पूर्णिमा व्रत, सत्यनारायण पूजा एवं पवित्र स्नान का विशेष दिन | Full Moon in Adhik Jyeshtha month, ideal for Satyanarayan Puja and holy baths.

३१ मई २०२६, रविवार तिथि व दिनांक
Hindu धार्मिक श्रेणी
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९ मिनट पठन अवधि
महत्वपूर्ण सारांश: अधिक ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा - पूर्णिमा व्रत, सत्यनारायण पूजा एवं पवित्र स्नान का विशेष दिन | Full Moon in Adhik Jyeshtha month, ideal for Satyanarayan Puja and holy baths.
पावन पर्व तिथि एवं समय निर्धारण
प्रारंभ / मुख्य तिथि: ३१ मई २०२६, रविवार
विशेष उत्सव क्षेत्र: India

Jyeshtha Adhika Purnima 2026: अधिक मास की पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग और सत्यनारायण व्रत का महत्व (31 मई, रविवार)

हिंदू पंचांग में अधिक मास (मल मास) का विशेष महत्व होता है। यह वह अतिरिक्त महीना होता है जो हर 32 या 33 महीने में एक बार सौर और चंद्र वर्ष के संतुलन के लिए आता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास अधिक मास होगा। इसी अधिक ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा रविवार, 31 मई 2026 को पड़ रही है। यह दिन अत्यंत पुण्यदायी है क्योंकि अधिक मास में की गई पूजा, दान और स्नान का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा और पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

🌕 अधिक मास पूर्णिमा का आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि यह स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, अधिक मास का स्वामी भगवान विष्णु हैं और इस महीने में कोई भी सामान्य सांसारिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन वर्जित होते हैं, किंतु धार्मिक अनुष्ठान, दान, जप और स्नान का अनंत पुण्य मिलता है।

ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है और ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहता है। ज्येष्ठा नक्षत्र को वैभव और शक्ति का नक्षत्र माना जाता है। इस दिन पूर्णिमा व्रत रखने और सत्यनारायण भगवान की पूजा करने से घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

📅 ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026: तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Date & Auspicious Timings)
  • पर्व का नाम: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा (Jyeshtha Adhika Purnima)
  • तारीख (Date): 31 मई 2026, रविवार
  • पूर्णिमा तिथि आरंभ: 30 मई 2026, रात्रि 09:18 बजे से
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 मई 2026, रात्रि 11:05 बजे तक
  • चन्द्रोदय समय (Moonrise Time): सायं 06:45 बजे (लगभग)
  • स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: प्रातः 05:30 से 08:15 तक (प्रातः काल)
  • सत्यनारायण पूजा का शुभ समय: सायं 06:15 से 08:30 तक (प्रदोष काल)
✨ विशेष संयोग: 31 मई 2026 को पूर्णिमा के दिन रवि पुष्य योग जैसा शुभ संयोग बन रहा है क्योंकि चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होंगे और रविवार का दिन होने से भगवान विष्णु और सूर्य दोनों की कृपा प्राप्त होगी।

🛕 सत्यनारायण व्रत एवं पूजा विधि (Satyanarayan Puja Vidhi)

अधिक मास की पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन व्रत रखकर कथा सुनने और सुनाने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। पूजा की सरल विधि इस प्रकार है:

  1. व्रत संकल्प: प्रातः स्नान करके सत्यनारायण व्रत का संकल्प लें। पीले वस्त्र धारण करें।
  2. चौकी स्थापना: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या सत्यनारायण जी का चित्र स्थापित करें।
  3. कलश स्थापना: चौकी के पास ही जल से भरा कलश स्थापित करें और उस पर नारियल रखें।
  4. षोडशोपचार पूजन: धूप, दीप, चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें।
  5. सत्यनारायण कथा: पूजा के बाद सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें। कथा के पांच अध्याय होते हैं।
  6. आरती एवं प्रसाद: अंत में कपूर या घी की आरती करें और पंचामृत तथा पंजीरी का प्रसाद वितरित करें।

📖 अधिक मास की पौराणिक कथा (The Story of Adhik Maas)

पौराणिक कथा के अनुसार, जब बारह महीनों का निर्धारण हुआ तो अधिक मास को किसी ने नहीं अपनाया। अपमानित महसूस कर अधिक मास भगवान विष्णु के पास गया और रोते हुए बोला कि मुझे कोई देवता नहीं मिला। तब भगवान विष्णु ने कहा कि आज से तुम मेरे नाम से जाने जाओगे और "पुरुषोत्तम मास" कहलाओगे। इस महीने में किए गए पुण्य कर्मों का फल मैं स्वयं दूंगा। इसलिए अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है।

