तृतीया: चंद्रघंटा के दर्शन से मिटा भय—कथा | Tritiya: The Story of How Fear Was Removed by the Vision of Maa Chandraghanta

27 Mar 2026 99 पाठ ~9 मिनट पाठ ~1358 शब्द 🕉️ Chandraghanta
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🌙 तृतीया: चंद्रघंटा के दर्शन से मिटा भय – अद्भुत कथा

जब माँ के दर्शन ने भक्त के हृदय से भय को हमेशा के लिए निकाल दिया

🙏 नवरात्रि का तीसरा दिन – माँ चंद्रघंटा, शौर्य और शांति की देवी 🙏

🕉️ माँ चंद्रघंटा का स्वरूप एवं महत्व (Significance & Form)

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटे के आकार में सुशोभित है, इसलिए ये चंद्रघंटा कहलाती हैं। यह रूप अत्यंत शांत एवं सौम्य होते हुए भी युद्ध के लिए पूर्ण सज्ज है। माँ के दस हाथ हैं, जिनमें त्रिशूल, गदा, खड्ग, कमल, बाण, धनुष, जपमाला आदि हैं। वे सिंह पर सवार हैं। इनकी घंटा की ध्वनि से असुरों का नाश होता है और भक्तों के समस्त भय दूर हो जाते हैं। इस कथा में हम एक ऐसे भक्त की कहानी सुनेंगे, जिसका जीवन भय से ग्रसित था, और माँ चंद्रघंटा के दर्शन ने उसके समस्त भय को सदा के लिए मिटा दिया।

📜 चंद्रघंटा के दर्शन से मिटा भय – The Story of Fear’s Demise

प्राचीन काल में एक नगर में शंकर नाम का एक व्यापारी रहता था। वह बहुत ही साहसी और परिश्रमी था, परंतु पिछले कुछ वर्षों से उसके जीवन में एक अजीब सी घटना घटी। उसे रात में भयानक स्वप्न आने लगे। वह स्वप्न में देखता कि कोई भयंकर असुर उसका पीछा कर रहा है। धीरे-धीरे यह भय उसके जागते जीवन में भी आ गया। वह अकेले रहने से डरने लगा, व्यापार में निर्णय लेने में कंपकंपी होने लगी। लोग उससे मुंह फेरने लगे। उसकी पत्नी और बच्चे भी चिंतित रहने लगे।

शंकर ने अनेक वैद्यों, ज्योतिषियों से सलाह ली, पर कोई उपाय काम नहीं आया। अंत में एक संत ने उसे बताया – “यह भय तुम्हारे मन में बैठा हुआ है। इसका नाश केवल माँ चंद्रघंटा की कृपा से हो सकता है। नवरात्रि के तीसरे दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करो, उनकी कथा सुनो और मंत्र जपो। वे भय हरने वाली देवी हैं।”

शंकर ने संकल्प लिया। जब चैत्र नवरात्रि आई, तो उसने तीसरे दिन (तृतीया) को विशेष रूप से माँ चंद्रघंटा की पूजा का आयोजन किया। उसने प्रातः स्नान कर, पीले वस्त्र धारण किए। माँ की प्रतिमा स्थापित कर, शुद्ध घी का दीप जलाया और दुर्गा सप्तशती के तृतीय चरित्र का पाठ किया। फिर उसने माँ चंद्रघंटा के ध्यान मंत्र का जप किया – “ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।” उसने पूरे मन से प्रार्थना की – “हे माँ, मुझे इस भय से मुक्ति दो।”

रात्रि में वह मंदिर में ही सो गया। सपने में उसने देखा कि आकाश में घोर अंधकार है, और एक भयानक असुर उसकी ओर दौड़ा आ रहा है। शंकर घबराकर भागने लगा। तभी अचानक आकाश में एक दिव्य प्रकाश फैला। एक सिंह पर सवार, दस भुजाओं वाली, मस्तक पर अर्धचंद्र की घंटी धारण किए माँ चंद्रघंटा प्रकट हुईं। उनके मुख से एक अद्भुत घंटा-ध्वनि निकली। उस ध्वनि से वह असुर तुरंत भस्म हो गया।

माँ ने शंकर से कहा – “हे वत्स, यह असुर तुम्हारे मन का भय था, जो वर्षों से तुम्हें ग्रसित किए हुए था। आज मैंने उसका नाश कर दिया। अब तुम निर्भय हो। याद रखना, जो भी मुझे सच्चे मन से याद करता है, उसका भय सदा के लिए मिट जाता है।” इतना कहकर माँ अंतर्ध्यान हो गईं।

