🙏 नवरात्रि की नौ दुर्गा – पूजा, कथा, मंत्र एवं आरती 🙏
नव दुर्गा क्रम-कथा: शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक
🕉️ नव दुर्गा का महत्व (Significance of Nav Durga)
शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान है। ये नौ देवियाँ नव दुर्गा कहलाती हैं – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। प्रत्येक देवी अपने भक्तों को विशिष्ट आशीर्वाद देती हैं। यहाँ हम नौ दिनों की पूजा विधि, व्रत कथा, मंत्र एवं आरती lyrics प्रस्तुत कर रहे हैं।
⛰️ प्रथम दिवस: माता शैलपुत्री (Day 1 – Maa Shailputri)
स्वरूप: माता शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इनका वाहन वृषभ (नंदी) है और हाथ में त्रिशूल धारण किया है। ये मूलाधार चक्र की अधिष्ठात्री हैं।
कथा: पूर्व जन्म में ये सती थीं, जिन्होंने राजा दक्ष के यज्ञ में अपमान सहन न करते हुए योगाग्नि में प्राण त्याग दिए। फिर हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं।
मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।
ध्यान मंत्र: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
भोग: देसी घी (शुद्ध घी) अर्पित करें।
आरती lyrics: ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी… (सामान्य दुर्गा आरती के साथ शैलपुत्री का ध्यान करें।)
📿 द्वितीय दिवस: माता ब्रह्मचारिणी (Day 2 – Maa Brahmacharini)
स्वरूप: तपस्या और त्याग की देवी। एक हाथ में जपमाला, दूसरे में कमंडल। वाहन सिंह है।
कथा: ये देवी अपने कठोर तप से ब्रह्मा, विष्णु, महेश को प्रसन्न करती हैं। इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की।
मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
ध्यान मंत्र: दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
भोग: शक्कर, फल, मिष्ठान्न।
🔔 तृतीय दिवस: माता चंद्रघंटा (Day 3 – Maa Chandraghanta)
स्वरूप: दस भुजाओं वाली, मस्तक पर अर्धचंद्र घंटा। सिंह वाहिनी।
कथा: इनके मस्तक पर घंटा होने से राक्षसों में भय उत्पन्न होता है। युद्ध क्षेत्र में ये देवी असुरों का संहार करती हैं।
मंत्र: ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः।
ध्यान मंत्र: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
भोग: दूध से बनी मिठाई, खीर।
🌞 चतुर्थ दिवस: माता कूष्मांडा (Day 4 – Maa Kushmanda)
स्वरूप: आठ भुजाओं वाली, सिंह वाहिनी। सूर्य के समान तेज।
कथा: जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। “कूष्मांड” अर्थात ब्रह्मांड का अंडा।
मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः।
ध्यान मंत्र: वन्दे वाञ्छितकामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥
भोग: मालपुआ, कुम्हड़ा (पेठा)।
👶 पंचम दिवस: माता स्कंदमाता (Day 5 – Maa Skandamata)
स्वरूप: चार भुजाएँ, गोद में भगवान कार्तिकेय (स्कंद) विराजमान। सिंह वाहिनी।
कथा: माता स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख, बुद्धि और यश की प्राप्ति होती है। कार्तिकेय को स्कंद भी कहते हैं।
मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः।
ध्यान मंत्र: सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
भोग: केला, मिष्ठान्न।
⚔️ षष्ठम दिवस: माता कात्यायनी (Day 6 – Maa Katyayani)
स्वरूप: चार भुजाएँ, खड्ग और कमल धारण किए। सिंह वाहिनी।
कथा: महर्षि कात्यायन के यहाँ पुत्री रूप में प्रकट हुईं, अतः कात्यायनी कहलाईं। इन्होंने महिषासुर का वध किया।
मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
ध्यान मंत्र: चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
भोग: शहद, मेवा।
🌑 सप्तम दिवस: माता कालरात्रि (Day 7 – Maa Kalratri)
स्वरूप: काली के समान भयंकर रूप, चार भुजाएँ, गधा वाहन। भक्तों को भय से मुक्ति देती हैं।
कथा: असुरों का संहार करने के लिए माता ने यह उग्र रूप धारण किया। इनकी उपासना से भूत-प्रेत बाधाएं दूर होती हैं।
मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
ध्यान मंत्र: एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
भोग: गुड़, चावल।
🤍 अष्टम दिवस: माता महागौरी (Day 8 – Maa Mahagauri)
स्वरूप: अत्यंत श्वेत वर्ण, वृषभ वाहन, चार भुजाएँ। सभी पापों का नाश करती हैं।
कथा: तपस्या के बाद भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगाजल से शुद्ध किया, जिससे ये गौर वर्ण की हो गईं।
मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः।
ध्यान मंत्र: श्वेतवृषसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
भोग: नारियल, मिष्ठान्न।
✨ नवम दिवस: माता सिद्धिदात्री (Day 9 – Maa Siddhidatri)
स्वरूप: चार भुजाएँ, कमल, गदा, चक्र, शंख धारण किए। कमल पर विराजमान।
कथा: ये देवी सभी सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। भगवान शिव ने इनकी आराधना करके अर्धनारीश्वर रूप प्राप्त किया।
मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
ध्यान मंत्र: सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
भोग: तिल, हलवा, पूरी।
🎵 नव दुर्गा आरती – संग्रह (Nav Durga Aarti Lyrics in Hindi)
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा तेरी।
कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी तेरी॥
कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री माता।
नव दुर्गा की आरती, जो कोई नित गावे॥
सुख-संपत्ति से भरपूर, वह जनम पावे॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
🙏 ॐ सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥ 🙏
✨ नव दुर्गा उपासना के लाभ (Benefits)
- सभी मनोकामनाओं की पूर्ति, आध्यात्मिक उन्नति।
- रोग-शोक, ऋण, कष्टों से मुक्ति।
- सुख, समृद्धि, वैभव, यश और विद्या की प्राप्ति।
- ग्रह दोषों का निवारण, विशेषकर मंगल, शनि, राहु-केतु।
- परिवार में शांति, संतान सुख और आरोग्य।
नवरात्रि के पावन अवसर पर नव दुर्गा की इस क्रम-कथा का पाठ, मंत्र जाप और आरती से माता रानी अति प्रसन्न होती हैं। नियमपूर्वक पूजा करें और माता का आशीर्वाद प्राप्त करें।
🙏 ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। जय माता दी, जय अम्बे गौरी। 🙏
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