सत्यनारायण कथा के अनुसार, जो भी भक्त इस पूर्णिमा पर विधि-विधान से पूजा करता है, उसकी दरिद्रता दूर होती है और उसे वैकुंठ की प्राप्ति होती है।

🛁 पूर्णिमा स्नान एवं दान का महत्व (Holy Bath and Charity)

अधिक मास की पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा या किसी भी पवित्र सरोवर में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान कर सकते हैं।

इस दिन दान का भी बहुत महत्व है। निम्नलिखित वस्तुओं का दान अवश्य करना चाहिए:

  • अन्न दान: गेहूं, चावल और गुड़ का दान करें।
  • वस्त्र दान: पीले या सफेद वस्त्र का दान शुभ होता है।
  • छत्र एवं पादुका दान: गर्मी के महीने में छाता और चप्पल दान करने से पुण्य मिलता है।
  • गौ सेवा: गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाएं।

🔭 ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 की ज्योतिषीय विशेषताएँ (Astrological Highlights)

31 मई 2026 को चंद्रमा वृश्चिक राशि में ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित होंगे। ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी बुध है और यह बल और अधिकार का प्रतीक है। साथ ही पूर्णिमा के दिन गुरु ग्रह की चंद्रमा पर दृष्टि होने से गजकेसरी योग का निर्माण होगा, जो धन और यश प्रदान करने वाला है।

यह पूर्णिमा वृषभ संक्रांति के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा है, इसलिए कृषि कार्यों और धन संबंधी निर्णयों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है। नए व्यवसाय की योजना बनाने और निवेश करने के लिए भी यह उत्तम समय है।

🗺️ भारत में क्षेत्रीय उत्सव (Regional Celebrations)

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा को पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है:

  • वृंदावन एवं मथुरा: यहां के मंदिरों में भगवान कृष्ण और विष्णु का विशेष श्रृंगार किया जाता है। यमुना स्नान का विशेष महत्व है।
  • ओडिशा: जगन्नाथ पुरी में इस दिन भगवान जगन्नाथ को विशेष भोग लगाया जाता है और चंदन यात्रा की तैयारियां शुरू होती हैं।
  • महाराष्ट्र: यहां इसे "ज्येष्ठ पौर्णिमा" कहा जाता है और वट सावित्री व्रत की तैयारी का दिन माना जाता है।
  • दक्षिण भारत: तमिलनाडु और केरल में इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है और मंदिरों में विशेष अभिषेक होते हैं।

🥗 प्रसाद एवं विशेष व्यंजन (Prasad and Special Dishes)

सत्यनारायण पूजा में पंजीरी, चूरमा और हलवा बनाने की परंपरा है। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित व्यंजन बनाए जाते हैं:

  • सत्यनारायण प्रसाद (पंजीरी): गेहूं का आटा, घी, शक्कर और मेवा मिलाकर बनाया जाता है।
  • पंचामृत: दूध, दही, शहद, शक्कर और घी का मिश्रण।
  • केले का भोग: भगवान को केला विशेष रूप से प्रिय है।
  • मीठा चावल या खीर: दक्षिण भारत में इसे प्रसाद के रूप में बनाते हैं।

💡 पूर्णिमा व्रत के लाभ और सुझाव (Benefits and Tips)

  1. मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए पूर्णिमा का व्रत अत्यंत लाभकारी है।
  2. जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, उन्हें इस दिन चांदी का दान करना चाहिए।
  3. रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर जल पीने से शरीर की शीतलता बनी रहती है।
  4. यदि पूर्ण उपवास न कर सकें तो फलाहार कर सकते हैं।
  5. इस दिन गरीबों को भोजन कराने से पितृ दोष का निवारण होता है।
नोट: यहां दिए गए सभी समय भारतीय मानक समय (IST) और सामान्य पंचांग गणना पर आधारित हैं। कृपया अपने स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय स्रोत से तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अवश्य कर लें।

🙏 ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

भगवान सत्यनारायण और भगवान विष्णु की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे। यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय! श्री सत्यनारायण भगवान की जय!

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु व सनातन पंचांग परंपराओं के संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा संकलित किया गया है।

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