शंकर की नींद खुल गई। उसने महसूस किया कि उसके मन से भय पूरी तरह समाप्त हो चुका था। उसके शरीर में नई ऊर्जा का संचार हुआ। उस दिन से वह पहले से भी अधिक साहसी बन गया। उसका व्यापार फिर से चमकने लगा, और वह गाँव वालों के लिए प्रेरणा बन गया। उसने उस स्थान पर माँ चंद्रघंटा का एक छोटा मंदिर बनवाया, जहाँ आज भी भय से पीड़ित लोग आते हैं और माँ के दर्शन से निर्भय हो जाते हैं।

'चंद्रघंटा की घंटा-ध्वनि, भय का करे क्षय। भक्त जन के तन-मन में, भरे सदा उल्लास-नय।।'

✨ माँ चंद्रघंटा – शौर्य और शांति की प्रतीक (Symbol of Courage & Peace)

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप अद्भुत है। उनके मस्तक पर स्थित अर्धचंद्र घंटे के समान है, जो युद्ध का शंखनाद करने वाली घंटी का प्रतीक है। कहा जाता है कि जब ये घंटा बजती है, तो असुरों की सेना भय से काँप उठती है। इस कथा से हमें सीख मिलती है कि भय केवल मन का विकार है, और माँ की कृपा से उसका नाश संभव है।

  • ✅ माँ चंद्रघंटा भक्तों के समस्त भय को दूर करती हैं।
  • ✅ वे साहस, शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं।
  • ✅ उनकी घंटा-ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है।
  • ✅ उपासना से मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है।

📿 माँ चंद्रघंटा के मंत्र (Mantras of Maa Chandraghanta)

  • ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः। – सरल मूल मंत्र।
  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चंद्रघंटायै नमः। – बीजयुक्त मंत्र।
  • ध्यान मंत्र: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
  • या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

इन मंत्रों का नियमित जप करने से भय, मानसिक अशांति और नकारात्मकता दूर होती है।

🥛 तृतीया का विशेष भोग एवं व्रत (Offerings & Fasting on Tritiya)

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई (खीर, दूध-पुआ) या मिश्री का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। सफेद वस्त्र, सफेद फूल, और चांदी का दान भी इन्हें प्रिय है। व्रत करने वाले भक्त को इस दिन विशेष रूप से माँ के मंत्रों का जप करना चाहिए और दुर्गा सप्तशती के तृतीय अध्याय का पाठ करना चाहिए।

इस दिन व्रत रखने से मन को स्थिरता, साहस और निर्भयता प्राप्त होती है।

🔔 भय दूर करने के उपाय (Remedies to Remove Fear)

  • ✅ प्रतिदिन माँ चंद्रघंटा के मंत्र का 108 बार जप करें।
  • ✅ मंदिर में घंटा बजाकर प्रवेश करें – इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
  • ✅ सोने से पहले माँ की आरती का श्रवण करें।
  • ✅ तृतीया के दिन पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
  • ✅ गाय का दूध दान करें।
  • ✅ “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चंद्रघंटायै नमः” का जप करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ भी लाभकारी है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: माँ चंद्रघंटा का स्वरूप कैसा है?
उत्तर: माँ चंद्रघंटा के दस हाथ हैं, वे सिंह पर सवार हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटे के आकार में सुशोभित है। यह रूप युद्ध के लिए सज्ज होते हुए भी अत्यंत शांतिप्रद है।

प्रश्न 2: तृतीया के दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा से क्या लाभ होता है?
उत्तर: इस दिन पूजा करने से भय, मानसिक अशांति, बुरे सपने और नकारात्मकता दूर होती है। भक्त साहसी, निर्भय और आत्मविश्वासी बनता है।

प्रश्न 3: क्या माँ चंद्रघंटा को कोई विशेष भोग प्रिय है?
उत्तर: माँ को दूध से बनी खीर, मिश्री, और सफेद मिठाई अर्पित करना शुभ माना जाता है।

प्रश्न 4: क्या माँ चंद्रघंटा की उपासना से ग्रह दोष भी शांत होते हैं?
उत्तर: हाँ, माँ चंद्रघंटा चंद्र दोष निवारक मानी जाती हैं। इनकी उपासना से मन की चंचलता और भय शांत होता है, जो चंद्र ग्रह के प्रभाव से जुड़ा है।

तृतीया: चंद्रघंटा के दर्शन से मिटा भय – यह कथा हमें बताती है कि भय केवल मन का भ्रम है, और माँ चंद्रघंटा की कृपा से वह भ्रम मिट जाता है। जब भी हमारे जीवन में भय, अशांति या नकारात्मकता आए, हमें माँ चंद्रघंटा का स्मरण करना चाहिए। उनकी घंटा-ध्वनि हमारे हृदय से भय को निकालकर साहस, शांति और समृद्धि का संचार करती है।

🙏 ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः। जय माता दी। जय माँ चंद्रघंटा। 🙏

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संपादकीय एवं संदर्भ समीक्षा

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